मोदी , मुलायम और मुजफ्फरनगर ?

4 years ago नदीम अहमद 0

मुबारक हो नरेंद्र मोदी जी आप देश के प्रधानमंत्री बनने वाले हैं . और मुबारक हो मुलायम सिंह यादव जी आप को भी क्यूंकि आप भी तो अब उत्तर प्रदेश से 60 सीट लेकर प्रधानमंत्री की लाइन में आ रहे हैं . जिस दिन से नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री के नाम पर मुहर लगाईं गई है उस दिन से देश के मुसलमानों में बेचौनी सी पाई जा रही है ऐसे समय में कांग्रेस भी खुश है के मोदी जितना जलसा जुलूस करेंगे देश का मुसलमान मोदी से डरता जाएगा और कांग्रेस का वोट बैंक मजबूत होता जाएगा इसलिए कांग्रेस की तरफ से कोई सुगबुगाहट नजर नहीं आ रही है. देश के मुसलमानों को ऐसा डर लग रहा है कि मोदी मुख्यमंत्री रहते हुए गुजरात में 2000 लोगों का कत्ल करवा सकता है तो अगर गलती से पीएम बन भी गए तो पता नहीं कितनों का खून बहेगा . ऐसा लगता है के मोदी के पीएम बनते ही देश के मुसलमानों को मोदी या तो मशीनगन से भून देंगे या फिर 25 करोड़ की इस आबादी को भारत से निकाल कर किसी और देश में भेज दिया जाएगा . ऐसी हवा और ऐसा ही खौफ बन रहा है भारत के मुसलमानों के बीच .

माफ करना मै भी एक मुसलमान हूँ , पत्रकार हूँ , भारत का निवासी हूँ , यहीं पैदा हुआ और इसी जमीन में लिपट जाऊँगा मगर मेरा नजरिया अलग है , मेरी सोच अलग है , मै किसी मोदी से नहीं डरता , मै उनके पीएम बनने से नहीं घबराता . ये हम सब का देश है जिसमे जितनी ताकत और सलाहिय्यत होगी वो भी इस देश का पीएम बन सकता है . अगर इसमें मोदी का नाम सामने आया तो इतना हैरान और घबराने की क्या बात है ? मेरी मौत जिस दिन लिखी होगी उस दिन किसी बहाने की जरुरत नहीं होगी . जिस तरह से हमारे एक साथी पत्रकार राजेश वर्मा की हुई . किसी दिन मै भी इनकी तरह मारा जा सकता हूँ , इसमें इतना घबराने की जरुरत नहीं होनी चाहिए . मै सिर्फ हिन्दू – मुसलमान की नहीं सोचता , मै सिर्फ दंगे – फसाद की नहीं सोचता , मै सिर्फ मोदी – आडवाणी की नहीं सोचता . मै सोचता हूँ देश की , देश के उन मासूमों की जो सड़कों और पटरियों पर जिन्दगी गुजारते हैं , जिनको खाने के लिए रोटी नहीं मिलती , तन ढकने के लिए कपड़े नहीं मिलते , रहने के लिए छत नहीं मिलती . क्या हम आप ऐसे लोगों की सोच रखते हैं …? बिलकुल नहीं , हमें तो मोदी- आडवाणी और तोगड़िया – मुलायम से फुर्सत ही नहीं मिलती, दंगे – फसाद पर बात करने से फुर्सत नहीं मिलती तो भला इन पहलुओं पर धयान कैसे देंगे . अजीब सा माहौल है हमारे देश का जहाँ कहीं भी साम्प्रदायिक दंगे होते हैं उसके फौरन बाद नरेंद्र मोदी , भाजपा , बजरंग दल , शिवसेना , आरएसएस, अभिनव भारत जैसे संगठनों पर इलजाम लगाया जाता है . ठीक है , मै मानता हूँ कि इन संगठनों ने देश के हित में प्यार मुहब्बत कम और नफरत फैलाने का काम ज्यादह किया है .

मगर मै देश की जनता और खासकर मुसलमानों से मुखातिब होकर कहना चाहता हूँ कि क्यूँ आप लोग गुजरात दंगे के अलावा दूसरे दंगों की बात नहीं करते हो . गुजरात के अलावा भी हमारे देश में दंगों का इतिहास रहा है . आजादी के बाद से आज तक हम इस दर्द को अपने सीने में दफन करते आ रहे हैं . राजस्थान के गोपालगढ़ में भी दंगा हो तो मोदी , महाराष्ट्र के किसी हिस्से में दंगा हो तो मोदी , बिहार की धरती पर दंगा हो तो मोदी , उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में दंगा हो तो मोदी . आखिर ऐसी क्या बात है कि हर दंगे से मोदी का नाम जोड़ा जाता है ? अगर ऐसा है तो क्या मुलायम सिंह मोदी नहीं है ? अगर ऐसा है तो तरुण गोगोई मोदी नहीं है ? जगदीश टाईटलर, सज्जन कुमार, अशोक गहलोत मोदी नहीं है ?

