‘सोना’ तो सिर्फ बहाना है, मोदी पर असली निशाना है

5 years ago मोकर्रम खान 0

http://boersenalltag.de/blog/post/2013/04/08/interview-beim-daf-dialog-semiconductor-und-aixtron/index.html इस समय मोदी पूरे फार्म में हैं, बुलडोजर के रूप में तो वह मुख्यमंत्री रहते प्रसिद्ध हैं, पीएम प्रत्याशी घोषित होने के बाद पैट्रन टैंक बन रहे हैं. मीडिया भी उनके लिये माहौल बना रहा है. हवा से बातें कर रहे मोदी की गति को नियंत्रित करने के लिये एक स्पीड ब्रेकर की आवश्यकता थी. सोने की खुदाई कांड ने स्पीड ब्रेकर का कार्य किया है…

http://www.mylifept.com/?refriwerator=bin%C3%A4re-optionen-traden-mit-wirtschaftskalender&446=9b पिछले दिनों दो दिलचस्प घटनायें हुईं, जिनको मीडिया में काफी उछाला गया. पहली घटना उत्तर प्रदेश की है. एक साधु महाराज को सपना आया कि धरती के नीचे सैकड़ों टन सोना दबा हुआ है, उन्होंने यह सपना छत्तीसगढ़ के सांसद एवं केंद्रीय मंत्री को बताया. मंत्री जी ने कांग्रेस के बड़े नेताओं को बताया. कथित रूप से इस सपने के आधार पर पूरी सरकारी मशीनरी एक्टिव हो गई और सोना ढूंढने के लिये जमीन की खुदाई शुरू हो गई.

Pokemon Card Maker (unofficial) SKINs allow you to Make your own Pokemon Card! source site A powerful online TCG Maker / CCG Maker for making your मीडिया ने भी घटनास्थल पर तंबू गाड़़ दिये, ताकि खुदाई का लाइव टेलीकास्ट किया जा सके. पूरे देश में एक कौतूहल का वातावरण निर्मित हो गया. उत्तयर प्रदेश के कुछ शहरों में लोगों ने सोने की खरीदारी बंद कर दी, इस आशा में कि अगर टनों सोना निकल आया, तो बाजार में सोने के भाव गिर जायेंगे. सोने की खुदाई से पहले ही न जाने कहां कहां से उस सोने के दावेदार भी पैदा हो गये.

http://poloclubmiddennederland.nl/?author=1 दूसरी दिलचस्प घटना मध्य प्रदेश में घटी. मध्य प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष रामेश्वर नीखरा ने एक टीवी चौनल पर यह कह दिया कि दिग्विजय सिंह अब मध्य प्रदेश की राजनीति में दोबारा नहीं आयेंगे. उन्होंने यह भी जोड़ दिया कि कांग्रेस 2003 वाली गलती नहीं दोहरायेगी, अर्थात मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव दृ 2013 दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में नहीं लड़े जायेंगे.

http://orpheum-nuernberg.de/?bioede=bin%C3%A4re-optionen-dab&b05=03 दिग्विजय सिंह ने भी कह दिया कि वह मध्य प्रदेश की राजनीति के डूबते हुये सूरज हैं. राहुल गांधी की शहडोल में संपन्न सभा में दिग्गी राजा स्टेज पर दूसरी पंक्ति में बैठे हुये दिखाई दिये. पहली पंक्ति में राहुल गांधी के साथ कांतिलाल भूरिया, कमलनाथ तथा ज्योतिरादित्य सिंधिया बैठे. इस घटना से दिग्गी राजा के विरोधियों की बांछें खिल गईं. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह, तो दिग्गी राजा के दूसरी पंक्ति में बैठने तथा अपने आपको मध्य प्रदेश की राजनीति का डूबता सूरज वाले बयान को अपनी जनसभाओं में चटखारे ले-लेकर बताते रहे.

source url अब इन दोनों घटनाओं का एक छोटा सा विश्लेषण. साधु महाराज को भूगर्भ में सैकड़ों टन सोना दबा होने का सपना आया. उनके सपनों की बातों को एक केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस के आला नेताओं को बताया. फिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग तथा अन्य सरकारी तंत्र का तत्काल युद्धस्तर पर एक्टिव हो जाना, मीडिया का अति उत्साह, सबकुछ किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था. मगर इसके भी कुछ राजनीतिक प्रभाव हो सकते हैं, यह किसी के समझ में नहीं आया.

here इस समय नरेंद्र मोदी पूरे फार्म में हैं, बुलडोजर के रूप में तो वह मुख्यमंत्री रहते हुये ही प्रसिद्ध हैं, पीएम प्रत्याशी घोषित होने के बाद पैट्रन टैंक बन रहे हैं. मीडिया भी उनके लिये कुछ वैसा ही माहौल बना रहा है जैसे 2004 में आडवाणी के लिये बनाया था. मोदी के सामने भाजपा के धुरंधरों की बोलती बंद है. मोदी अपनी हर सभा तथा रैली में कांग्रेस पर जमकर प्रहार करते हैं. हवा से बातें कर रहे मोदी की गति को नियंत्रित करने के लिये एक स्पीड ब्रेकर की आवश्यकता थी. सोने की खुदाई कांड ने मोदी के लिये स्पीड ब्रेकर का कार्य किया.

