नीतीश के खिलाफ घुसखोरी का लम्बित मामला

4 years ago नवल किशोर कुमार 0

बतौर रेलमंत्री नौकरी देने के नाम पर पैसे कमाने अथवा अपने चहेते औद्योगिक माफियाओं को खुश करने के आरोपी केवल वर्तमान रेलमंत्री पवन कुमार बंसल ही नहीं रहे हैं। ललित नारायण मिश्र से लेकर नीतीश कुमार ने भी इस तरह के अनेक पाप किये हैं। एक प्रमाण यह कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ महाराष्ट्र के नागपुर के एक न्यायालय में एक मामला लंबित पड़ा है। मामला घूसखोरी से संबंधित है। हालांकि जिस व्यक्ति ने उनके खिलाफ यह मामला पुलिस को दर्ज कराया, बाद में उसने पूरे परिवार के साथ सामूहिक आत्महत्या कर ली। हम जिस व्यक्ति की बात कर रहे हैं उसका नाम आर के डोगरे है। वह मूल रुप से छत्तीसगढ के दुर्ग जिले के चरोदा नामक गांव का रहने वाला था।

वर्ष 2004 में अपनी पत्नी एन एस डोगरे, पुत्रियां श्वेताभ डोगरे, प्रियंका डोगरे और नेहा डोगरे के साथ खुद को समाप्त करने से पहले आर के डोगरे ने एक पत्र स्थानीय पुलिस को भेजी थी। इसकी एक प्रति उसने तत्कालीन रेलमंत्री लालू प्रसाद, यूपीए चेयरमैन सोनिया गांधी, छत्तीसगढ के मुख्यमंत्री सहित अनेक लोगों को भी भेजा था।अपने पत्र में आर के डोगरे ने स्पष्ट रुप से लिखा है कि तबीयत खराब रहने की वजह से उसने रेलवे से वीआरएस ले लिया। उसकी मुलाकात जी इमाम नामक एक शख्स से हुई जो बिलासपुर के डीपीओ आफिस में कार्यरत था। उसने डोगरे की मुलाकात अपने पुत्र डेविड राजू से करवाया। डेविड राजू ने उसे बताया कि रेलवे में उसकी पहूंच बहुत उपर तक है। अगर वह (डोगरे) चाहे तो उसके पुत्री को रेलवे में नौकरी मिल सकती है। अपनी पहूंच स्थापित करने के लिए डेविड राजू ने तत्कालीन रेलमंत्री नीतीश कुमार के साथ अपनी विशेष तस्वीर दिखलायी।आर के डोगरे ने अपने सुसाइड नोट में लिखा है कि डेविड राजू ने ही उसकी मुलाकात प्रबोध कुमार से करवायी जो उस समय नीतीश कुमार के विशेष सचिव हुआ करते थे। प्रबोध कुमार ने आर के डोगरे से कहा था कि वह अधिक से अधिक लोगों को लाये ताकि रेलमंत्री जी (नीतीश कुमार) जल्द से जल्द नौकरियां सुनिश्चित कर सकें। इस दरम्यान रिश्वत की पहली किस्त मिलने पर नीतीश कुमार के निर्देश पर उनके विशेष सचिव प्रबोध कुमार ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के तत्कालीन जीएम प्रमोद कुमार को पत्र लिखकर आर के डोंगरे के पुत्री श्वेताभ डोंगरे की नौकरी के संबंध में पत्र लिखा।पत्र में प्रबोध ने उल्लेख किया कि वह इस पत्र के साथ श्वेताभ का बायोडाटा भी भेज रहा है। वह इस मामले को व्यक्तिगत रुप से देखें और रेल मंत्री के विशेष कोटे के तहत उसका नियोजन करें। लेकिन यह सब महज दिखावा साबित हुआ।

आर के डोंगरे ने अपने सुसाइड नोट में उल्लेख किया कि एक बार वह खुद घूस की राशि लेकर रेल भवन गया था। जहां उसकी पहली बार मुलाकात रेल मंत्री नीतीश कुमार से हुई। नीतीश कुमार ने उसे अपने सचिव प्रबोध के पास भेज दिया था। डोंगरे ने इस बात का भी खुलासा किया है कि प्रबोध कुमार ने यह कहकर कि चुनाव होने वाले हैं इसलिए जल्द से जल्द पैसे इंतजाम किये जायें। अपने पत्र में डोंगरे ने स्वीकार किया कि जी ईमाम, डेविड राजू, नीतीश कुमार और प्रबोध कुमार के झांसे में आकर उसने अनेक लोगों से नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे लेकर उन्हें दिये। बाद में जब नौकरी के मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गयी तब डोंगरे ने चक्कर लगाना शुरु किया।

डोंगरे ने पत्र में लिखा कि जब जब वह डेविड राजू से नौकरी नहीं दिये जाने की स्थिति में पैसे लौटाने की बात करता तब वह कहता कि पैसे तो नीतीश कुमार के पास चले गए हैं। अब वे यदि उसका काम नहीं कर रहे हैं तो वह क्या करे। बाद में डोंगरे ने रेल भवन जाकर तत्कालीन रेलमंत्री नीतीश कुमार के विशेष सचिव प्रबोध कुमार से मुलाकात की और नौकरी या पैसे वापस करने की बात कही। जिसपर प्रबोध आगबबूला हो गया और उसने देख लेने की धमकी दी।

डोंगरे के पत्र के अनुसार जिन लोगों ने उसके कहने पर डेविड राजू के जरिए नीतीश कुमार के विशेष सचिव प्रबोध कुमार को पैसे दिये, नौकरी नहीं मिलने पर पैसे वापस करने की मांग करने लगे। डोंगरे ने अपने सुसाइड नोट में लिखा कि वह लोगों के पैसे वापिस करने में सक्षम नहीं है। लोग उसे जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। घर में घुसकर प्रताड़ित करते हैं। इन सबसे आजिज होकर उसने अपने पूरे परिवार के साथ सामूहिक रुप से खुदकुशी करने का निर्णय लिया है।

बाद में आर के डोंगरे का परिवार भागकर नागपुर आ गया और वही उसने अपने पूरे परिवार के साथ सामूहिक रुप से अपनी इहलीला समाप्त कर ली। मामला अब भी कोर्ट में लंबित पड़ा है और नीतीश कुमार अब भी पाक साफ बने हुए हैं।