अपनी बात

तीन साल और तीन महीने

6 months ago मदन मोहन पाण्डेय 0
वक्त किसी का इन्तजार नहीं करता है. ऐसे में अतीत से सीख लेकर यदि वर्तमान में अपने कर्तव्यों का पूरी संजीदगी के साथ निर्वहन किया जाय तो सुखद भविष्य खुद-ब-खुद दहलीज पर दस्तक देने लगता है. क्योंकि ‘कल’ कभी नहीं आता है, जब भी आता है तो ‘आज’ बनकर ही आता है. पुरुषार्थी महापुरुष अतीत