बेबस नेतृत्व असहाय प्रदेश

5 years ago एम सांकृत्यायन 0

पूर्व विधायक सर्वेश सिंह ‘सीपू’ की हत्या के बाद सभी सियासी सूरमा सहमें एवं सिहरे हुए हैं. सूबे की सियासत एक बार फिर से खून से लथपथ होकर हिलोरे खा रही है. सरकार की खामोशी एवं खुली गुण्डागर्दी ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की कार्य क्षमता को कठघरे में खड़ा कर दिया है.

देश के सबसे बड़े सूबे की कानून व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है. हत्या और बलात्कार जैसी प्रतिदिन घटित होने वाली घटनाओं से प्रदेश जल रहा है. कानून व्यवस्था तार-तार हो चुकी है. अपराधी बेखौफ एवं अपराध चरम पर है.सत्तासीन नेताओं ने पुलिस को नपुंसक बना दिया है. जब जनप्रतिनिधि स्वयं असुरक्षित हो तो आम आदमी कितना सुरक्षित होगा ? किन्तु जमीनी हकीकत यह है कि सूबे में जब-जब सपा की सरकार सत्तासीन होती है, तब-तब अपराधियों तथा गुण्डों का साम्राज्य स्थापित हो जाता है, और पुलिस भी वर्दीधारी गुण्डा की भूमिका अदा करने लगती है. सपा के शासन काल में अपराधियों और पुलिस में कोई विशेष अन्तर नहीं रह जाता है. दोनों की समानान्तर सत्ता चलने लगती है. इसके बाद जनता और जनप्रतिनिधियों के मौत का सिलसिला प्रारम्भ हो जाता है. ऐसा लगता है कि नेतृत्व नपुंसक और पूरा प्रदेश असहाय हो गया है.

पूर्वी उत्तर प्रदेश (पूर्वांचल) का जनपद आजमगढ़ गाहे-बगाहे सुर्खियों में रहता है. गत 19 जुलाई 2013 की सुबह अभी घड़ी की सूई साढ़े नौ बजा ही रही थी कि जनपद मुख्यालय से लगभग 20 किमी. उत्तर स्थित जीयनपुर कस्बा अपराधियों के गोलियों की तड़तड़ाहट से लहूलुहान हो गया. सगड़ी क्षेत्र के पूर्व सपा विधायक एवं बहुजन समाज पार्टी के नेता सर्वेश सिंह ‘सीपू’ और उनके एक समर्थक भरत राय की अज्ञात हमलावरों ने गोली मार कर हत्या कर दी बेखौफ हमलावरों का जुनून इस कदर बढ़ गया था कि दिन-दहाड़े हत्या करके असलहा हवा में लहराते जिला मुख्यालय की ओर भाग गये.

बेवस एवं बेचारे मुख्यमंत्री

सूबे के मुख्यमंत्री खुद शासन व्यवस्था से नाखुश व परेशान हैं. उनका मानना है कि नौकरशाह जनहित के कार्यों में पूरी रूचि नहीं ले रहें  हैं. जिसके कारण जनता की परेशानियां बढ़ रही हैं. जबकि आमजन इस बात से पूरी तरह वाकिफ है कि सूबे में सत्ता का एक नहीं बल्कि अनेक केन्द्र बन गया है. जो मुख्यमंत्री की बेवसी का प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रुप से समय -समय पर इजहार करता है.

पूर्व विधायक सर्वेश सिंह ‘सीपू’ के हत्या की खबर जंगल में आग की तरह पूरे क्षेत्र में फैल गयी और चन्द मिनटों में समर्थकों का सैलाब उमड़ पड़ा. इस नृशंस हत्या से आहत भीड़ ने अपना आपा खो दिया और आजमगढ़-गोरखपुर राजमार्ग को अवरूद्ध कर उग्र हो गयी.

