कर्जमुक्त हुए ग्राम-देवता

7 months ago एम सांकृत्यायन 0

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आश्वासन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूरा कर दिया.
पिछले कुछ वर्षों में सूखा, फिर ओलावृष्टि और बाढ़ के कारण प्रदेश के किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा. तबाही के कारण कई किसानों ने आत्महत्या तक कर ली. यह कर्ज माफी उन्हीं लघु और सीमांत किसानों के हित के लिए है.
जिसने गरीब ग्राम-देवताओं को कर्जमुक्त कर दिया है…

हमारे अन्नदाता किसान के जीवन की यह विडंबना है कि वह ऋण में ही पैदा होता है और ऋण में ही मर जाता है. फिर भी अन्नदाता किसान के दीन-हीन जीवन पर किसी को भी दया नही आती है और वह हमेशा ही बेचारा बना रहता है. वर्ष 2014 और 2015 भारतीय किसानों के लिए बहुत बुरे थे. दो सालों से लगातार खराब मानसून के चलते देश के ग्यारह राज्यों के ढाई सौ से ज्यादा जिलों में सूखे की स्थिति रही. जिसमें किसानों का जीवन बदहाल बना दिया था. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चुनावी सभा में उत्तर प्रदेश के छोटे किसानों के लिए यह वादा किया था कि यूपी में भाजपा की सरकार बनी तो पहली ही कैबिनेट बैठक में उनका ऋण माफ कर दिया जाएगा. किसानों से किया गया यह वादा भाजपा के संकल्प पत्र में भी शामिल था. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने मंत्रिमंडल (कैबिनेट) की औपचारिक बैठक बुलाने में थोड़ी देर जरूर की, लेकिन कैबिनेट की पहली ही बैठक में प्रदेश के दो करोड़ से अधिक लघु और सीमांत किसानों का एक लाख रुपए तक का कर्ज माफ करने का महत्वपूर्ण और दूरगामी निर्णय ले लिया गया. मोदी ने केवल छोटे किसानों का ऋण माफ करने की बात कही थी.

मुख्यमंत्री योगी ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए प्रदेश के सभी किसानों के हित में किसानों की रबी पैदावार का 80 फीसदी उत्पाद सरकार द्वारा खरीदने का फैसला ले लिया. प्रदेश के किसानों को बिचौलियों से मुक्त करने के लिए योगी ने 80 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदने का फैसला किया है. रबी के बाद खरीफ (धान) फसल की खरीद को लेकर भी सरकार की यही नीति रहेगी. आलू को लेकर भी सरकार ऐसा ही निर्णय लेने जा रही है. किसानों को आलू की उचित कीमत दिलाने के इरादे से उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही और वन एवं पर्यावरण मंत्री दारा सिंह चौहान की तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय कमेटी गठित की गई है, जो प्रदेश के आलू उत्पादक किसानों को राहत देने के उपायों पर विचार करने के लिए जमीनी अध्ययन करेगी और सरकार को अपनी रिपोर्ट पेश करेगी.

कर्ज माफी के संदर्भ में योगी सरकार ने किसानों का कुल मिलाकर 36 हजार 359 करोड़ रुपए का कर्ज माफ किया है. इस निर्णय के तहत किसानों द्वारा किसी भी बैंक से लिया गया फसली ऋण माफ कर दिया गया है. इस फैसले से प्रदेश के राजकोष पर 36 हजार 359 करोड़ रुपए का भार आएगा. पिछले कुछ वर्षों में सूखा, फिर ओलावृष्टि और बाढ़ के कारण प्रदेश के किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा. तबाही के कारण कई किसानों ने आत्महत्या तक कर ली. प्रदेश में लगभग दो करोड़ 30 लाख किसान हैं, जिनमें 92.5 प्रतिशत यानि, 2.15 करोड़ लघु एवं सीमांत किसान हैं. प्रारम्भिक गणना के अनुसार प्रदेश में ऐसे कुल 86.68 लाख लघु व सीमांत किसान हैं, जिन्होंने बैंकों से फसली ऋण लिया हुआ है. यह कर्ज माफी उन्हीं लघु और सीमांत किसानों के हित के लिए है.

इसके साथ ही योगी कैबिनेट ने उन सात लाख किसानों का भी कर्ज माफ किया, जो बर्बादी और मुफलिसी के कारण ऋण का भुगतान नहीं कर सके थे और उनकी ऋण-राशि बैंकों की गैर निष्पादित आस्तियों (एनपीए) में शुमार हो गई थी. इस वजह से उन किसानों को और ऋण मिलना बंद हो गया था. ऐसे किसानों को भी राहत देते हुए सरकार ने उनके कर्ज के 5,630 करोड़ रुपए माफ कर दिए. एक हेक्टेयर यानि, ढाई एकड़ तक के सभी किसान सीमांत किसान की श्रेणी में और दो हेक्टेयर यानि, पांच एकड़ तक के सभी किसान लघु किसान की श्रेणी में आएंगे. योजना का लाभ प्रदेश के सभी लघु व सीमांत कृषकों को मिलेगा.

योगी मंत्रिमंडल ने 2017-18 के लिए रबी खरीद मूल्य समर्थन योजना के तहत गेहूं क्रय नीति को मंजूरी दी है. किसानों को मूल्य समर्थन योजना के जरिए अधिकतम लाभ दिलाने के लिए शासनादेश जारी कर 01 अप्रैल 2017 से प्रदेशभर में गेहूं की खरीद शुरू कर दी गई. गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1625 रुपए प्रति क्विंटल रखा गया है. वर्ष 2017-18 के लिए राज्य सरकार ने 40 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदने का न्यूनतम लक्ष्य रखा था, लेकिन किसानों को मूल्य समर्थन योजना का अधिकाधिक लाभ मिले इसके लिए न्यूनतम खरीद लक्ष्य को बढ़ाकर 80 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया. नौ क्रय संस्थाओं द्वारा गेहूं खरीदा जा रहा है और इसके लिए प्रदेश के विभिन्न जिलों में पांच हजार क्रय केंद्र खोले गए हैं. गेहूं खरीद में आने वाली दिक्कतों को दूर करने का बीड़ा खुद मुख्यमंत्री ने अपने हाथों में लिया है. मुख्यमंत्री ने गेहूं खरीद के मामले में किसानों की किसी भी परेशानी को दर्ज करने और उसका त्वरित निपटारा करने के लिए खाद्य एवं रसद आयुक्त के कार्यालय में कंट्रोल रूम की स्थापना की है.