मातृ-भाषा के हिमायती थे राहुल सांकृत्यायन

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~ एम.एस. पाण्डेय

महान यायावर एवं विश्वविख्यात विद्वान महापंडित राहुल सांकृत्यायन (पद्म विभूषण) की 124वीं जयन्ती और राष्ट्रीय मासिक ‘जनहित इंडिया’ के सफल प्रकाशन के 4 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर 9 अप्रैल को अपराह्न 1 बजे ‘राहुल जी के मातृभाषा सम्बन्धी विचार’ विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन महापंडित राहुल सांकृत्यायन बालिका उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कनैला, आजमगढ़ के परिसर में हुआ. संगोष्ठी के मुख्य वक्ता काशी हिन्दू विश्वविद्यालय वाराणसी के भोजपुरी अध्ययन केन्द्र के समन्वयक श्री सदानन्द शाही ने अपने उद्बोधन में कहा कि, ‘‘वह आदमी अभागा है, जिसको अपनी मातृभाषा से प्रेम नहीं है. राहुल जी मातृभाषा के बहुत हिमायती थे. इसलिए उन्होंने भोजपुरी में अपने नाटकों को लिखा. हम लोगों को अपने पुरखों एवं परम्पराओं से ‘मातृभाषा’ विरासत के रूप में मिली हुई अमूल्य धरोहर है. इस धरोहर को हम सभी को मिलकर बचाना है. गवाना नहीं है. क्योंकि मातृभाषा में प्राप्त ज्ञान अन्य भाषाओं में प्राप्त ज्ञान की तुलना में ज्यादा प्रभावी होता है. राहुल जी ऐसे व्यक्ति थे जो अपने गांव कनैला के इतिहास को ‘कनैला की कथा’ नाम से लिखते हैं. और वह भी सौ-दो सौ साल का नहीं बल्कि तीन हजार साल पहले से लिखते हैं. ऐसे महापुरुष का पितृग्राम कनैला हमारे लिए पवित्र तीर्थ के समान है.’’ पीजी कालेज बड़ागांव वाराणसी के एसोसिएट प्रोफेसर एवं भोजपुरी के प्रख्यात कवि प्रकाश उदय ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहाकि, ‘‘मातृभाषा के सम्बन्ध में राहुल जी का स्पष्ट विचार था. वह चाहते थे कि बच्चों की प्राथमिक शिक्षा हर हाल में मातृभाषा में ही होनी चाहिए. क्योंकि जिस व्यक्ति को अपनी मातृभाषा का ज्ञान नहीं होगा. वह दूसरी भाषा जीवन में कभी सीख नहीं सकता है.’’

संगोष्ठी में केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय अगरतला के प्रधान वैज्ञानिक डा. प्रमोद कुमार पाण्डेय, वामपंथी विचारक गिरिजेश तिवारी, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय वाराणसी की दो शोध छात्रायें शिखा सिंह एवं कुमारी ममता ने भी अपने सारगर्भित विचार व्यक्त किया. राजेश्वरी ‘रोली’ ने अपनी मातृभाषा में राहुल जी के सम्बन्ध में अपने विचार एवं राहुल जी की भोजपुरी में लिखी गीत को सुनाया तथा विद्यालय की छात्राओं में जागृति पाडेय, कृति पाण्डेय, खुशबू चौहान, ओजस्विनी ‘रूपम’ ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया.

विद्यालय के संस्थापक और जनहित इंडिया के संपादक मदन मोहन पाण्डेय ने सभी अतिथियों के प्रति आभार प्रदर्शन व्यक्त किया तथा अन्त में संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे हिन्दी के विद्वान लेखक पारसनाथ पाण्डेय ‘गोवर्धन’ ने अपने विचार व्यक्त करके संगोष्ठी के समापन की घोषणा की. इस अवसर पर क्षेत्र के सम्भ्रान्तजनों में डा. दिनकर राय, विजय शंकर पाण्डेय, सुरेन्द्र उपाध्याय, गौरीशंकर सिंह, अम्बिका प्रसाद यादव, पत्रकार धनन्जय राय, दुर्गा राय, बृजेश यादव, प्रभाकर मिश्र, रणजीत पाण्डेय, रामकुमार राम, महाप्रधान जयप्रकाश सिंह, एडवोकेट विजय कुमार सिंह, रामकिशुन यादव, रीमा पाण्डेय, नेहा पाण्डेय, प्रधानाचार्या सुधा पाण्डेय, सीमा पाण्डेय, गोदावरी मिश्र, बिन्दू यादव, पूनम विश्वकर्मा, निशा पाण्डेय, पूजा पाण्डेय, मुहम्मद इद्रीश, मुहम्मद शरीफ, ओमप्रकाश सिंह, शम्भूनाथ यादव, राधेश्याम सिंह, हीरालाल यादव, भुवनेश्वर पाण्डेय, बृजकिशोर पाण्डेय, जनहित इंडिया के ब्यूरो चीफ इन्द्रजीत सिंह (गाजीपुर), एपी सिंह (मऊ), राजेश कुमार दुबे (बलिया) आदि सैकड़ों लोग उपस्थित थे. संगोष्ठी का संचालन रामनरायन पाण्डेय ने किया.