कौन हूं मैं

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शब्द अगर रख सको तो एक निशानी हूँ मैं

खो दो तो एक कहानी हूँ मैं,

जिसे रोक ना पाए ये सारी दुनियाँ

वो एक बूँद आँख का पानी हूँ मैं।।

 

सभी को प्यार देने की आदत है मुझे,

अपनी अलग पहचान बनाने की चाहत है मुझे,

कोई कितना ही गहरा जख्म दे मुझे,

उतना ही मुस्कुराने की आदत है मुझे।।

 

आँखों से देखोगे तो खुश पाओगे मुझे,

दिल से पूछोगे तो दर्द का सैलाब हूँ मैं,

दुनियाँ के सवालों से खफा छोटा सा जवाब हूँ मैं,

जो समझ न पाए उनके लिए कौन हूँ मैं।।

 

इस बेबुनियाद दुनियाँ का छूटा ख्वाब हूँ मैं,

दर्द को प्यार में बदलने का नाम हूँ मैं,

अगर रख सको तो एक निशानी हूँ मैं,

खो दो तो एक कहानी हूँ मैं।।

 

– सुधीर गुप्ता

कक्षा-11

राहुल सांकृत्यायन जन इण्टर कालेज

लछिरामपुर, आजमगढ़ (उ.प्र.)