भगवाधारी की चुनौतियां?

9 months ago Editor 0

विश्व के सबसे चर्चित व्यक्तित्व बनने वाले योगी आदित्यनाथ ने अब अपने जीवन की सर्वाधिक बड़ी चुनौती स्वीकारते हुए अपने पूरे राजनैतिक जीवन को दांव पर लगा दिया है। अत्यन्त ही खराब कानून व्यवस्था, लुंजपुंज प्रशासन, भ्रष्टाचार और जातियों और संम्प्रदायों में बंटे सूबे के समाज को सुधारना और इनके साथ ही विकास के रथ को गति देते हुए वर्ष 2019 में लोकसभा चुनावों में भाजपा को सफलता दिलाना बहुत आसान नजर नहीं आता…

भारत के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में पहली बार एक भगवाधारी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठा। उत्तराखंड के एक छोटे से गांव के साधारण से परिवार में जन्मे अजय सिंह बिष्ट ने जब 21 वर्ष की आयु में गोरखपुर को अपनी कर्मभूमि बनाया, तभी उन्होने यहां की तमाम चुनातियों और अपेक्षाओं को आत्मसात कर लिया था। पर अजय सिंह बिष्ट से योगी आदित्यनाथ बनने और एक अनजान से युवक से विश्व के सबसे चर्चित व्यक्तित्व बनने वाले योगी आदित्यनाथ ने अब अपने जीवन की सर्वाधिक बड़ी चुनौती स्वीकारते हुए अपने पूरे राजनैतिक जीवन को दांव पर लगा दिया है। अत्यन्त ही खराब कानून व्यवस्था, लुंजपुंज प्रशासन, भ्रष्टाचार और जातियों और संम्प्रदायों में बंटे सूबे के समाज को सुधारना और इनके साथ ही विकास के रथ को गति देते हुए वर्ष 2019 में लोकसभा चुनावों में भाजपा को सफलता दिलाना बहुत आसान नजर नहीं आता।
कहा जा सकता है कि उत्तर प्रदेश में योगी आदित्य नाथ की सरकार को आने वाले दिनों में लगातार अग्नि परीक्षा से गुजरना पड़ेगा। 1980 के दशक में इस सूबे की कमान गोरखपुर के विकास पुरूष कहे जाने वाले स्व. वीर बहादुर सिंह ने अभावों की धरती से राजनीति के आकाश को छूने का सफर अपनी मेहनत, लगन, राजनीतिक सुचिता और व्यवहार कुशलता से तय किया था। प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी के सबसे करीबी कृपापात्र वीरबहादुर सिंह ने पूर्वांचल के अत्यन्त पिछड़े और महत्वपूर्ण जनपद गोरखपुर में विकास की गंगा की धारा केा मोड़ा, तथा एक बेहतर सोच और संकल्प के साथ बौद्ध परिपथ में शामिल गोरखपुर के विकास का ताना बाना बुना। ऐतिहासिक प्राकृतिक झील रामगढ़ताल को विश्व मानचित्र में लाकर गोरखपुर को पर्यटन की दृष्टि से काफी संम्पन्न बनाने का प्रयास किया। पर विधि को यह मंजूर नहीं था, विकास की यात्रा के मध्य ही उन्हे ना केवल केन्द्र में बुला लिया गया, वरन अचानक उनकी मृत्यु ने गोरखपुर समेत पूरे पूर्वांचल के विकास की आशाओं को धूमिल कर दिया। लेकिन यहां के लोगों के मन में स्व. वीरबहादुर सिंह की छवि एक विकास पुरूष की बनी रही। अब लगभग तीन दशक बाद गोरखपुर के आदित्यनाथ योगी को उत्तर प्रदेश की कमान मिलने के बाद आम जन में पूर्वांचल के विकास की उम्मीद तेजी से बलवती हुई है।
योगी ऐसे समय उ.प्र. के मुख्यमंत्री बने हैं, जब कि पूर्वांचल की प्रमुख धार्मिक नगरी वाराणसी को प्रधानमंत्री मोदी ने जापान के क्योटो शहर की तर्ज पर विकसित करने की मंशा और घोषणा कर दी है। मोदी का यह सपना भी योगी को ही पूरा करना होगा, इसके साथ ही पूर्वांचल और बुन्देलखंण्ड का पिछड़ापन भी उनकी चुनौतियों में शामिल रहेगा। मोदी के समान ही योगी की छवि भी एक कट्टर हिन्दुवादी नेता की है। ऐसे में योगी के सामने यह भी एक चुनौती ही होगी कि उत्तर प्रदेश में रहने वाले बड़ी संख्या के मुसलमानों की भावना को ध्यान में रखते हुए ‘सबका साथ-सबका विकास’ के नारे को भी अमली जामा पहनाएं। यह चुनौती तब और बड़ी हो जाती है, जब उत्तर प्रदेश समेत पूरे देश की हिन्दु जनता मोदी-योगी की जोड़ी से अयोध्या में एक अदद राम जन्मभूमि मंदिर की चाह रखेगी, क्योंकि अब भाजपा के पास जन आधार का कोई बहाना नही बचा है, केन्द्र और प्रदेश दोनों जगह भाजपा की प्रचंण्ड बहुमत की सरकारें हैं।