जनतंत्र में जनता ही स्वामी होती है. प्रायः जनता कानून हाथ में नहीं लेती है. और यदि किसी कारण से कानून हाथ में ले भी लेती है, तो जनता सामने वाले को जला देने की ताकत रखती है. यहां जनता का गुस्सा (क्रोध) जायज था. अपने नेता की हत्या के विरोध में धरना प्रदर्शन करने का उसको अधिकार है. असली दोषी वह हैं जो उसे उग्र होने को प्रेरित (बाध्य) करते हैं. यहां स्थानीय पुलिस मौके की नजाकत को नहीं भांप पायी, और रोज की तरह अपनी औपनिवेशिक मानसिकता से ग्रस्त होकर भीड़ को भेड़ समझकर क्ररतम बर्ताव शरू कर दिया. जिसके परिणाम स्वरूप पूरा कस्बा जल उठा, और उस आग ने कोतवाली व पुलिस के वाहनों आदि को अपने आगोश में ले लिया.

पुलिस ने भी अपना नियंत्रण खो दिया. जनता के ईंट का जवाब पत्थर से देने के बजाय रिवाल्वर एवं राइफल्स की गोलियों से देने लगी. प्रत्यक्षदार्शियों की माने तो स्वयं कोतवाल विजय सिंह ने दौड़ा दौड़ा कर  और घरों में घुसकर गोलियां मारी हैं. लेकिन विड़म्बना यह थी कि मौके पर गोलियां सीमित निकली और गोली खाने वाले सीने असीमित हो चुके थे.

veztreder avran app para conocer gente cercana मौके की नजाकत भांप कप्तान ने लिया विवेक से काम

http://beachgroupcommercial.com/?kachalka=sistema-binario-trader&c2e=b7 हृदय विदारक, जघन्य एवं निन्दनीय घटना से आक्रोशित जनता के क्रोध एंव दुःख की अनुभूति पुलिस कप्तान अरविन्द सेन ने किया. वह मौके की नजाकत को भांप कर मौन रहे और विवेक से काम लिया यदि कप्तान भी कोतवाल की भांति आपा खो देते तो केवल अनर्थ ही होता. यहां पर बेबाक टिप्पणी समीचीन होगी कि कप्तान अरविन्द सेन के प्रति जनपद की जनता में एक ऐसी अवधारणा है कि वह सभी फरियादियों की फरियाद को पूरी संजीदगी से सुनते हैं और फिर सम्बन्धित मातहतों को पूरी संवेदना के साथ आदेश भी देते हैं किन्तु यह बात अलग है कि उनके मातहतों की हालत अग्रेजों के जमाने के जेलरों की भांति है जो अपने बदलियों के बाद भी जल्दी बदलने का नाम नहीं लेते हैं. एक कान से सुनकर दूसरे कान से निकाल देने में सिद्धहस्त हैं. कप्तान साहब जितने संवेदनशील हैं उनकी पुलिस उतनी ही असंवेदनशील है, क्योंकि उनकी पुलिस की पहुंच उच्च सत्तासीन नेताओं तक है.

इस हृदय विदारक एवं दुस्साहसिक घटना की खबर चन्द मिनटों में जनपद मुख्यालय से होते हुए समूचे सूबे में पहुंच गयी. जिले के आला अधिकारियों ने आनन-फानन में घटना स्थल का रूख किया. जब तक पुलिस कप्तान अरविंद सेन पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचते तब तक स्थिति बेकाबू हो चुकी थी. भीड़ का एकछत्र साम्राज्य स्थापित हो चुका था. जिससे अब पुलिस वालों को घायल होने की बारी आ गयी थी. भीड़ रह रहकर उग्र हो जाती थी जिसमें दर्जनों सिपाही घायल हुए और पुलिस के वाहन जलकर क्षतिग्रस्त हो गये,किन्तु पुलिस कप्तान ने मौके की नजाकत को भांप कर विवेक से काम लिया. अब पुलिस शांत हो गयी थी. इसलिए जनता का क्रोध भी थोडी देर में शान्त हो गया.

