यूपी में लगता रहेगा हिन्दुत्व का तड़का

1 year ago Editor 0

उत्तर प्रदेश का नतीजा बहुत गंभीर मतलब वाला है। गरीब कल्याण, मुफ्त गैस सिलिंडर के जरिए गरीबों को सम्मान, खातों में सीधे सब्सिडी पहुंचाने की योजना, न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करने की योजना आदि ऐसी चीजें हैं, जिनसे मोदी लहर को स्थायी बनाने की कोशिश होगी। इसके साथ साथ हिंदुत्व का तड़का भी लगता रहेगा…

उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की जीत को किसी एक और राज्य की जीत मान कर विश्लेषण नहीं किया जा सकता है। उत्तर प्रदेश भारत का सिर्फ कोई एक राज्य नहीं है और वहां का चुनाव किसी एक राज्य के चुनाव की तरह नहीं लड़ा गया था। यह देश की राजनीति पर संभवतः सबसे ज्यादा असर डालने वाला विधानसभा चुनाव था। तभी इसकी भारी भरकम जीत के बाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आजाद भारत के सबसे बड़े नेता बन गए हैं।

उनके इसी बयान से मिलती जुलती बात जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी कही। उन्होंने ट्विट करके कहा कि अब विपक्ष को 2019 भूल जाना चाहिए और 2024 की तैयारी करनी चाहिए। उमर अब्दुल्ला ने यह भी माना कि चुनाव लड़ने के मामले में मोदी का मुकाबला करने वाला कोई दूसरा नेता नहीं है। अमित शाह और उमर अब्दुल्ला दोनों की बातें कुछ हद तक सही हैं।

आजादी के बाद किसी और नेता ने इतना और ऐसा विरोध नहीं झेला है, जैसा नरेंद्र मोदी ने झेला है। किसी और नेता को रोकने के लिए विपक्ष की ऐसी गोलबंदी भी सिर्फ एक बार 1977 में देखने को मिली थी। हालांकि तब विपक्ष संगठन और प्रबंधन के नाते बहुत मजबूत नहीं था और वह चुनाव भावनाओं के ज्वार वाला था। उसके मुकाबले आज विपक्ष ज्यादा मजबूत है, ज्यादा संख्या में है और संसाधनों के लिहाज से भी मजबूत है। फिर भी वह विपक्ष अगर मोदी का मुकाबला नहीं कर पा रहा है तो शाह की कही बात का विरोध करने का तर्क खोजना थोड़ा मुश्किल है। इसके बावजूद भारतीय राजनीति का इतिहास बताता है कि सभी नेताओं और पार्टियों को बड़ा झटका उस समय लगा है, जब वे सबसे ज्यादा भरोसे में होते हैं।

बहरहाल, उत्तर प्रदेश और पांच राज्यों के चुनाव नतीजों का आकलन करें तो इसमें कोई दो राय नहीं है कि ये चुनाव नरेंद्र मोदी की धुरी पर लड़े गए थे। पांचों राज्यों में भाजपा और उसके गठबंधन की ओर से मोदी का चेहरा पेश किया गया था और विपक्ष ने भी मोदी को निशाना बना कर ही प्रचार किया। मणिपुर से गोवा और पंजाब से लेकर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड तक में मोदी निशाने पर थे। मोदी को अंदाजा था कि बाकी राज्यों के चुनाव नतीजों का कोई मतलब नहीं है, लेकिन उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव जीतना अनिवार्य है।

उत्तर प्रदेश का चुनाव सिर्फ मोदी की लोकप्रियता की परीक्षा नहीं था, बल्कि उनके कामकाज की शैली और खास कर नोटबंदी के उनके फैसले पर जनमत संग्रह भी था। उन्होंने भी इस चुनाव को उसी अंदाज में लिया था। तभी उन्होंने हर सभा में नोटबंदी का मुद्दा उठाया। असल में प्रधानमंत्री मोदी ने पहले दिन से अपने इस फैसले को अमीर बनाम गरीब का मुद्दा बनाया था। उन्होंने इसे भ्रष्टाचार और काला धन खत्म करने के संकल्प के साथ जोड़ा। यह मानना होगा कि लोगों ने उनके इस संकल्प पर भरोसा किया। लोगों ने माना कि मोदी कुछ करना चाहते हैं, लेकिन किसी वजह से कर नहीं पा रहे हैं। उन्होंने गरीबों के प्रति समर्पित सरकार की जो तस्वीर दिखाई, वह लोगों को पसंद आई है। तभी माना जा रहा है कि वे इस फ्रेम में कुछ और रंग भरेंगे ताकि तस्वीर स्थायी बने।

इस चुनाव नतीजे का एक खास संकेत यह भी है कि प्रधानमंत्री मोदी ने अमीरों का मददगार होने और सूटबूट की सरकार चलाने के विपक्ष के आरोपों से निजात पा ली है। कायदे से विपक्ष के हाथ से अब यह मुद्दा निकल गया है क्योंकि देश के सबसे बड़े और सबसे अधिक गरीबों वाले राज्य में मोदी को छप्पर फाड़ बहुमत मिला है। उन्होंने भाजपा को उस ऊंचाई तक पहुंचा दिया है, जहां वह राम लहर में भी नहीं पहुंची थी। तभी उत्तर प्रदेश का नतीजा बहुत गंभीर मतलब वाला है। गरीब कल्याण, मुफ्त गैस सिलिंडर के जरिए गरीबों को सम्मान, खातों में सीधे सब्सिडी पहुंचाने की योजना, न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करने की योजना आदि ऐसी चीजें हैं, जिनसे मोदी लहर को स्थायी बनाने की कोशिश होगी। इसके साथ साथ हिंदुत्व का तड़का भी लगता रहेगा।

उत्तर प्रदेश के अलावा भाजपा उत्तराखंड में जबरदस्त तरीके से जीती, लेकिन वहां चूंकि हर पांच साल में सत्ता बदलती है, इसलिए उस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इस लिहाज से भाजपा की सबसे बड़ी सफलता मणिपुर की है, जहां वह 22 सीटों के साथ दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई है। इससे जाहिर होता है कि पूर्वोत्तर में भाजपा ने असम की जीत और अरुणाचल में राजनीतिक तिकड़म से सत्ता हासिल करने का जो सिलसिला शुरू किया है, वह आगे जारी रहेगा। नए इलाकों में भाजपा का विस्तार मोदी और अमित शाह की रणनीति का सबसे अहम हिस्सा है। भाजपा के लिए निराशा वाले नतीजे गोवा और पंजाब से आए हैं। गोवा में परोक्ष रूप से मनोहर पर्रिकर को पेश करने के बावजूद भाजपा को नौ सीटों का नुकसान हुआ है और वह कांग्रेस से पिछड़ गई। इसी तरह पंजाब में लगातार दस साल सत्ता में रहने का खामियाजा उसे भुगतना पड़ा है।

– अजित द्विवेदी