तीर एक, निशाना तीन हिंदुत्व, सवर्ण और ओबीसी

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http://dkocina.com/silit/silit-made-in-germany.html/attachment/vorlage_980x460px_topf_en_01 योगी आदित्यनाथ हिन्दुत्व का चेहरा है तो उनके एक उप-मुख्यमंत्री केशव मौर्या ओबीसी हैं जबकि दूसरे उप-मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ब्राह्मण हैं. इस प्रकार बीजेपी ने एक तीर से तीन निशाना साधा है…

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unicredit trading binario उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनकी मदद करने के लिए पार्टी ने केशव प्रसाद मौर्य एवं दिनेश शर्मा को भी उप मुख्यमंत्री बना दिया हैं. उत्तर प्रदेश की सत्ता के इन तीन शीर्ष नेताओं की जातिया देखें तो हमें पता लगता है कि बीजेपी ने कैसे इनको चुनकर जातिगत समीकरणों को साधा है. यदि योगी आदित्यनाथ हिन्दुत्व का चेहरा है तो उनके एक उप-मुख्यमंत्री केशव मौर्या ओबीसी हैं जबकि दूसरे उप-मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ब्राह्मण हैं.

http://acps.cat/wp-content/uploads/2015/02/121028-DIARI-ARA-Perdre-la-por-a-parlar-del-Su艪吩 योगी आदित्यनाथ एक फायरब्रांड हिंदुत्व लीडर माने जाते हैं, बीजेपी ने उन्हे मुख्यमंत्री बनाकर ये सन्देश भी दिया है कि हिंदुत्व और विकास को अलग-अलग नहीं देखा जाना चाहिए और बीजेपी इसी रास्ते पर आगे बढ़ती रहेगी. बीजेपी पर ध्रुवीकरण के आरोप लगते रहे हैं, 2014 के लोक सभा चुनावों में मुजफ्फरनगर दंगों को भुनाने का, और 2017 के उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनावों में कब्रिस्तान-श्मशान का मुद्दा उठाने का. लेकिन बीजेपी हमेशा से विकास की राजनीति करने का दावा करती रही है. राजनीति इसी का नाम है और पक्ष और विपक्ष के तर्क चलते ही रहते हैं.

go बीजेपी की ये रणनीति विपक्षियों के लिए खतरे की घंटे साबित होगी अगर पार्टी जातीय समीकरण, हिंदुत्व और विकास का एक ऐसा मध्य मार्ग खोज पाती है जो समाज के हर तबके को स्वीकार्य होगा क्योंकि जैसे राजनीति में कुछ भी स्थाई नहीं होता है, वैसे ही आम जान-मानस की धारणा में भी कुछ भी स्थाई नहीं होता.

auto opzioni digitali funziona davvero बीजेपी को उत्तर प्रदेश में जैसा प्रचंड बहुमत मिला है, उत्तर प्रदेश विधान सभा की 403 में 325 सीटों पर जीत से, उससे ये साफ हो जाता है कि भारतीय जनता पार्टी के जातीय समीकरण, हिंदुत्व और विकास के फॉर्मुले पर विश्वास करने को तैयार है. अब आगे का रास्ता कैसा होगा ये इसपर निर्भर करता है कि योगी आदित्यनाथ बीजेपी के इस फॉर्मुले पर कितना खरा उतरते हैं और 2019 तक उत्तर प्रदेश की जनता का कितना विश्वास जीत पाते हैं.