दलितों और पिछड़ों को लुभाती पार्टियां

5 years ago आशीष वशिष्ठ 0

http://unikeld.nu/?ioweo=etx-capital-opinioni&1cd=23 दलित ऐतिहासिक कारणों से अभी तक बीजेपी से दूर रहे हैं, मगर अब इनको अपने साथ जोड़ने के लिए पार्टी जी-जान से जुट गई है. चूंकि पारंपरिक रूप से सवर्ण वोटर उसके साथ रहे हैं, ऐसे में उसकी दिक्कत है कि वह मायावती और रामविलास पासवान की तरह हार्डकोर दलित एजेंडे की वकालत नहीं कर सकती…

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rencontre xavier et johanna वर्ष 2014 में होने वाले आम चुनावों के करीब आते ही अब एक बार फिर सभी राजनीतिक दलों द्वारा जातिगत राजनीति शुरू हो गयी है. सपा, कांग्रेस, भाजपा और बसपा का निशाना सूबे के दलित और पिछड़ा वर्ग के थोक वोट बैंक पर है. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अलीगढ़ रैली में बसपा प्रमुख मायावती पर दलित विरोधी और दलित नेतृत्व को दबाने का के गंभीर आरोप मढ़े. बसपा ने भी राहुल को जवाब देने में देर नहीं की.

follow site समाजवादी पार्टी भी दलित और ओबीसी वोट बैंक पर नजरें गड़ाए बैठी है. आजम खां ने कांग्रेस पर दलितों के शोषण का आरोप लगाया. बीजेपी के पीएम पद के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी पिछड़ी जाति से हैं, ऐसे में भाजपा भी दलित व पिछड़े वर्ग के वोट बैंक को पाले में लाने की कवायद में जुटी है. प्रदेश में लगभग 49 फीसदी वोटर दलित एवं ओबीसी (क्रमशः 21 व 27.5 फीसद) हैं, जो हार-जीत में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं.

http://acps.cat/.well-known/apple-app-site-association सपा की नजर बहुजन समाज पार्टी के दलित वोटों पर है, जिसके चलते सपा 26 नवंबर को लखनऊ में सफाई मजदूरों के लिए एक रैली करने जा रही है. इस रैली में ज्यादा से ज्यादा मात्रा में लोगों को लाने के लिए बाल्मीकि समाज के उन लोगों को भी निशाना बना रही है, जो निजी क्षेत्रों में सफाई का कार्य कर रहे हैं.

binaire opties kassa इस रैली में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अतिथि होंगे. सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव का सम्मान सफाई मजदूरों की तरफ से किया जायेगा. इस रैली में सपा प्रमुख और मुख्यमंत्री इन सफाई मजदूरों के लिए कई लुभावनी घोषणाएं कर सकते हैं. 17 पिछड़ी जातियों की अधिकार रथयात्रा और सामाजिक न्याय रथयात्रा आयोजित कर रही है. सपा ने आरक्षण बढ़ाओ, आरक्षण बचाओ के लिए संघर्ष करने का ऐलान किया है.

http://irinakirilenko.com/?deribaska=binary-options-open-demo-account&2f4=34 कांग्रेस ने अपने परंपरागत वोटर दलितों को एक बार फिर से अपनी पार्टी से जोडने की कोशिश तेज कर दी है. इसके तहत कांग्रेस दलित सशक्तिकरण नाम से एक अभियान शुरू करने जा रहा है, जिसमें दलितों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाएगा. अलीगढ़ सुरक्षित लोकसभा क्षेत्र में प्रथम रैली का निर्णय दलित वोट बैंक साधने की रणनीति का हिस्सा था. रैली में राहुल ने बसपा पर तो निशाना साधा ही, वहीं दलितों को कांग्रेस की रीढ़ की हड्डी भी बताया.

go here दलित तबका ऐतिहासिक कारणों से अभी तक बीजेपी से करीब-करीब दूर ही रहा है. पार्टी अब इस तबके को अपने साथ जोड़ने के लिए जी-जान से जुट गई है. पारंपरिक रूप से सवर्ण वोटर बीजेपी के साथ रहे हैं. ऐसे में उसकी दिक्कत यह है कि वह मायावती और रामविलास पासवान की तरह हार्डकोर दलित एजेंडे की वकालत नहीं कर सकती है.

go here पार्टी नेतृत्व को यह भी पता है कि पुरानी पीढ़ी के दलितों को लुभाना और उनको अपने साथ जोडना कठिन है, लिहाजा वह इस समाज के पढ़े-लिखे मिडिल क्लास नौजवानों को टारगेट करना चाहती है. इसके लिए वह संघ की सामाजिक समरसता की थ्योरी पर काम कर रही है.

here भाजपा को लगता है कि पिछड़ी जाति के मोदी की अगुवाई में सूबे के ओबीसी वोट बैंक में सेंध लगा सकती है. पहली बार प्रदेश में भाजपा ने ओबीसी मोर्चे का गठन किया है. मोदी इफेक्ट के चलते सपा, बसपा, कांग्रेस, अपना दल और जनता दल यूनाईटेड में बैचेनी का माहौल है. अपना दल और जनता दल यू आरक्षण के मुद्दे पर प्रदेश सरकार को लगातार घेर रहे हैं.