इसके बाद भी पुलिस व प्रशासन के आलाधिकारी शव के समीप तक पहुंचने का साहस नहीं जुटा पा रहे थे. अपराह्न लगभग तीन बजे जब सर्वेश सिंह ‘सीपू’ की पत्नी वन्दना सिंह लखनऊ से आयी तो एक बार फिर दृश्य हृदय विदारक हो गया वहां मौजूद पत्थर दिल भी पिघल गये. सबकी आंखें नम हो गयी. थोड़ी देर बाद जब जिलाधिकारी नीना शर्मा हिम्मत जुटाकर शव स्थल की ओर बढ़ी तो भीड़ ने नत मस्तक हो उन्हें रास्ता दे दिया. उन्ही के पीछे-पीछे पुलिस कप्तान अरविन्द सेन भी पहुंच गये. सभी आवाक, हतप्रभ एवं गमगीन थे. किन्तु मृत्यु पर कौन विजय प्राप्त कर सकता है़? यदि मनुष्य का थोड़ा भी बस चलता तो लोंग बहुत कुछ करते. नियति को यह मंजूर नहीं था कि सीपू अपनी पत्नी, बच्चों एवं चाहने वालों को एक बार आंख खोलकर देख लें. अब केवल हृदय पाषाण बनाने के अलावा दूसरा कोई मार्ग नहीं बचा था. इसलिए देर रात न चाहते हुए भी परिजनों ने अपने चहेंतों को पोस्टमार्टम एवं कानूनी प्रक्रिया हेतु पुलिस को सुपूर्द कर दिया. इस प्रकार पुलिस ने एक साथ चार शवों का पोस्ट मार्टम करवाया.

इस दौरान पुलिस और अपराधियों के बीच भेद समाप्त हो चुका था दोनों ओर से दो-दो हत्यायें कर दी गयी थी. अपराधियों ने जहां मुलयाप सिंह यादव की सरकार में पर्यावरण मंत्री रह चुके अमवारी नरायनपुर निवासी स्व.रामप्यारे सिंह के राजनीतिक उत्तराधिकारी तथा सबसे छोटे बेटे पूर्व सपा विधायक व बसपा के नेता सर्वेश सिंह ‘सीपू’ तथा भरत राय पुत्र अवधेश राय निवासी ग्राम मऊ कुतुबपुर आजमगढ़ की नृशंस हत्या की, वहीं पुलिस की गोली से भी स्थानीय जीयनपुर कस्बा निवासी जितेन्द्र गुप्ता की मौके पर हीे मृत्यु हो गयी और पेशे से अध्यापक रहे चन्द्रभान चौबे पुत्र बच्चू चौबे निवासी ग्राप रामपुर गाढ़ा (अमुवारी नरायनपुर) की मृत्यु जिला चिकित्सालय से रेफर होकर वाराणसी जाते समय रास्ते में हो गयी. इस बीच घटना के पांच दिन बाद संजय विश्वकर्मा पुत्र लालचन्द विश्वकर्मा निवासी ग्राम अनन्तपुर बर्जला की मृत्यु वाराणसी के एक निजी चिकित्सालय में इलाज के दौरान हो गई.

site de rencontre non payant ile maurice avran1हिरासत में कोतवाल, मुकदमा दर्ज

go site घटना के वक्त जीयनपुर के कोतवाल रहे विजय सिंह के विरुद्ध हत्या व हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज करके उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है. उल्लेखनीय है कि पूर्व विधायक सीपू की हत्या के बाद भड़की भीड़ को काबू में करने के लिए पुलिस बल को गोलियां चलानी पड़ी जिससे दो लोगों की मृत्यु हो गयी और दर्जनों लोग घायल हो गये. प्रत्यक्षदर्शियों एवं घायलों का आरोप था कि कोतवाल विजय सिंह दौड़ा दौड़ाकर गोली मार रहे थे.

