तंत्र सोता रहा…! जर्जर इमारतें गिरती रहीं, तंत्र सोता रहा, दीवारों की दरारें खूब चीखती रहीं, हमेशा शहर खामोश होता रहा। किसी छत ने पहले ही कहा था- “अब मुझमें…
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मेरे ज़ेहन में आज भी अंकित है लोकल ट्रेन का सफ़र
पहले बॉम्बे लोकल ट्रेन में ऐसे ही टिकट चलते थे। ये अट्ठारह बरस पुराना टिकट है। हमने कभी इस टिकट पर यात्रा की होगी,पुरानी फ़ाइल में मिला। हम बॉम्बे जाने…
अखबारों से व्यंग्य विधा की विदा
दैनिक हिन्दुस्तान के पाठक देखते रह गए और सम्पादकीय पृष्ठ के ‘नश्तर’ स्तम्भ पर सम्पादक जी का नश्तर चल गया. व्यंग्य रचनाओं से सजा हुआ नश्तर स्तम्भ हिन्दुस्तान के सम्पादकीय…
कांशीराम ने पलट दी यूपी की राजनीति : शंभूनाथ शुक्ल
उत्तर प्रदेश की राजनीति में 1990 का दशक आमूल-चूल बदलाव का है। ये वही दिन हैं, जब अगड़ा आधिपत्य वाले उत्तर प्रदेश में सवर्ण राजनीति का अंत हुआ। इसमें मुलायम…
डेंगू के बारे में चंद बातें- डॉ नवमीत
आजकल देश में डेंगू फैला हुआ है और हजारों लोग इसकी चपेट में हैं। कई लोगों की मृत्यु हो चुकी है और जनता में दहशत का माहौल है। तरह तरह…
