साहित्य

मोदी ‘‘बावनी’’

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माँ शारद को नमन कर, श्री गणेश सिरनाय। रचूँ ‘‘बावनी’’ मोदकी, गौरी पद गुण गाय।। मोदी गुण-सागर भरा, मज्जन चहूँ दृढ़ाय। शुचि शुभ गुण भण्डार का, वर्णन करुँ सिहाय।। जय मोदी शुचि ज्ञान विशारद। तव गुण गावत निज मुख शारद।। मन में उपजे भाव अनेका। क्या गुण गँाउ एक ते एका।। अति पवित्र मुद मंगलदायक।