कला-संस्कृति

‘अंकुर’ के निर्देशन में सूत्रधार की शानदार प्रस्तुति हंसा जाई अकेला और कहानी के लिए स्त्रर पात्र चाहिए

3 months ago Editor 0
~ राजेश्वरी ‘रोली’ आजमगढ़ में शारदा सिनेमा हाल में ‘मार्कण्डेय जी’ की कहानियों पर ‘सूत्रधार’, नाट्य प्रस्तुति का बेहतरीन आयोजन किया। परिकल्पना और निर्देशन कहानियों की नाट्य प्रस्तुति के लिए विख्यात रंग निर्देशक, देवेन्द्र राज अंकुर ने किया। उन्होंने ‘मार्कण्डेय जी’ की दो बहुचर्चित कहानी- ‘हंसा जाई अकेला’ तथा ‘कहानी के लिए स्त्री पात्र चाहिए’ Read More

राजस्थान का खजुराहो

4 years ago चंदन भाटी 0
मंदिर के मंडप के भीतर उत्कीर्ण नारी प्रतिमाएं नारी सौंदर्य की बेजोड़ कृतियां हैं जिनमें से एक कला खंड नारी केश विन्यास से संब  है। इसे देखकर संवरी हुई केश राशि एवं वसन की सिलवटे नारी के सहज स्वरूप तथा भाव का साक्षात दर्शन कराती है। गर्भगृह के द्वार पर मंदिर परंपरा की अवधारणा के Read More

छत्तीसगढ़ – कला-संस्कृति ने दी पहचान

4 years ago जी. एस. सिंह 0
छत्तीसगढ़ लगातार तरक्की की नई राह पकड़ता जा रहा है और इसकी तरक्की की कहानी इसकी कला और संस्कृति के जिक्र के बिना अधूरी है। छत्तीसगढ़ की हजारों साल पुरानी आदिवासी संस्कृति, कला, हैंडीक्राफ्ट दुनिया भर के कला प्रेमियों के दिल में खास जगह रखती है। इसी समृद्ध विरासत की वजह से इसे देश की Read More