इस घटना में जनता और पुलिस की ओर से लगभग बराबर दर्जनों लोग घायल हुए. जो ईलाज के बाद स्वस्थ हो जायेगे किन्तु एक बार फिर जनता की ही अपूर्णनीय क्षति हुयी है. इसलिए जनतंत्र में जनता के सेवकों का यह कर्तव्य हो जाता है कि वह किसी भी कीमत पर जनता की क्षति को रोके. यदि पुलिस अपनी कार्यशैली एवं व्यवहारों में परिवर्तन नहीं करेगी तो ऐसी क्षतियों की पुनरावृत्ति रोकना असम्भव है.

सर्वेश सिंह ‘सीपू’ की हत्या के बाद सभी सियासी सूरमा सहमें एवं सिहरे हुए हैं. सूबे की सियासत एक बार फिर से खून से लथपथ होकर हिलोरे खा रही है. सरकार की खामोशी एवं खुली गुण्डागर्दी ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की कार्य क्षमता को कठघरे में खड़ा कर दिया है. सूबे में बढ़ती अपराधिक घटनायें विपक्षी दलों को मौका देती हैं. हत्या और बलात्कार की घटनायें आम हो गयी हैं. कोई ऐसा दिन नहीं जिस दिन अखबारों एवं टी.वी. चैनलों के पास ऐसी खबरें न हों. समूचा प्रदेश भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, खाद-बीज, बिजली, सड़क, पानी, स्वास्थ्य चिकित्सा व शिक्षा आदि समस्याओं से जूझ रहा है. सरकार और सरकार के मंत्री पूरी तरह बेखबर एवं बेखौफ हो कर सत्ता की मलाई काट रहें हैं. यदि समय रहते समुचित कार्यवाही द्वारा विधि का शासन स्थापित करके बढ़ती अपराधिक घटनाओं की पुनरावृत्ति तत्काल नहीं रोकी गयी और जन समस्यों का यथाशीघ्र समयबद्ध समाधान नहीं हुआ तो मिशन 2014 का सपना, सपना हीे रह जायेगा. जो भविष्य में शायद पूरा (सत्य) होगा की नहीं यह भविष्य की गर्त में है क्योंकि ऐसा वक्त बयां करते दिख रहा है.

see url सियासी वर्चस्व एवं रंजिश के कारण हुई हत्या

http://www.romagnamotorsport.it/?binarnewe=forex-binario-online&8d1=11 सगड़ी क्षेत्र के ग्राम छपरा निवासी माफिया ध्रुव सिंह उर्फ कुन्टू सिंह की पूर्व विधायक सर्वेश सिंह ‘सीपू’ से पुरानी रंजिश थी. दोनों सियासत में एक दूसरे के विरोधी थे. उनके बीच की यह रार उस समय और बढ़ गयी जब एक जूनियर हाईस्कूल के प्रबन्धतंत्र के वर्चस्व को लेकर प्रबन्ध समिति के चुनाव के दिन एक सदस्य को कुन्टू सिंह जबरन अपने पक्ष में उठा लिया तब सीपू को यह बात अच्छी नहीं लगी और उन्होंनें ने एस.एस.पी. से शिकायत की. जिस पर त्वरित कार्यवाही करते हुये पुलिस ने छापा मारकर कुन्टू को गिरफ्तार करके काफी मात्रा में असलहे बरामद किया. इस गिरफ्तारी से पहले सीपू और कुन्टू के बीच चल रही सियासी समझौते की पहल टूट गयी. जिसके परिणाम स्वरूप सीपू की हत्या हुई.

avran2सीपू सिंह मेरे बेटे के समान थे। चार लोगों की जानें चली जाना अफसोसजनक है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और सपा मुखिया मुलायम सिंह खुद चिंतित हैं। अपराधी किसी भी कीमत पर छोड़े नहीं जाएंगे।

http://inter-actions.fr/bilobrusuy/4805 – बलराम यादव, पंचायती राजमंत्री, उ.प्र.

avran3इस तरह की घटना से मैं बेहद दुखी हूं। ऐसी घटना नहीं होनी चाहिए। अपराधी कितने भी शक्तिशाली हो नहीं बख्शे जायेंगे। प्रदेश की पूर्व बसपा सरकार की तुलना में सपा की सरकार में अपराध पर अंकुश लगा है। विरोधी ताकतें माहौल खराब करने की साजिश कर रही हैं।

http://libraryinthesky.org/?bioeser=mujer-soltera-busca-resumen&aed=ec – दुर्गा प्रसाद यादव, परिवहन मंत्री, उ.प्र.