मोदी और योगी में तमाम समानताएं होने के बाद भी कुछ मूलभूत अंन्तर भी है। दोनों हिन्दुत्व के रथ पर सवार सत्ता के शीर्ष पर पंहुचे हैं, पर भगवाधारी योगी की प्राथमिकताएं थोड़ी अलग होंगी। एक बड़ा अंतर यह भी है कि जहां मोदी को प्रधानमंत्री पद को बेहतर ढंग से चलाने में गुजरात में उनके मुख्यमंत्री पद का अनुभव काम आया, वहीं इस क्षेत्र में योगी की अनुभवहीनता, पूरे प्रदेश की अपेक्षाओं को लेकर भी एक बड़ी चुनौती होगी। अभी तक सांसद के तौर पर योगी गोरखपर और आसपास की विकास संबंधी स्थानीय समस्याओं के साथ मुस्लिम तुष्टिकरण की सरकारों की नीतियों के खिलाफ संघर्ष करते रहे हैं, उनके अपने जिले गोरखपुर में बंद पड़े खाद कारखाने, को पुनः चालू कराने , लाखों लोगों की आशा के केन्द्र एम्स के निर्माण, उनकी अपनी बहुप्रतीक्षित फूड पार्क योजना, जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में रेल लाइन का ना होना, औद्योगिक क्षेत्र गीडा में सुविधाओं के अभाव से उद्यमियों के पलायन को रोकने की समस्याओं के साथ ही खुद रूग्ण हो चुके बाबा राघवदास मेडिकल कालेज की मान्यता पर उठते बार बार के सवालों को भी उन्हे हल करना होगा।

देखा जाए तो योगी के समक्ष पूरे प्रदेश की समस्याओं के साथ अपने क्षेत्र की अपेक्षाओं का अंबार है। इसके साथ ही उन्हे प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी को भी संभालना होगा, जिसे स्वच्छन्द काम करने की आदत सी पड़ चुकी है। पर गोरखपुर और पूरे देश में जो भी उन्हे जानते हैं, वो इन समस्याओं को बहुत महत्व नहीं देते। उनका मानना है कि योगी की अपनी तेज तर्रार क्षवि के साथ उनपर प्रधानमंत्री मोदी का विश्वास और जनता द्वारा मिले प्रचंड बहुमत के दम पर योगी बड़ी आसानी से इन समस्याओं को हल कर लेंगे। उन्हे ऐसे कार्य करना होगा कि प्रदेश के विकास की तस्वीर भी दिखाई दे, और कोई वर्ग नाराज भी ना हो। योगी की सफलता आगामी 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा के जीत की कुंजी भी होगी, ऐसे में केन्द्र भी उन्हे हर संभव मदद देगा। योगी की मुस्कान भी यही कहती है कि जनता की अपेक्षाएं विफल नहीं होगीं।

लेखक: गोरखपुर जर्नलिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं गोरखपुर सिविलकोर्ट बार एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं पत्रकार हैं।