साहित्य

मोदी ‘‘बावनी’’

2 months ago Editor 0
माँ शारद को नमन कर, श्री गणेश सिरनाय। रचूँ ‘‘बावनी’’ मोदकी, गौरी पद गुण गाय।। मोदी गुण-सागर भरा, मज्जन चहूँ दृढ़ाय। शुचि शुभ गुण भण्डार का, वर्णन करुँ सिहाय।। जय मोदी शुचि ज्ञान विशारद। तव गुण गावत निज मुख शारद।। मन में उपजे भाव अनेका। क्या गुण गँाउ एक ते एका।। अति पवित्र मुद मंगलदायक। Read More

भाग्य-विधाता

2 months ago Editor 0
भाग्य-विधाता अबोध नहीं, बज्र मूर्ख है क्योंकि नहीं बताया गया उसको कभी उसके अधिकार और कर्तव्य व स्वतंत्रता, समानता, भ्रातृत्व और जनतंत्र के अर्थ, न ही किया गया है कोई भी सार्थक प्रयास उसके विवेक की जागृति का, और बनाने का उसे सक्षम, आत्म-निर्भर व स्वाभिमानी ताकि वह बन सके पात्र किसी की दया तथा Read More

प्रख्यात कथाकार और संपादक थे ‘मार्कण्डेय’

3 months ago Editor 0
मार्कण्डेय (2 मई, 1930-17 मार्च, 2010) हिन्दी के जाने-माने कहानीकार थे। वे ‘नई कहानी’ आंदोलन के प्रमुख हस्ताक्षर थे। उनका जन्म उत्तर प्रदेश में जौनपुर जिले के बराई गांव में हुआ था। इनकी कहानियाँ आज के गाँव के पृष्ठभूमि तथा समस्यायों के विश्लेषण की कहानियाँ हैं। इनकी भाषा में उत्तर प्रदेश के गाँवों की बोलियों Read More

प्यार की एक ही शर्त है ‘कोई शर्त नहीं’

5 months ago जावेद अनीस Comments Off on प्यार की एक ही शर्त है ‘कोई शर्त नहीं’
कंचना माला और मोइदीन का प्यार हमारे दौर का एक ऐसा मिसाल है जिसका जिक्र फसानों में भी नहीं मिलता है. यह मोहब्बत का ऐसा जादू है जिसपर यकीन करना मुश्किल हो जाए कि क्या कोई किसी से इस कदर टूट कर भी प्यार कर सकता है? यह अपने प्यार के लिए इस खुद को Read More

अतीत

3 years ago Madanji 0
सुधीर मौर्य माँ ने उसे सहारा दे कर कार की पिछली सीट पर बैठा दिया और खुद उसके बगल में बैठ गयी। मुझे गाड़ी चलाने की हिदायत देकर, माँ उसे अपनी बोटल से पानी पिलाने लगी। न जाने क्यूँ आज मुझे माँ की इस बात का विरोध करने का मन कर रहा था। पर मैंने Read More

भारतीय अर्थव्यवस्था को नाज…

4 years ago राजेश कुमार 0
प्याज रे प्याज, तुझपे है भारतीय अर्थवस्था को नाज. रूपया तो लुढक गया पर तूने मुकाबला किया. डालर के मुकाबले रूपया 65 पर गिरा धड़ाम, पर तूने लगायी है 60 की छलांग प्याज रे प्याज तुझपे है भारतीय अर्थव्यवस्था को नाज… गर तू किया होता मुकाबला तो देश की इज्जत मिट्टी में मिल जाती केन्द्र Read More

सुबह की कालिमा

4 years ago सुधीर मौर्य 0
अंकिता आज थोड़ा उलझन में है। वो जल्द से जल्द अपने रूम पर     पहुँच जाना चाहती है। न जाने क्यूँ उसे लग रहा है, ऑटो काफी     धीमे चल रहा है। वो ऑटो ड्राइवर को तेज चलाने के लिए बोलना चाहती है, पर कुछ सोच कर चुप रह जाती है। आज उसे निर्णय लेना Read More

हिन्दी हैं हम!

4 years ago सुशील कुमार शुक्ल 0
अंग्रेजियत का भूत सभी मीडिया चैनलों, अखबारों, पत्र -पत्रिकाओं पर चढ़ा है. कुछ हिंदी समाचार पत्र-पत्रिकायें हिंग्लिश लिखकर खुद को बड़ा दिखने की होड में लगे हैं. लोग घरों तक में हिंदी बोलने से कतराते हैं. हिंदी बोलने वाले को तुच्छ समझा जाता है और अंग्रेजीदां लोग खुद को सभ्य समझते हैं… हिंदी वालो सावधान! Read More

राजस्थान का खजुराहो

4 years ago चंदन भाटी 0
मंदिर के मंडप के भीतर उत्कीर्ण नारी प्रतिमाएं नारी सौंदर्य की बेजोड़ कृतियां हैं जिनमें से एक कला खंड नारी केश विन्यास से संब  है। इसे देखकर संवरी हुई केश राशि एवं वसन की सिलवटे नारी के सहज स्वरूप तथा भाव का साक्षात दर्शन कराती है। गर्भगृह के द्वार पर मंदिर परंपरा की अवधारणा के Read More

कोई चेहरा

4 years ago डॉ. प्रतिमा शर्मा 0
यादों की झुरमुट से झाँकता कोई चेहरा न  जाने क्यों बहुत अपना लगता है , गुजरा वक्त न जाने क्यूँ एक सपना लगता है, कुछ तुमसे कहना और कुछ सुनना चाहती हूँ, वक्त की बेबसी में सब भुलाना पड़ता है, कहीं जाने से पहले मुझे बताना तुम्हारी आदत में शुमार था, फिर जाने से पहले Read More