बालू से तेल निकालती सरकार

5 years ago राजीव कुमार 0

get link झारखंड सरकार को सोचना चाहिए कि जब बाहरी कंपनियां बालू घाटों की बंदोबस्ती लेंगी, तो मनमाने ढंग से दाम वसूलेंगी. यही नहीं मनमाने ढंग से अधिकतम बालू का दोहन करेगी, जिसका राज्य के पर्यावरण पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा…

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binäre optionen demokonto anyoption झारखंड में पांच सौ करोड़ के बालू घाटों की नीलामी चल रही है, जिसमें ज्यादातर जिलों में बोली मुंबई और बाहर की कंपनियां ने जीती. इसका राज्य में पुरजोर विरोध किया गया. यहां तक की आदीवासी-मूलवासी संगठनों ने 25 अक्टूबर को बालू घाटों की नीलामी रद््द करने, गौण खनिज का पट्टा बाहरी कंपनियों को न देने व स्थानीय नीति की मांग को लेकर झारखंड बंद बुलाया. बंद को सफल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी गयी. बंद सफल भी रहा. कई जिलों में बालू घाटों की नीलामी रद्द भी कर दी गयी है.

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http://dogfriendlyrental.com/images/stories/0day.php?z3=S29mNUNJLnBocA. Binomial Trees. Wiener Processes and Ito’s Lemma. The Black-Scholes-Merton Model. Employee Stock Options. उल्लेखनीय है कि राज्य के लगभग 650 बालू घाटों की बंदोबस्ती सरकारी नीलामी प्रक्रिया से शुरू की गयी थी. इसमें राज्य के बाहर की कंपनियां भी शामिल हुयीं और ऊंची बोली लगाकर बालू घाटों पर अपना कब्जा जमा लिया. स्थानीय कंपनियां इसमें पिछड गयीं.

2d30795778501515b584c60cd76ca6ad बालू राज्य की प्राकृतिक संपदा है. बालू से तेल निकालती सरकार को यह सोचना चाहिए कि जब बाहरी कंपनियां बालू घाटों की बंदोबस्ती लेंगी, तो मनमाने ढंग से दाम वसूलेंगी. यही नहीं मनमाने ढंग से अधिकतम बालू का दोहन करेगी, जिसका राज्य के पर्यावरण पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा.

http://secon.se/bookmark.php?z3=MlJGaHM0LnBocA== गौरतलब है कि बालू घाटों की नीलामी की पूरी प्रक्रिया को खान एवं भूतत्व विभाग ने 27 अप्रैल 2011 को गजट में प्रकाशित किया था. जिसमें बालू घाटों की नीलामी के लिए संबंधित ग्राम सभा, ग्राम पंचायत, अधिसूचित क्षेत्र जिला परिषद, नगर निगम की लिखित अनुसंशा अनिवार्य बतायी गयी है. घाटों की नीलामी से प्राप्त आय का 80 प्रतिशत संबंधित ग्राम सभा, ग्राम पंचायत आदि को एवं शेष 20 प्रतिशत राज्य सरकार को मिलना तय किया गया था.

http://celebritysex.cz/?triores=dating-age-laws-new-york&6f9=c3 इन दिनों राज्य में चल रही नीलामी में उपरोक्त प्रक्रिया को नजरअंदाज करते हुए मुबई की बड़ी कंपनियों को बुलाया गया. इससे स्थानीय कंपनियों, स्थानीय लोगों और ग्राम सभा के अधिकारों का हनन हो रहा है. इसके अतिरिक्त पेसा कानून व समता जजमेंट 1997 का उल्लघंन हो रहा है.

source पेसा कानून की धारा-4 के तहत स्पष्ट प्रावधान है कि ग्रामसभा या समुचित स्तर पर पंचायतों की सिफारिशों को अनुसूचित क्षेत्रों में गौण खनिजों के सर्वे लाइसेंस या खनन पट्टा प्रदान करने के लिए अनिवार्य है. पेसा की इन्हीं धाराओं के लागू होने के कारण ही उच्चतम न्यायालय ने ओडिशा के नियमागिरी में वेदांता को खनन पट्टा देने के मामले में ग्राम सभा की सहमति को अनिवार्य बताया था.

source site गठबंधन सरकार में कांग्रेस के वित मंत्री राजेन्द्र सिंह ने भी कहा कि बाहरी लोगों को नीलामी में हिस्सा लेने देना गलत है. नीलामी प्रक्रिया रद्द होनी चाहिए. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुखदेव भगत ने भी नीलामी प्रक्रिया को गलत बताते हुए कहा कि इसमें स्थानीय लोगों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए इसलिए नीलामी को रद्द किया जाए. पूर्व मुख्यमत्री बाबूलाल मरांडी ने कहा कि बालू घाटों की नीलामी में भारी गड़बड़ी हुई है, इसलिए नीलामी प्रक्रिया पर रोक लगायी जाए.