बिशप कॉन्वेंट स्कूल में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया डांडिया महोत्सव

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बच्चों ने प्रस्तुत की मनमोहक सांस्कृतिक झलक।

प्रयागराज। नैनी स्थित बिशप कॉन्वेंट स्कूल में गत दिवस डांडिया महोत्सव का आयोजन बड़े हर्षोल्लास एवं उत्साह के साथ किया गया। कार्यक्रम में बच्चों ने पारंपरिक वेशभूषा धारण कर भारतीय संस्कृति, धार्मिक आस्था और परंपराओं की सुंदर झलक प्रस्तुत की। पूरे विद्यालय परिसर में उत्सव का माहौल रहा और सभी ने मिलकर पर्व को उल्लासपूर्वक मनाया।
कार्यक्रम का शुभारंभ नवरात्रि एवं मां दुर्गा की महिमा से जुड़ी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ हुआ। बच्चों ने पारंपरिक परिधानों में सजकर उत्सव की शोभा बढ़ाई। इसके पश्चात बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक स्वरूप रावण दहन का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसके बाद डांडिया नृत्य का आयोजन हुआ, जिसमें बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया।
इस अवसर पर सुविख्यात समाजसेवी सरदार पतविंदर सिंह एवं सौरव कुमार उपस्थित रहे। उन्होंने बच्चों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें आशीर्वाद दिया और भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं से जुड़े रहने का संदेश दिया।
विद्यालय के निदेशक संजय पाठक ने बच्चों को नवरात्रि, मां दुर्गा की महिमा और डांडिया पर्व के धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना और शक्ति की उपासना का प्रतीक है। यह पर्व हमें नारी शक्ति के सम्मान, बुराई पर अच्छाई की विजय तथा सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने बताया कि डांडिया नृत्य विशेष रूप से गुजरात की समृद्ध लोक-संस्कृति से जुड़ा हुआ है और नवरात्रि के दौरान बड़े उत्साह से किया जाता है। डांडिया में प्रयोग की जाने वाली रंग-बिरंगी लकड़ियां मां दुर्गा की आराधना से जुड़ी पारंपरिक नृत्य शैली का अभिन्न अंग हैं। इन लकड़ियों को लयबद्ध तरीके से आपस में टकराकर नृत्य किया जाता है, जो सामूहिकता, अनुशासन, समन्वय और आनंद की भावना को दर्शाता है। उन्होंने बच्चों को समझाया कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं, धार्मिक मान्यताओं और भारतीय विरासत से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विद्यालय की प्रबंधक श्रीमती अलका पाठक एवं प्राचार्या श्रीमती रुचि मिश्रा के मार्गदर्शन में कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस अवसर पर सभी अभिभावकों, अध्यापिकाओं, अध्यापकों एवं विद्यालय के अन्य सदस्यों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। सभी ने बच्चों का उत्साह बढ़ाया और कार्यक्रम को यादगार बनाया।
अंत में विद्यालय परिवार ने भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं के संरक्षण तथा बच्चों में नैतिक मूल्यों, सांस्कृतिक चेतना और आपसी सद्भाव को प्रोत्साहित करने का संदेश दिया। पूरे कार्यक्रम का समापन हर्षोल्लास और उत्सवपूर्ण वातावरण में हुआ।

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