शाश्वत वैचारिक क्रांति के प्रतीक थे ‘चन्द्रशेखर’

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~ शत्रुघ्न चौबे ‘चंचल’

देश के प्रथम समाजवादी प्रधानमंत्री राष्ट्रपुरूष चन्द्रशेखर जी की 91वीं जयन्ती के अवसर पर 17 अप्रैल को उत्तर प्रदेश विधानसभा के सेण्ट्रल हॉल में ‘राष्ट्रपुरुष चन्द्रशेखर, संसद में दो टूक’ पुस्तक का विमोचन कार्यक्रम आयोजित हुआ. जिसमें सूबे के मुखिया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बतौर मुख्य अतिथि अपने उद्बोधन में कहा कि चन्द्रशेखर जी समाजवाद के सच्चे पुरोधा ही नहीं बल्कि शाश्वत वैचारिक क्रान्ति के प्रतीक भी थे. वे समाजवादी विचारधारा में परिवारवाद, जातिवाद और गुण्डागर्दी के प्रबल विरोधी थे. चन्द्रशेखर जी विचारों से ज्यादा राष्ट्र को महत्वपूर्ण मानते थे. उनका स्पष्ट मानना था कि कोई भी विचारधारा वह चाहे राष्ट्रवादी हो या समाजवादी हो, यदि सही मायने में अपने रास्ते पर चलती है तो उससे राष्ट्र का कल्याण ही होता है.

चन्द्रशेखर जी एक देश और एक कानून के प्रबल समर्थक थे. कश्मीर के मुद्दे पर वह अक्सर कहा करते थे कि अगर कश्मीर देश से अलग हो गया तो हमारे देश की एकता और धर्मनिरपेक्षता भी प्रभावित हो जायेगी. वह इकलौते समाजवादी थे, जिन्होंने संघ परिवार के ‘स्वदेशी आन्दोलन’ का खुलकर समर्थन किया था. और कांग्रेस में होने के बावजूद इमरजेंसी के फैसले का प्रबल विरोध किया. चन्द्रशेखर जी आजीवन वोट की राजनीति नहीं किये. इसलिए शायद यही वजह थी कि वह अकेले होने के बावजूद जब भी संसद में बोलते थे तो उनकी आवाज को सदन और समूचा देश गम्भीरता से सुनता था. और मुझे पूरी उम्मीद है कि चन्द्रशेखर जी पर लिखी गयी यह पुस्तक उनके विचारों के आलोक से हम सभी को आलोकित करेगी. इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष हृदयनारायण दीक्षित ने कहा कि आजकल लोग अपने नेतृत्व की हर बात आंख मूँद कर मान लेते हैं. लेकिन चन्द्रशेखर जी ने आपातकाल के मुद्दे पर श्रीमती इंदिरा गाँधी को भी कठघरे में खड़ा कर दिया था. वह वैचारिक दृष्टि से इतने मजबूत थे कि सही को सही और गलत को गलत कहने में कभी हिचकते नहीं थे.

पुस्तक विमोचन कार्यक्रम का आयोजन श्री चन्द्रशेखर जी स्मारक ट्रस्ट, आजमगढ़ के तत्वावधान में हुआ. इस अवसर पर पूर्व मंत्री रघुराज प्रताप सिंह ‘राजा भैया’, विधायक कुलदीप सेंगर, मयंकेश्वर शरण सिंह, शैलेन्द्र सिंह ‘शैलू’, एमएलसी विशाल सिंह ‘चंचल’, पुुस्तक के संपादक धीरेन्द्र श्रीवास्तव, ट्रस्ट के प्रबन्धक बृजेश कान्दू, कोषाध्यक्ष लालबहादुर सिंह ‘लालू’, पत्रकार के.एफ. रजा, अतुल चौबे, अरुण कुमार सिंह, पप्पू डॉन, उदय प्रताप सिंह, राजेश सिंह सहित अनेकों गणमान्य लोग उपस्थित थे. कार्यक्रम का संचालन पुस्तक के विचार संपादक व विधान परिषद सदस्य यशवन्त सिंह ने किया.