‘मर्दों’ के मर्जी की उड़े धज्जी ‘अनारकली ऑफ आरा’

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– अमित कर्ण इक्कीसवीं सदी में आज भी बहू, बेटियां और बहन घरेलू हिंसा, बलात संभोग व एसिड एटैक के घने काले साये में जीने को मजबूर हैं। घर की चारदीवारी हो या स्कूल-कॉलेज व दफ्तर चहुंओर ‘मर्दों’ की बेकाबू लिप्सा और मनमर्जी औरतों के जिस्म को नोच खाने को आतुर रहती है। ऐसी फितरत