अपनी बात

तीन साल और तीन महीने

4 months ago मदन मोहन पाण्डेय 0
वक्त किसी का इन्तजार नहीं करता है. ऐसे में अतीत से सीख लेकर यदि वर्तमान में अपने कर्तव्यों का पूरी संजीदगी के साथ निर्वहन किया जाय तो सुखद भविष्य खुद-ब-खुद दहलीज पर दस्तक देने लगता है. क्योंकि ‘कल’ कभी नहीं आता है, जब भी आता है तो ‘आज’ बनकर ही आता है. पुरुषार्थी महापुरुष अतीत Read More

‘योगी’ जी वाह!

5 months ago मदन मोहन पाण्डेय 0
पिछले लगभग डेढ़ दशक से सूबे में एक विशेष प्रकार की सरकारें प्रभाव में थी. जिसने ‘परहित’ की जगह ‘स्वहित’ को ज्यादा तरजीह दिया था. फलस्वरूप जनता-जनार्दन ने उनको जनतंत्र की ताकत का एहसास कराया और पूरी शिद्दत के साथ दोनों बुआ-भतीजे को अवसाद की चादर में लपेटकर आरामगाह में लिटा दिया. यद्यपि लोकतांत्रिक तरीके Read More

परमारथ के कारने…‘योगी’

6 months ago मदन मोहन पाण्डेय 0
लोकतंत्र में जनता ही सर्वोपरि होती है. लेकिन जनता का अपना मूड और मिजाज होता है. उसका मिजाज कितना शानदार होता है? इसका अन्दाजा देश के पाँच राज्यों में आये जनादेश से सहज ही लगाया जा सकता है. ऐसा लगता है कि जनता को सही मायने में जातिवाद, परिवारवाद, क्षद्म विकासवाद और तुष्टिकरण से घोर Read More

‘जिन्न’ का इन्तजार

7 months ago मदन मोहन पाण्डेय Comments Off on ‘जिन्न’ का इन्तजार
बचपन में एक कहानी पढ़ा था. एक लघु प्राणी के सिर पर अखरोट गिर गया. वह बेतहाशा भागा. और चिल्लाया… भागो-भागो आसमान गिर रहा है. सभ्य समाज में भी बदमाशों की कमी नहीं होती है. फिर क्या था…? पूरे प्राणी जगत में अफवाह फैल गयी. सभी बिना सोचे-विचारे जान बचाने के लिए भागने लगे. बाद Read More

अमोघ अस्त्रधारी नेता

4 years ago मदन मोहन पाण्डेय 0
यदि अतीत से सीख लेकर वर्तमान में अपने कर्त्तव्यों का उचित पालन और जिम्मेदारियों का सम्यक निर्वहन किया जाय तो भविष्य के उज्ज्वल होने की संभावनाएं स्वतः प्रबल हो जाती हैं. भविष्य कभी नहीं आता है. वह सदैव वर्तमान के रूप में ही हमारे सम्मुख आता है. इसलिए वर्तमान काल को सदैव सुधारों का काल Read More

‘भय बिनु होइ न प्रीति’

4 years ago मदन मोहन पाण्डेय 0
याचना की भी हद होती है. अयोध्या के राजा दशरथ के ज्येष्ठ पुत्र श्रीराम अपने जीवनकाल की कठिन दौर से गुजर रहे थे. चौदह वर्ष का वनवास लगभग पूरा हो चुका था. सुख का समय सन्निकट आने वाला था. तभी पड़ोसी राजा रावण ने उनकी पत्नी सीता का हरण कर लिया. उन्हें मुक्त कराने के Read More

विचारधारा का संकट

4 years ago मदन मोहन पाण्डेय 0
आज ‘विश्वास के संकट’ जैसे बादलों के बीच विचारधारा की बिजली रूक-रूक कर कड़क रही है. समूची दुनिया ऊहापोह की स्थिति के बीच विश्वास एवं विचारधारा के संकटों से जूझ रही है. भारत भी इससे अछूत नहीं है. पूरे देश में विचारधाराओं का संघर्ष चल रहा है. लोकसभा का चुनाव धीरे-धीरे दहलीज पर आ रहा Read More