avran4मेरा पूर्व विधायक सर्वेश सिंह से घरेलू संबंध रहा है। हत्या के बाद विरोधी ताकतों ने साजिशन घटना को दूसरा रूप दे दिया। अपराधियों को पकड़ने के लिए पुलिस को मौका ही नहीं दिया गया।

le operazioni sulle operazioni binarie trade – वसीम अहमद, बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री, उ.प्र.

avran5मैं इस नृशंस हत्या काण्ड से काफी दुःखी हूं। लोकतंत्र में अपराधियों का बढ़ रहा हौसला भविष्य के लिए घातक है। प्रदेश में कानून का राज है। कानून अपराधियों को सजा देगा।

http://www.newmen.eu/pigils/niodjr/111 – यशवन्त सिंह, पूर्व आबकारी मंत्री व एम.एल.सी.

 

avran6सीपू के बड़े भाई ने पूर्व विधायक व उनके साथी की हत्या तथा उसके बाद पुलिस फायरिंग में मारे गए लोगों के प्रकरण की सीबीआई जांच की मांग की है। क्योंकि प्रदेश पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं है। हत्याकांड के बाद घटनास्थल और अंत्येष्टि स्थल पर लोग जिस तरह से प्रतिक्रिया कर रहे थे, उससे स्पष्ट था कि पुलिस की भूमिका संदिग्ध है।

– सुखदेव राजभर, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष, उ.प्र.

avran7पूर्व विधायक सर्वेश सिंह और उनके अंगरक्षक की हत्या प्रदेश में जंगलराज का सबूत है। कानून- व्यवस्था के मुद्दे पर जनादेश प्राप्त करने वाली सपा अपने वायदे में पूरी तरह विफल रही। बेतहाशा बढ़े अपराधों से आम आदमी दहशतजदा है। पूर्वाचल एक बार फिर गैंगवार की दहलीज पर खड़ा है। जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है। जनता को धोखा देने वाली सपा सरकार का सत्ता में बने रहने का कोई हक नहीं है। – डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा

कड़ी सुरक्षा के बीच हुआ अंतिम संस्कार

पूर्व विधायक एवं बसपा नेता सर्वेश सिंह उर्फ सीपू का अंतिम संस्कार कड़ी सुरक्षा के बीच आजमगढ़ के दोहरीघाट (मऊ) में मुक्तिधाम श्मशान घाट पर हुआ। पूर्व विधायक की हत्या के शोक में जीयनपुर कस्बे का बाजार पूरी तरह बंद रहा। तथा हजारों की संख्या में लोगों ने अपने लोकप्रिय नेता को अश्रुपूर्ण नेत्रों से अन्तिम विदाई दी।

उजड़ गई चार मांगे और एक गोद

जीयनपुर हत्याकांड के बाद पूरा क्षेत्र सदमे में है। हत्याकांड में विधायक की पत्नी समेत चार महिलाएं विधवा हो गईं। पूर्व विधायक सर्वेश सिंह के परिवार में उनकी पत्नी वंदना के साथ दो संतानें थीं। हालांकि वह तीन भाई-बहनों में सबसे छोटे थे। पूर्व विधायक के साथ मारे गए भरत राय पुत्र अवधेश राय जीयनपुर कोतवाली के मऊ कुत्तूपुर गांव का निवासी था। भरत की मौत की सूचना पर पत्नी अर्पिता, मां लीलावती सहित परिवार के लोग धाड़े मार रोने लगे। यही स्थिति जीयनपुर के रामपुर (टेकन गावा) निवासी चंद्रभान चौबे पुत्र बेचू के परिवार की भी थी। चंद्रभान पेशे से शिक्षक था। मौत की सूचना जैसे ही परिवार हो हुई, पत्नी नीता चौबे गश खाकर गिर गई। दो बच्चों का पिता चंद्रभान अपनी पुत्री मनोरमा की शादी की तैयारी में लगा था। उधर, मरने वालों में एक अन्य दुकानदार जितेंद्र गुप्ता पांच भाइयों में सबसे बड़ा था। परिवार के लोग उसकी शादी करने के लिए लड़की देख चुके थे। हादसे से सपना टूट गया। जितेंद्र गुप्ता की मौत से मां की गोद सूनी हो गई। इस बीच गम्भीर रूप से घायल संजय विश्वकर्मा पुत्र लालचंद विश्वकर्मा निवासी ग्राम अनन्तपुर बर्जला की वाराणसी के एक निजी अस्पताल में चिकित्सा के दौरान मौत हो गई इस प्रकार इस हत्याकाण्ड में चार मांगे और एक गोद सूनी हो गई।

