ढैचा की बोवाई शुरू करें किसान

आजमगढ़ के जिला कृषि अधिकारी डा0 उमेश गुप्ता ने बताया कि जनपद में गेंहूॅ फसल की कटाई लगभग पूर्ण हो चुकी है। वर्तमान समय में हुई वर्षा के कारण खेतों में पर्याप्त नमी भी है। कृषकों को मृदा में रीसाइक्लिन हेतु ढ़ैचा की बुवाई करने का सुनहरा मौका है। ढ़ैचा को हरी खाद के रूप में उपयोग करने के कारण मृदा में कार्बनिक तत्व नाइट्रोजन, पोटैशियम, कैल्शियम आदि बढ़ने के साथ-साथ फसल की उत्पादकता भी बढ़ती है। हरी खाद का मुख्य उद्देश्य खेतो में आई आवश्यक कार्वनिक पदार्थ नाइट्रोजन, पोटैशियम, कैल्शियम आदि खनिजों की कमी को पूरा करना है। जनपद में मुख्यतः धान एवं गेंहूॅ की खेती होती है, जिसमें रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग होता है, जिससे मृदा की क्षारीयता लगातार बढ़ रही है और मिट्टी के कार्बनिक तत्व कम हो रहे है। स्वस्थ मृदा के लिए आवश्यक 0.8 प्रतिशत कार्बनिक तत्व के सापेक्ष जिले की मृदा में महज 0.3 प्रतिशत कार्बनिक तत्व बचे है जिसके कारण उर्वरता कम हो गयी है।
उन्होंने बताया कि जनपद हेतु कृषि निदेशालय लखनऊ द्वारा 600 कु0 ढ़ैचा बीज का आवंटन किया गया है, जिसका शत ्प्रतिशत् उठान कर जनपद के समस्त राजकीय कृषि बीज भण्डारों पर आपूर्ति की जा रही है। ढ़ैचा बीज का बिक्रय मूल्य 5400 रू0 प्रति कु0 निर्धारित की गयी है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन योजनान्तर्गत प्रदर्शन हेतु 90 प्रतिशत् का अनुदान देय है जबकि सामान्य वितरण हेतु 50 प्रतिशत् अनुदान अनुमन्य है। कृषको को बीज सम्पूर्ण मूल्य दे कर बीज क्रय करना होगा तथा अनुदान की धनराशि सम्बन्धित कृषक के बैंक खाते में डी0बी0टी0 के माध्यम से भुगतान किया जायेगा।

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