
-अमरनाथ सक्सेना
भारत में अगर आपके पास कोई मोटर वाहन है, तो मोटर वाहन अधिनियम 1988 के तहत आपके पास थर्ड-पार्टी मोटर इंश्योरेंस का होना अनिवार्य है। इस कवर को एक्ट ओनली या लायबिलिटी ओनली इंश्योरेंस के नाम से भी जाना जाता है। यह न केवल कानूनी तौर पर आपके लिए ज़रूरी है, बल्कि यह एक वैधानिक इंश्योरेंस कवर है, जिसके तहत अगर किसी दूसरे व्यक्ति को आपके वाहन से चोट लग जाए, उनकी मौत हो जाए या संपत्ति का नुकसान हो, तो यह इंश्योरेंस वाहन मालिक को कानूनी ज़िम्मेदारियों से सुरक्षा प्रदान करता है। मार्च 2026 में जारी वाहन डेटाबेस की फिटनेस और रजिस्ट्रेशन स्थिति के अनुसार, मौजूदा समय में भारत की सड़कों पर दौड़ने वाले लगभग 45% वाहनों का इंश्योरेंस ही नहीं करवाया गया है। इससे यह बात पता लगती है कि जल्द से जल्द न केवल सख्त नियमों का पालन करवाना ज़रूरी है, बल्कि लोगों को थर्ड-पार्टी मोटर इंश्योरेंस के प्रति जागरूक करना भी बेहद अहम है। इससे वाहन मालिकों पर आर्थिक ज़िम्मेदारी तो आती ही है, साथ ही वे सड़कों के प्रति भी अधिक सुरक्षा और सतर्कता के साथ नियमों का पालन करते हैं। (स्रोत: संसद)
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने एक एडवाइज़री जारी करते हुए नियमों का पालन करने पर ज़ोर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर बल दिया कि दो-पहिया और चार-पहिया वाहनों के लिए आपके पास थर्ड-पार्टी मोटर इंश्योरेंस का होना अनिवार्य है। इस एडवाइज़री में बताया गया कि अब से थर्ड-पार्टी ‑मोटर इंश्योरेंस की समय-सीमा बढ़ा दी गई है। दो-पहिया वाहनों के लिए छह साल और चार‑पहिया वाहनों के लिए चार साल की समय-सीमा निर्धारित की गई है। इस समयावधि को बढ़ाने का मकसद लंबे समय के लिए केवल कवरेज प्रदान करना नहीं है, बल्कि इस बात को पुख्ता करना है कि आपको लगातार सुरक्षा मिले और जिन वाहन मालिकों के पास थर्ड-पार्टी मोटर इंश्योरेंस न हो, उनकी संख्या सड़कों पर कम हो। इसके अलावा, सड़क हादसों में घायल होने वाले लोगों को उचित आर्थिक सहायता मिले।
भारत में जिस गति से वाहनों की संख्या बढ़ रही है, ऐसे में ज़रूरी है कि इंश्योरेंस कवरेज में भी उसी अनुपात में बढ़ोत्तरी हो। इस तरह के अहम कदम से न केवल सड़क हादसों में घायल होने वाले लोगों को आर्थिक मदद मिलती है, बल्कि लोग इस बात की ओर भी प्रोत्साहित होते हैं कि वाहन खरीदने के समय वे लंबी अवधि के लिए सभी सुरक्षा नियमों का पालन करें।
इससे सड़क हादसे में घायल लोगों को मुआवज़ा पाने में काफी मदद मिलती है। यहां सबसे ज़रूरी बात यह है कि थर्ड-पार्टी मोटर इंश्योरेंस से लोगों के भीतर एक मज़बूत सोच बनती है कि उन्हें न केवल कानूनी तौर पर सभी नियमों का पालन करना है, बल्कि एक ज़िम्मेदार वाहन चालक भी बनना है। इसके अलावा, सड़क पर अच्छी तरह से वाहन चलाने के साथ-साथ वे सड़क सुरक्षा की आर्थिक ज़िम्मेदारी भी लेते हैं।
लंबी अवधि का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस क्यों है फायदेमंद?

लंबी अवधि की थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस पॉलिसी से वाहन मालिकों को कई फायदे मिलते हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि पूरी अवधि के लिए प्रीमियम एक समान रहता है, जिससे कि हर साल बढ़ती महंगाई और क्लेम में आ रही तेज़ी का असर आपके प्रीमियम पर नहीं पड़ता। और तो और न तो आपको हर साल रिन्यूअल की ज़रूरत होती है, न ही इससे जुड़े अतिरिक्त खर्च भरने पड़ते हैं। नतीजतन लंबे समय में आपकी पॉलिसी बेहद किफायती साबित होती है।
लंबी अवधि का कवर आपके लिए बेहद सुविधाजनक साबित होता है। एक बार पॉलिसी लेने के बाद आपको इसकी रिन्यूअल तारीखें याद नहीं रखनी पड़ती हैं, न तो इसके बंद होने की चिंता रहती है और न ही आपको बार-बार कागज़ी कार्रवाई करनी पड़ती है। परिणामस्वरूप, आप आसानी से इंश्योरेंस संभाल पाते हैं और बिना किसी फिक्र के लगातार कवरेज पाते हैं।
कुल मिलाकर देखें तो लंबी अवधि की टीपी इंश्योरेंस पॉलिसी में आपको न केवल कम पैसे खर्च करने पड़ते हैं, बल्कि लंबे समय के लिए कवरेज मिलता है और इसे संभालना भी बेहद आसान होता है। यही वजह है कि वाहन मालिकों के लिए यह सुविधाजनक होने के साथ-साथ एक भरोसेमंद विकल्प भी है।
आइए ठीक तरह से समझें कि आखिर थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस क्या है?
थर्ड-पार्टी (टीपी) इंश्योरेंस कॉन्ट्रैक्ट में तीन पक्ष शामिल होते हैं। पहले पक्ष में पॉलिसीधारक शामिल होते हैं यानी जिनके नाम पर इंश्योरेंस कॉन्टैक्ट जारी है। दूसरे पक्ष में इंश्योरेंस कंपनी शामिल होती है यानी जिनसे आपने पॉलिसी खरीदी है। और अंत में, तीसरे पक्ष में वह व्यक्ति या प्रॉपर्टी शामिल होते हैं, जिसे इंश्योरेंस किए गए वाहन से नुकसान पहुंचता है। इस तरह के नुकसान के लिए इंश्योरेंस कंपनी की ज़िम्मेदारी मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधानों के तहत तय की जाती है।