पिता से मिली थी विरासत

बसपा नेता सर्वेश सिंह उर्फ सीपू को पिता रामप्यारे सिंह से राजनीति विरासत में मिली थी। पिता के बीमार रहने से वर्ष 2004 में सर्वेश सिंह उर्फ सीपू ने राजनीतिक जीवन में कदम रखा। पहली बार सपा के टिकट पर सगड़ी सीट से वर्ष 2007 में विधायक चुने गए। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में सर्वेश सिंह ने आजमगढ़ सदर विधानसभा से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा। पिता रामप्यारे सिंह वर्ष 2003 में सपा मुखिया मुलायम सिंह के मंत्रिमंडल में पर्यावरण मंत्री रहे। सगड़ी क्षेत्र के अमुवारी नरायनपुर गांव के मूल निवासी मृदुल स्वभाव के रामप्यारे सिंह कभी अजमतगढ़ ब्लाक के प्रमुख हुआ करते थे। 90 के दशक में सपा के तत्कालीन राष्ट्रीय नेता अमर सिंह के करीब आए। वर्ष 1996 में सपा के टिकट पर पहली बार सगड़ी विधानसभा से विधायक चुने गए। वर्ष 2002 में सगड़ी विधानसभा से सपा के टिकट पर उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। हार के बाद भी वे सपा से एमएलसी चुने गए और वर्ष 2003 में सपा मुखिया मुलायम सिंह के मंत्रिमंडल में पर्यावरण मंत्री दर्जा प्राप्त किया। इस बीच वे कैंसर से पीड़ित हो गए। ऐसे में छोटे पुत्र सर्वेश सिंह उर्फ सीपू ने राजनैतिक क्षेत्र में सक्रियता दिखाई। इसी बीच दो साल बाद रामप्यारे सिंह का 31 मई 2005 को निधन हो गया। स्व.रामप्यारे सिंह की सगड़ी विधानसभा क्षेत्र में तैयार की गई राजनीतिक जमीन का फायदा सर्वेश को मिला। वर्ष 2007 में सर्वेश ने सपा केटिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़ते हुए जीत हासिल की। वर्ष 2010 आते-आते सपा से ठाकुर अमर सिंह के अलग होते ही सीपू सिंह भी ठाकुर अमर सिंह के पाले में चले गए । वर्ष 2011 में सीपू ने बसपा का दामन थाम लिया। इसके साथ ही सर्वेश के बड़े भाई संतोष सिंह उर्फ टीपू भी बसपा में आ गए। वर्ष 2012 में बसपा के टिकट पर टीपू सिंह ने सगड़ी विधानसभा से चुनाव लड़ा और पूर्व विधायक सीपू सिंह ने आजमगढ़ सदर विधनसभा से सपा के दुर्गा प्रसाद यादव के मुकाबले मैदान में ताल ठोकी। हालांकि दोनों भाइयों को हार का सामना करना पड़ा। आजमगढ़ सदर विस सीट से हार के बाद भी सर्वेश सिंह सगड़ी विस क्षेत्र में अपने पिता की तैयार राजनीतिक जमीन को संवारने में लगे रहे।