हाशिये पर ईसाई

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दिल्ली के ईसाई समाज ने 24 अक्टूबर 2013 को वाईएमसीए आडिटोरियम में अपने समाज के सामने आ रही चुनौतियों व विकास की संभावनाओं को खोजने के लिए चर्चा की. इस कार्यक्रम का आयोजन ‘पुअर क्रिश्चियन लिबरेशन मूवमेंट’ और आल इंडिया क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक फोरम ने किया.

‘भारतीय समाज में ईसाई – विकास एवं चुनौतियां’ विषय पर आयोजित चर्चा में चर्च ऑफ नार्थ इंडिया, मैथोडिस्ट चर्च, रोमन कैथोलिक चर्च, बपतिस चर्च के आलावा स्वतंत्र धर्म प्रचारकों और विभिन्न चर्चों के पादरियों, बिशपों एवं आम मसीहियों ने हिस्सा लिया.

चर्चा की शुरुआत करते हुए पुअर क्रिश्चियन लिबरेशन मूवमेंट के अध्यक्ष आर.एल.फ्रांसिस ने कहा कि आज ईसाई समाज कठिन दौर से गुजर रहा है. सरकार और चर्च नेतृत्व दोनों को ही इनकी कोई चिंता नहीं है. आज समाज में हमें हाशिए पर धकेल दिया गया है. गरीबी और बेरोजगारी हममें सबसे ज्यादा है. सरकार अल्पसंख्यकों के नाम पर बनाई जा रही योजनाओं का लगातार ढोल पीट रही है, मगर ईसाई समाज को इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा.

आर.एल.फ्रांसिस ने कहा कि आज ईसाई समाज को खुद का आत्म-मंथन करने की जरुरत है. चर्च के पास हजारों स्कूल, कालेज, अस्पताल एवं अन्य संस्थान हैं. शिक्षा के क्षेत्र में हमारा बड़ा हिस्सा होने के बावजूद हमारे बच्चे अशिक्षित एवं मजदूरी जैसे कार्यो में लगे हुए हैं. चर्च के पास विशाल संसाधनों का भंडार है, लेकिन उसका उपयोग मुठ्ठीभर लोग अपने स्वार्थों के लिए कर रहे हैं. चर्च संपत्तियों और चर्च की जमीनों को लगातार बेचा जा रहा है. इस पर रोक लगाए जाने की जरूरत है.

हर धर्म की संपत्तियों के मामले में कानून है. सिख समाज के लिए गुरुद्वारा प्रबंधक अधिनियम बनाया गया है. मुस्लिम समाज के लिए वक्फ अधिनियम है. हिन्दु समाज के बड़े मंदिर देव आस्था अधिनियम के तहत चलाये जा रहे हैं, मगर ईसाई समाज में ऐसा कोई कानून न होने के कारण स्वार्थी लोग चर्च संपत्तियों की लूट में लगे हुए हैं. ईसाई समाज की इन संपत्तियों को बचाने के लिए केन्द्र एवं राज्य सरकारों को कारगर कानून लागू करना चाहिए.

चर्चा में अपनी बात रखते हुए ऑल इंडिया क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक फोरम के संयोजक जार्ज टोम्स एडवोकेट ने कहा कि दिल्ली में हमारी आबादी बारह लाख से भी ज्यादा है. इतनी संख्या में होने के बावजूद राजनीति के क्षेत्र में हमारी कोई पूछ नहीं है. कांग्रेस समझती है कि दिल्ली के ईसाइयों का वोट उसकी जेब में है और दूसरे दल समझते हैं कि इनका वोट हमें मिलेगा ही नहीं.

जार्ज टोम्स ने कहा कि अब वह दिन लद गए, जब ईसाई आँख बंद करके कांग्रेस को वोट देते थे. अब वह यह भी जानना चाहते हैं कि दिल्ली में पिछले 15 वर्षों से राज कर रही कांग्रेस ने उनके लिए क्या किया है. दिल्ली सरकार द्वारा चलाई जा रही अधिकतर योजनाओं का लाभ मुस्लिम और सिख समुदाय तक ही सीमित है. ईसाई समाज को इसका कोई लाभ नहीं मिला.

चर्च ऑफ नार्थ इंडिया के पास्टर टिमोथी शाह ने कहा कि चर्चों को गरीब ईसाइयों के विकास के लिए आगे आना चाहिए. डा. आशीष कुमार मैसी पूर्व अध्यक्ष उतर प्रदेश अल्पसंयख्यक आयोग ने ईसाई युवकों को अपने रोजगार शुरू करने और अपने अधिकारों के लिए संगठित होने का आह्वान किया.

चर्च ऑफ एग्लिकन अमृतसर आर्च डायसिस के बिशप रोकस संधू ने कहा कि आज भारत का ईसाई समुदाय असुरक्षा के माहौल में जी रहा है, जो किसी भी सभ्य देश के लिए चिंता की बात है. सरकार ईसाई समाज में पनप रही असुरक्षा को खत्म करने के लिए ठोस कदम उठाये.

वरिष्ठ पत्रकार एवं विदेशी मामलों के जानकार वेदप्रताप वैदिक ने चर्चा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि ईसाई समाज में आज परिवर्तन की जरूरत है. इसके अनुयायियों में सामाजिक स्तर पर बड़ा भेदभाव पनप रहा है. ईसा ने ऐसी ईसाइयत की कामना कभी नहीं की होगी. वैदिक ने चर्च संगठनों से अपील की कि वह ईसाई समाज में गरीबी और असामाजिक व्यवस्था से लड़ते अपने अनुयायियों के साथ साथ गरीब हिंदुओं, गरीब मुसलमानों एवं अन्य गरीबों के सामाजिक स्तर को सुधारने के लिए अपने संसाधनों का इस्तेमाल करे.