आप मोदी को हर समय निशाना बनाते हैं तो भला मुलायम पर इतनी मेहरबानी क्यूँ ? क्या मुलायम मुसलमानों की टोपी पहनता है इसलिए, क्या वो इफ्तार पार्टी में जाते हैं इसलिए या  वो आपके हज के काफिले को हरी झंडी दिखाते है इसलिए वो सेक्युलर है बाकी मोदी अगर ये सब नहीं करते हैं तो वो मुसलमानों के दुश्मन. मुजफ्फरनगर में जो कुछ भी हुआ मै इसकी निंदा करता हूँ . इस तरह का हादसा हमारे समाज को कलंकित करता है . आखिर हमें रहना भी है एक ही साथ एक ही शहर में एक ही मुहल्ले में . मगर ये बदकिस्मती है के इस तरह के हादसे हमारे बीच में आ जाते है और कुछ दिनों के लिए हमारे बीच खाई बनकर चली जाती है. सवाल ये है के इन दंगों से किसका फाईदा होता है ये हम सभी जानते हैं मगर उस वक्त हम अपना आप खो बैठते हैं और अफवाहों पर यकीन करके एक दुसरे के जानी दुश्मन बन जाते हैं . आखिर ऐसा तो नहीं है के मुजफ्फरनगर दंगों में सिर्फ मुसलमानों का ही कत्ल हुआ होगा बल्कि हिन्दू भी इसमें शामिल हैं तो भला इस तरह के हालात हमारे बीच में होते ही क्यूँ हैं ?

मुजफ्फरनगर का दंगा गुजरात के बाद नाम लिया जाएगा ऐसा अखबारों में देखने को मिल रहा है . हर पार्टी इस समय इस दंगों की भेंट चढ़े लोगों पर सियासत कर रही है मगर किसी ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया कि आखिर इसकी वजह क्या थी ? आखिर इसको कैसे रोका जा सकता था ? मगर सियासत से फुर्सत मिले तब तो . कहते हैं जिला प्रशासन की लापरवाही से ये सब कुछ हुआ तो जब आप ये जानते हो तो भी उस अधिकारी पर कारवाई करने के बजाय उनका ट्रान्सफर ही क्यूँ किया जा रहा है . क्या 50 लोगों की जान की कीमत सिर्फ ट्रान्सफर से वसूली जा सकती है . या दंगो के बाद जाकर उनके परिवार से मिलकर एक सरकारी नौकरी और 10 लाख के मुआवजे का ऐलान कर देना ही काफी है . और उसके बाद एक कमीशन का गठन कर देने से मरने वाले जिंदा अपने घरों को लौट नहीं सकते. अगर आपके कमीशन बनाने से मजलूमों को इंसाफ मिल गया होता तो पिछले 110 दिन से लखनऊ में रिहाई मंच धरने पर नहीं बैठते . अगर आप इतने ही इन्साफ परस्त हैं तो जो भी अधिकारी उस समय मुजफ्फरनगर में थे आप तुरंत उन पर मुकदमा करें उनको सजा दें . सिर्फ अखबारों में इतना कह देना के दंगे को हवा मोदी और भाजपा ने दी काफी नहीं है . हमारे प्रधानमंत्री , राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी दंगा पीडतों से मिल आये उनके मिलने से उन्होंने जो खोया है वापस आ नहीं सकते और आप फिर अपने ऐसी वाले घरों से बाहर निकल नहीं सकते तो किस भारत निर्माण की बात करते हो .

किसको हक दिलाने की बात करते हो . हमारे देश के नेताओं बंद करो ऐसी सियासत जिसकी पहचान आपको किसी की लाश से की जाती है . आपको विधानसभा या लोकसभा में जगह बनाना है आप लोगों से इसकी भीख मांग लो हो सकता है आपको इन लाशों को गिराये बिना भी मिल सकता है मगर खुदा के वास्ते ऐसी सियासत न करो जिससे कि देश का एक भी इंसान मारा जाए  ….