अगर आपके वाहन से तीसरे पक्ष के व्यक्ति को नुकसान या क्षति सहनी पड़े, तो ऐसे में थर्ड-पार्टी (टीपी) कवर आपको कानूनी और आर्थिक ज़िम्मेदारियों से सुरक्षा प्रदान करता है। ऐसे मामलों में अचानक से आपको लाखों रुपये से लेकर करोड़ों रुपयों तक के खर्च झेलने पड़ सकते हैं। यही वजह है कि टीपी इंश्योरेंस न केवल आपको आर्थिक मुसीबतों से बचाता है, बल्कि आप चिंतामुक्त भी रहते हैं। हालांकि टीपी आपके अपने वाहन को कवर नहीं करता है, इसलिए आपके लिए कॉम्प्रिहेंसिव पॉलिसी भी ज़रूरी है, जिसमें ओन-डैमेज कवर शामिल होता है।
मानिए कि अगर किसी व्यक्ति के पास केवल टीपी इंश्योरेंस है और उनकी कार की टक्कर किसी दो-पहिया वाहन से हो जाती है, जिसमें दो-पहिया वाहन चालक घायल हो जाता है और उसका वाहन क्षतिग्रस्त हो जाता है, तो कार चालक पर उस व्यक्ति को ₹1,00,000 का मुआवज़ा देने की ज़िम्मेदारी होगी। टीपी पॉलिसी इस राशि को कवर करेगी, लेकिन व्यक्ति की अपनी कार में आए डेंट की मरम्मत का खर्च नहीं देगी। इस तरह के मामलों में अपने वाहन को सुरक्षित बनाने के लिए ज़रूरी है कि आप कॉम्प्रिहेंसिव इंश्योरेंस कवर अवश्य लें।
टीपी इंश्योरेंस निम्नलिखित परिस्थितियों में आपको सुरक्षा कवर प्रदान करता है: –
तीसरे पक्ष की मृत्यु या शारीरिक चोट के मामले में
तीसरे पक्ष की संपत्ति को हुए नुकसान के मामले में (सीमित देयता)

टीपी इंश्योरेंस पॉलिसीधारक को बेहद किफायती दर पर सुरक्षा प्रदान करता है। भारत में यह सबसे किफायती कवर में से एक है। इसमें प्रीमियम की दरें भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण द्वारा तय की जाती हैं। यह इंश्योरेंस बेहद सरल है और इसे खरीदना भी एकदम आसान है। इतना ही नहीं, इसके लिए बहुत ज़्यादा खोजबीन करने या तुलना करने की ज़रूरत भी नहीं होती है। आप इश्योरेंस कंपनी की वेबसाइट पर जाकर इसे फटाफट खरीद सकते हैं, जिससे कि टीपी इंश्योरेंस सुविधाजनक होने के साथ-साथ ज़िम्मेदारी के साथ वाहन चलाने की दिशा में बेहद अहम भूमिका निभाता है।
भारत में जिस तरह से वाहन मालिकों की संख्या बढ़ रही है, ऐसे में इंश्योरेंस की अहमियत बढ़नी भी ज़रूरी है, ताकि लोगों की आर्थिक सुरक्षा मज़बूत हो और उन्हें बेहतर कवरेज भी मिले। थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस को केवल कानूनी औपचारिकता की तरह नहीं देखना चाहिए, बल्कि यह मानना चाहिए कि वाहन मालिक एक ज़िम्मेदार चालक है और सड़क की सुरक्षा के लिए यह एक ज़रूरी नियम है। वैध इंश्योरेंस के साथ-साथ हर चालक के पास उचित लाइसेंस का होना ज़रूरी है। इसके अलावा, कमर्शियल वाहनों के लिए चालक के पास परमिट होना ज़रूरी है और ट्रैफिक नियमों का भी पूरी तरह से पालन किया जाना चाहिए। इन सभी बातों का पालन करते हुए आप अपनी सुरक्षा करने के साथ-साथ सड़क पर वाहन चलाते समय दूसरों के जीवन को भी सुरक्षित बनाते हैं।
(लेखक : बजाज जनरल इंश्योरेंस के चीफ टेक्नीकल ऑफिसर-कमर्शियल के पद पर कार्यरतहैं।)
