किशोर न्याय बोर्ड ने माना, दामिनी का सबसे बड़ा दरिंदा नहीं था नाबालिग

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दिल्ली में पैरामेडिकल छात्रा के साथ बीते साल 16 दिसंबर को हुए गैंग रेप मामले में नाबालिग दोषी को सबसे ज्यादा खूंखार बताया गया था। इसके बाद से ही उसे फांसी दिए जाने की मांग सबसे ज्यादा प्रबल रूप से उठी। हालांकि जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के प्रवाधानों के तहत उसे अधिकत्तम तीन साल की सजा सुनाई गई। नाबालिग को सबसे बड़ा दरिंदा बताए जाने के ठीक उलट एक अंग्रेजी अखबार ने अपनी खबर मे दावा किया है कि नाबालिग आरोपी ने पीड़िता दामिनी के साथ सबसे अधिक दरिदंगी नहीं की थी।  किशोर न्याय बोर्ड ने 31 अगस्त को सुनाए अपने फैसले में कहा है कि मामले की सुनवाई के दौरान ऐसा कोई भी साक्ष्य उनके सम्मुख नहीं आया, जो यह दर्शाता हो कि दामिनी के साथ सबसे अधिक दरिंदगी नाबालिग आरोपी ने की हो।