नेताओं के मुंह में ‘बेंग’

5 years ago नवल किशोर कुमार 0

source url बेंग शब्द मेढक का आंचलिक पर्यायवाची है। गांवों में जब कोई जानबुझकर मुंह नहीं खोलता है तब “मुंह में बेंग” लोकोक्ति का उपयोग किया जाता है। राजद सुप्रीमो के जेल जाने के बाद बिहार के उन नेताओं के मुंह में बेंग समा गया है जो कल तक अपने बयानों के सहारे अपनी राजनीतिक गोटी लाल करते रहे। इनमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी शामिल हैं। इन्होंने लालू प्रसाद के जेल जाने पर अपनी प्रतिक्रिया में “नो कमेंट” कहकर अपने आपको समेट लिया। वहीं भाजपा वाले सुशील मोदी ने केवल यह कहकर कि यह एक न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है और जो जैसा बोयेगा वैसा काटेगा कहकर अपने मुंह में बेंग डाल लिया।

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top free dating sites 2014 शिक्षा मंत्री पी के शाही के मुंह में समाया बेंग उनके गले तक में अटक गया है। बेचारे कुछ भी बोल नहीं पा रहे हैं। वहीं भाजपा वाले रविशंकर प्रसाद जो पेशे से अधिवक्ता भी हैं और लालू के खिलाफ वकालत के बहाने राजनेता तक बन गये, उनके मुंह से भी शब्द नहीं निकल रहे। डा सी पी ठाकुर जैसे मुंहफट नेता भी अपने मुंह में “जाबी” (बैलों के मुंह में लगाया जाने वाला एक अवरोधक) लगाकर बैठे हैं।

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http://ocatusa.org/?iteise=opzioni-digitali-pattern&4c2=a2 कुछ ऐसे नेता भी हैं जिन्होंने अपने मुंह पर लगी “जाबी” को नोंच फेंका है। मसलन जदयू सांसद पूणर्मासी राम और कैप्टन जयनारायण निषाद। इन दोनों ने राजद सुप्रीमो की तारीफ में कसीदे गढे और फिर इसकी सजा पायी। जदयू ने इन दोनों को पार्टी की सदस्यता से छह वर्षों के लिए निलंबित कर दिया है। इनके बाद देवेश चंद्र ठाकुर ने लालू प्रसाद को महान बताया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि दलित और अति पिछड़ा वर्ग के सांसदों को सजा देने वाले जदयू में क्या इतनी हिम्मत है कि वह एक सवर्ण नेता को भी सजा दे। भाजपा के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा पहले ही पार्टी लाइन से अलग होकर लालू के प्रति सहानुभूति जता चुके हैं। हालांकि उन्होंने यह कहकर अपने आपको विवाद से अलग कर लिया कि लालू जी के बारे में उन्होंने जो भी कहा है, वह उनके निजी विचार हैं।

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source site इन नेताओं को छोड़ दें तो वामपंथ के नेताओं के मुंह में भी बेंग समा गया है। एक दीपंकर को छोड़ किसी भी बड़े वामपंथी दल के नेता ने अपना मुंह नहीं खोला है। सबने अपनी जुबान कसकर पकड़ रखा है। हालांकि दीपंकर ने अपने बयान में नीतीश कुमार, शिवानंद तिवारी और ललन सिंह के खिलाफ भी बयान दिया है कि इनके उपर भी चारा घोटाले का पैसा खाने का आरोप लंबित है। सीबीआई को चाहिए कि वह आगामी 22 नवंबर को पूरी निष्पक्षता का प्रदर्शन करे। कांग्रेस के नेताओं की मजबूरी समझी जा सकती है। जब देश के पीएम के मुंह में बेंग हो सकता है तो अन्य नेताओं की औकात क्या है।

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follow site मूल सवाल यह है कि आखिर नेताओं के ‘मुंह में बेंग’ वाली स्थिति क्यों है? निश्चित तौर पर इसकी वजह केवल यह नहीं हो सकती है कि बयान देने से राजद के समर्थक एकजुट होंगे। सबसे बड़ी वजह यह है कि इस हमाम में सभी नंगे हैं। जदयू के एक वर्तमान सांसद जगदीश शर्मा, भाजपा के एक पूर्व विधायक, कांग्रेस वाले जगन्नाथ मिश्र सभी गुनाहगार साबित हुए हैं। इन सबके बावजूद एक बड़ी सच्चाई यह है कि चारा घोटाला का मतलब लालू प्रसाद यादव बना दिया गया है। हर अखबार और न्यूज चैनल में लालू नाम को बेचा जा रहा है। लेकिन मुंह में बेंग अब भी दिख रहा है।

opcje binarne forum opinie बहरहाल, मीडिया का अपना चरित्र रहा है। नेताओं का भी अपना चरित्र है। कब किसके मुंह में बेंग समा जाये कोई कह नहीं सकता है। वैसे मुंह में बेंग होने का सबासे बड़ा कारण यही है कि लालू प्रसाद के जेल जाने के बाद राजद समर्थक एकजुट हुए हैं और हर जगह यानी जमीन से लेकर आसमान तक में उनकी एकजुटता दिख रही है। साइबर संसार में भी राजद के समर्थक आक्रामक रुप में दिख रहे हैं। उनके तर्कों से विरोधियों के हौसले पस्त हैं। राजद समर्थकों के हौसले से नीतीश कुमार तक के हौसले पस्त हैं। कल वेब समाज पर प्रहार करते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि युवाओं को असहिष्णुता का प्रचार नहीं करना चाहिए। पटना के गांधी संग्रहालय में आयोजित सभा को संबोधित कर रहे थे तब उनके निशाने पर केवल नरेंद्र मोदी नहीं थे बल्कि लालू यादव भी थे। सीधे मुंह बोलने की स्थिति में तो वे हैं नहीं। इसलिए मुंह में बेंग वाली कहावत चरितार्थ कर रहे हैं।