गोधरा दंगो से मोरारजी बने प्रधानमंत्री तो क्या मोदी भी बन पाएगें?

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opciones binarias de argentina गुजरात के तीन व्यक्ति, तीनों गुजराती और और तीनों केन्द्रीय सत्ता के सबसे बडे दावेदारो मे रहे है। पहले थे सरदार वल्लभ भाई पटेल जो नेहरू के समय उपप्रधानमंत्री रहे और जिनके रिश्ते नेहरू से लगभग पूरे समय तनावपूर्ण बने रहें लेकिन एक और गुजराती महात्मा गांधी के प्रति सम्मान के चलते हमेशा चुप रहे और प्रंधानमंत्री बनने की सारी योग्यताओ के बाद भी प्रधानमंत्री नही बन सके। दूसरे थे मोरारजी देसाई। देसाई भी नेहरू के बाद प्रधानमंत्री पद के प्रबल दावेदार थे लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष कामराज ने नेहरू के निधन के बाद पहले लाल बहादूर शास्त्री और शास्त्री के निधन के बाद इंदिरा गांधी को प्रधानमंत्री बनवा दिया। सारी योग्यताओ और क्षमताओ के बाद भी देसाई न ही नेहरू के बाद और न ही शास्त्री के बाद प्रधानमंत्री बन सके। 1975 में इंदिरा ने आपातकाल लगाया। देसाई का इंदिरा से मोह भंग हुआ, अन्य नेताओ के साथ मोराजी देसाई को भी जेल भेज दिया गया। आपातकाल हटा चुनाव हुए, 1977 में जनता दल सत्ता में आया और जयप्रकाश ने देसाई को प्रधानमंत्री बनाया। कोई गुजराती पहली बार प्रधानमंत्री बना। लेकिन बहुत कम लोग जानते है कि मोरारजी देसाई के प्रधानमंत्री बनने मे उस गोधरा दंगो का बहुत बड़ा हाथ है जो गुजरात में साल 1930 मे हुए थे। मोरारजी देसाई उस समय गोधरा के डिप्टी केलक्टर थे। गोधरा दंगो में मोरारजी देसाई पर आरोप लगा कि इनका व्यवहार पक्षपाती रहा और इस कारण मुसलमानो को मारा गया। अंग्रेजी सरकार के आरोपो और दबाव से तंग आकर मोरारजी देसाई ने अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया। गोधरा दंगो ने मोरारजी देसाई को लोगो के बीच लोकप्रिय कर दिया और इसी लोकप्रियता को भूनाने के लिए वे राजनीति मे आ गए और आगे चलकर देश के प्रधानमंत्री बने। तीसरे गुजराती जो प्रधानमंत्री पद के प्रबल दावेदार माने जा रहे है और जो अभी अभी भाजपा की तरफ से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बने है नरेन्द्र मोदी है। मोदी को भी 2002 मे हुए गोधरा दंगो ने लोकप्रिय बना दिया। यह विडंबना ही कही जाएगी कि मोरारजी देसाई और नरेन्द्र मोदी दोनो को गोधरा दंगो ने राजनीति चमकाने का मौका दे दिया। एक प्रधानमंत्री बन गया, दूसरा प्रधानमंत्री बनने के लिए वेटिंग में है।

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