buy metformin without a perscription जोश में भरे नरेंद्र मोदी ने आव देखा न ताव, बयान दे दिया कि यूपीए सरकार केवल एक सपने के आधार पर सोना ढूंढने के लिये खुदाई करा रही है, इससे पूरे विश्व में भारत का मजाक उड़ रहा है. संभवतः मोदी ने सोचा था कि इससे जनता में यह संदेश जायेगा कि कांग्रेसी अंधविश्वासी तथा रूढिवादी हैं और नरेंद्र मोदी माडर्न टेक्नालाजी से लैस प्रगतिशील भावी प्रधानमंत्री हैं. किंतु मोदी का अति आत्मविश्वास, आत्मघाती सिद्ध हुआ.

follow link साधु महाराज के एक शिष्य ने मोदी पर पलटवार कर दिया और वार भी छोटा मोटा नहीं, सीधे खुली बहस की चुनौती दे डाली. यह भी प्रश्न कर दिया कि आपकी छवि बनाने के लिये जो धन पानी की तरह बहाया जा रहा है, वह सफेद है या काला. मोदी समझ गये कि अपनी ब्रांडिंग पर खर्च हो रहे धन का रंग बताना तथा किसी संत से वाद विवाद करना, दोनों ही आत्मघाती गोल की श्रेणी में आते हैं क्योंकि इससे हिंदू वोटों का नुकसान होगा. इसलिये तत्काल क्षमा मांग ली.

forex piyasası açılış kapanış saatleri साधु महाराज को मनाने के लिये मोदी ने एक विशेष दूत भी भेज दिया. महाराज जी ने उन्हें माफ तो कर दिया, पर इस सबसे मोदी की जो फजीहत हुई, उसकी भरपाई में समय लगेगा. वैसे इस कांड के बाद से नरेंद्र मोदी की भाषा में आक्रामकता की कमी स्पष्ट परिलक्षित हो रही है, संभवतः कांग्रेस यही चाहती भी थी.

watch अब बात दूसरी घटना की. मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष रामेश्वर नीखरा ने बयान दिया कि दिग्विजय सिंह अब मध्य प्रदेश की राजनीति में नहीं आयेंगे. दिग्गी राजा ने भी उनके बयान की पुष्टि करते हुये कहा कि वह मध्य प्रदेश की राजनीति के डूबते हुये सूरज हैं. इस समाचार से भाजपाइयों से ज्यादा कांग्रेस का असंतुष्ट खेमा आल्हादित हो उठा. हालांकि यह समाचार उनके लिये सुसमाचार है या बुरा सपना, इसका पता उन्हें बाद में चलेगा, क्योंकि यह घटना पूरी तरह प्रायोजित थी जिसका उद्देश्य राजनीति के चतुर खिलाड़ी ही समझ सकते हैं.

watch दिग्गी राजा कांग्रेस के वरिष्ठ राजनीतिज्ञ तथा कांग्रेस के पोलिसी मेकर्स में से एक हैं. कांग्रेस के बड़े फैसलों में उनकी अहम भूमिका रहती है. वे पार्टी के एकमात्र ऐसे नेता हैं, जो किसी मुद्दे पर आक्रामक बयान देते हैं और किसी की परवाह नहीं करते हैं, चाहे आरएसएस के पदाधिकारी हों या भाजपा तथा विश्व हिंदू परिषद के नेता या बाबा रामदेव, दिग्गी राजा खुलकर बोलते हैं इसीलिये इंटरनेट पर उनके विरूद्ध अशोभनीय टिप्पणी करने वालों की पूरी जमात है. सांप्रदायिक शक्तियों के विरुद्ध आक्रामकता के कारण अल्पसंख्यकों में उनकी लोकप्रियता किसी भी राजनेता से अधिक है.

राजनीति में उनके शिष्यों की कमी नहीं है. मध्य प्रदेश में अभी कोई भी नेता उनसे वरिष्ठ तथा अनुभवी नहीं है. अचानक ऐसी क्या बात हो गई कि उनके मध्य प्रदेश के राजनीतिक परिदृश्य से गायब होने की घोषणा कर दी गई और उन्होंने इसकी पुष्टि भी कर दी.

वास्तव में अचानक कुछ भी नहीं हुआ है, सबकुछ पूर्व नियोजित है. भाजपा हर विधानसभा चुनावों में दिग्गी राजा के शासनकाल की कुछ कमियों को अपना मुद्दा बनाती रही है. अब जब दिग्गी राजा परिदृश्य से बाहर रहेंगे, तो भाजपा किस पर निशाना साधेगी. ज्योतिरादित्य सिंधिया पर भाजपा ज्यादा आक्रामक नहीं हो सकती, क्योंकि वह उसी राजघराने से ताल्लुक रखते हैं जिसने भाजपा को राजमाता सिंधिया, वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे जैसे नेता दिये हैं.

ग्वालियर राजघराने से संबद्ध कई लोग भाजपा के महत्वपूर्ण पदों पर हैं. वैसे दिग्गी राजा राजनीति के जिस शिखर पर पहुंच चुके हैं, वहां से किसी राज्य के मुख्यमंत्री की कुर्सी छोटी दिखाई पड़ती है. अभी तो कांग्रेस के लिये मध्य प्रदेश में सरकार बना लेना असंभव ही है, फिर भी यदि कोई चमत्कार हो ही जाये, तो भी जो भी कांग्रेसी मुख्यमंत्री बनेगा दिग्गी राजा को चुनौती देने की स्थिति में तो नहीं ही होगा.

वैसे लोगों को एक बात अवश्य समझ लेनी चाहिये कि दिग्गी राजा ने अपने आपको मध्य प्रदेश की राजनीति का डूबता सूरज कहा है, देश की राजनीति का नहीं. न ही राजनीति से संन्यास की घोषणा की है.