न्याय की देवी के आंख की पटटी खोलेगी नेलोपा

5 years ago मधुसूदन 0

आजादी के लगभग सात दशक बीतने को है. किन्तु आज भी स्वतन्त्र भारत में न्याय सर्वसुलभ नहीं है. भारतीय न्यायिक प्रणाली दुनिया में अपना एक विशेष महत्व रखती है. इसमें सन्देह नहीं है कि किसी भी देश की जनता कितनी खुशहाल है यह वहां की न्याय व्यवस्था से पता चलता है. भारतीय न्याय-व्यवस्था का सबसे नकारात्मक पक्ष यह है कि यहां विलम्वित एवं उबाऊ न्याय मिलता है. कभी कभी तो पीड़ित पक्षकार के जीवनकाल में न्याय नहीं मिल पाता है. ऐसे में प्रजा के सुख की कल्पना सहजता से की जा सकती है. न्याय के मन्दिरों में न्याय की देवी अपने आंखों पर पटटी बांधे एक हाथ में तराजू तथा दूसरे हाथ में दो धारी तलवार लिए खड़ी रहती है. जिसके आंख पर पटटी बंधी हो तथा हाथ में दो धारी तलवार हो उससे न्याय की अपेक्षा करना दिवास्वप्न देखने से ज्यादा कुछ भी नहीं है क्योंकि अन्धे व्यक्ति को यदि दो धारी तलवार मिल जाये तो वह दोनों (सामने वाले का तथा अपना) का गला काट लेगा.

उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में एक पार्टी ऐसी है जो निरन्तर गरीबों, मजलूमों, नौजवानों, छात्रों, बुनकरों, किसानों, श्रमिकों, पीड़ितों तथा न्याय से वचिंत तबकों आदि के हक व इंसाफ की लड़ाई आज भी लड़ रही है. जिसका नाम नेशनल लोकतांत्रिक पार्टी है और उसके मुखिया तथा राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहम्मद अरशद खान हैं.

इस समय रमजान का पाक महीना चल रहा है. मो.अरशद खान दिन भर रोजा रहते हैं परन्तु शायद ही ऐसा कोई दिन होगा जब मो.अरशद खान और उनकी नेशनल लोकतांत्रिक पार्टी के कार्यकर्ता सूबे के किसी न किसी कोने में धरना प्रदर्शन नहीं करते हैं. सीमित साधनों एवं बुलन्द हौसलों से जन सेवा का ऐसा जुनून कभी कभी ही देखने को मिलता है. नेलोपा उत्तर प्रदेश की पुलिस द्वारा फर्जी तरीके से फसाये गये तथाकथित आंतकवादी मौ.तारिक कासमी एवं पुलिस अभिरक्षा में मृत खालिद मुजाहिद के न्याय के लिए पहले दिन से ही संघर्षरत है.

मो. अरशद खान एक अनौपचारिक भेंट वार्ता के दौरान जनहित इंडिया के प्रतिनिधि से बताते हैं कि नेलोपा न्याय की देवी के आंखों पर बंधी पटटी के खोले जाने तक जनता के इंसाफ की लडाई सड़क से संसद तक लडे़गी.इसके लिए हमारा प्रत्येक कार्यकर्ता अपना सर्वस्व न्यौछावर करने को सदैव तैयार बैठा है.

न्यायिक प्रणाली में आपेक्षित सुधार के सम्बन्ध में अपने विचारों को व्यक्त करते हुए मो.अरशद खान सात सूत्रीय सुझाव प्रस्तुत करते हैं. 1- जिस तरह पीड़ितों के लिए पुलिस थाने चौबीसों घन्टे खुले रहते है उसी तरह न्यायालय भी न्याय प्रदान करने के  लिए चौबीसों घन्टे खुले. 2- सुनवायी समयबद्ध हो और मुकदमों को चार भागों में बांट दिया जाये जिसमें क्रमशः तीन माह, छः माह, एक वर्ष और अधिकतम दो वर्ष से ज्यादा समय न लगे. 3-मुन्सफ न्यायालय सभी तहसील मुख्यालयों पर हो और जज मौके का स्थलीय निरीक्षण करके सबूत देखे एवं गवाहों से अकेले में बात करे. 4-ग्राम न्यायालय अथवा मोबाइल कोर्ट का गठन हो. 5- उच्च न्यायालय की सहायक शाखायें सूबे के सभी महानगरों अथवा मण्डल मुख्यालयों पर खुले. 6-सर्वोच्च न्यायालय की शाखायें सभी राज्यों की राजधानियों में हों. 7- सबको सस्ता, समयबद्व न्याय सुलभ हो और भारतीय दंण्ड सहींता में संशोधन करके शख्त से शख्त दंण्ड का प्रवाधान हो.

मो. अरशद खान का मानना है कि यदि इस देश की न्याय प्रणाली उक्त सुझावों की दिशा में कार्य करे तो न्याय के मंदिर की देवी के आंख की पटटी अपने आप खुल जायेगी और न्याय होता हुआ सबको दिखायी देने लगेगा. यदि ऐसा नहीं हुआ तो वह दिन दूर नहीं जब यह देश एक जन-विप्लव देखेगा क्योंकि देश की जनता नेताओं के झूठे वादे एवं भ्रष्टाचार से तंग है और परिवर्तन के लिए तैयार है.