हरित खाद से स्वच्छता, आजीविका और टिकाऊ खेती की ओर बढ़ता आजमगढ़

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स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के हाथों मजबूत हो रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था- जिलाधिकारी

कृषि विविधीकरण और स्वावलंबन की दिशा में एक मील का पत्थर है, महिला समूहों द्वारा जैविक खाद बनाना : रविन्द्र कुमार

माँ परम ज्योति स्वयं सहायता समूह ने कृषि एवं पशु अपशिष्ट को बनाया आय का साधन, किसानों को मिल रही उपयोगी जैविक खाद।

आजमगढ़। किसी भी सरकार की सफलता उसकी नीयत, नीति और उससे निकलने वाले परिणामों से आंकी जाती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पूर्वांचल के गांवों में हो रहा सकारात्मक बदलाव इसी सोच का प्रत्यक्ष उदाहरण है। ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से संचालित उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से स्वयं सहायता समूह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रहे हैं। महिलाएं अब केवल परिवार की आर्थिक गतिविधियों में सहयोगी की भूमिका तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कृषि, पशुपालन, प्रसंस्करण, विपणन और अन्य आजीविका गतिविधियों में नेतृत्वकारी भूमिका निभा रही हैं।
जनपद आजमगढ़ में जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार के सतत मार्गदर्शन, निर्देशन एवं पर्यवेक्षण में स्वयं सहायता समूहों को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। विगत तीन माह में सोशल मोबिलाइजेशन अभियान चलाकर लगभग 6,000 नए स्वयं सहायता समूहों का गठन कर एक लाख महिलाओं को समूहों से जोड़ा गया है, जिसके फलस्वरूप आजमगढ़ प्रदेश में तीसरे स्थान पर है।
जिलाधिकारी ने बताया कि आजीविका मिशन का मूल उद्देश्य ग्रामीण निर्धन परिवारों की महिलाओं को संगठित कर मजबूत एवं स्थायी संस्थाएं तैयार करना तथा उन्हें विभिन्न आजीविका अवसरों से जोड़कर गरीबी को कम करना है। ग्रामीण निर्धन परिवारों की महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों में संगठित कर सामान्यतः कम से कम 10 सदस्यों का समूह गठित किया जाता है। समूह गठन के बाद सदस्यों को आर्थिक गतिविधियों के लिए विभिन्न चरणों में वित्तीय सहायता एवं बैंक क्रेडिट लिंकेज की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। समूह गठन के बाद समूह स्टार्टअप फण्ड के रूप में 2500 रू0, समूह गठन के तीन माह के बाद रिवाल्विंग फंड के रूप में 30 हजार रू0, समूह गठन के 6 माह पश्चात् कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड 1.5 लाख रू0 की धनराशि, कृषि आजीविका कार्य हेतु लाइवलीहुड फंड के रूप में 2 लाख रू0 की धनराशि प्रदान की जाती है। समूहों को 6 माह बाद वित्तीय समावेशन बैंक द्वारा क्रेडिट लिंकेज कराकर प्रथम डोज के रूप में 1.5 लाख रू0 की धनराशि समूहों को ऋण के रूप में उपलब्ध करायी जाती है।
इसी क्रम में जिलाधिकारी के मार्गदर्शन में विकास खंड सठियांव की ग्राम पंचायत कस्बा सराय में माँ परम ज्योति स्वयं सहायता समूह द्वारा कृषि एवं पशु अपशिष्ट का बेहतर उपयोग करते हुए हरित खाद तैयार करने की अभिनव पहल की जा रही है। यह पहल एक ओर गांवों में अपशिष्ट प्रबंधन और स्वच्छता को बढ़ावा दे रही है, वहीं दूसरी ओर किसानों को उपयोगी खाद उपलब्ध कराने के साथ स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत भी बन रही है।

कृषि एवं पशु अपशिष्ट से तैयार हो रही हरित खाद-
माँ परम ज्योति स्वयं सहायता समूह द्वारा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर हरित खाद तैयार की जा रही है। समूह द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार मुख्य रूप से गन्ने की राख एवं 30 दिन पुराने गोबर का उपयोग किया जाता है। तैयार मिश्रण में 50 प्रतिशत गन्ने की राख तथा 50 प्रतिशत पुराने गोबर को मिलाया जाता है। इसके साथ 50 किलोग्राम यूरिया एवं 50 किलोग्राम डीएपी का मिश्रण किया जाता है। सभी सामग्री को अच्छी तरह मिलाकर उचित नमी बनाए रखते हुए लगभग 30 दिनों तक अवायवीय अवस्था में रखा जाता है। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार 21वें दिन बेड में एक प्रतिशत वेस्ट डिकंपोजर मिलाकर उसे पुनः अच्छी तरह बंद कर दिया जाता है। इस अवधि में सामग्री का अपघटन एवं रूपांतरण होता है और निर्धारित प्रक्रिया के बाद हरित खाद तैयार होती है।
कम लागत में तैयार खाद से समूह को हो रहा लाभ-
समूह द्वारा तैयार हरित खाद को स्थानीय किसानों, एफपीओ एवं नर्सरियों के माध्यम से 10 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बिक्री की जा रही है। समूह के अनुसार हरित खाद तैयार करने में लगभग 4.60 रुपये प्रति किलोग्राम की लागत आती है। इस प्रकार प्रति किलोग्राम लगभग 5.40 रुपये का शुद्ध लाभ समूह को प्राप्त हो रहा है। यह पहल स्थानीय संसाधनों को आर्थिक गतिविधि में परिवर्तित करने का उदाहरण है। इससे जहां कृषि एवं पशु अपशिष्ट का वैज्ञानिक एवं उपयोगी प्रबंधन संभव हो रहा है, वहीं समूह की महिलाओं को गांव में ही रोजगार और अतिरिक्त आय का अवसर मिल रहा है।
उत्पादन से लेकर विपणन तक महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका
हरित खाद तैयार करने की पूरी प्रक्रिया में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की सक्रिय भागीदारी है। महिलाएं कच्चे माल की व्यवस्था करने, निर्धारित अनुपात में मिश्रण तैयार करने, नमी का प्रबंधन करने, खाद की नियमित देखरेख करने तथा तैयार उत्पाद को उपयोग एवं बिक्री के लिए तैयार करने का कार्य कर रही हैं। इससे महिलाओं में कार्यकुशलता और आत्मविश्वास बढ़ने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार की संभावनाएं भी मजबूत हो रही हैं। स्वयं सहायता समूह के माध्यम से महिलाएं सामूहिक रूप से निर्णय लेने, उत्पादन करने और बाजार तक उत्पाद पहुंचाने का अनुभव प्राप्त कर रही हैं।
स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण का संगम
माँ परम ज्योति स्वयं सहायता समूह की यह पहल केवल खाद उत्पादन तक सीमित नहीं है। यह स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आजीविका जैसे कई महत्वपूर्ण पहलुओं को एक साथ जोड़ती है। कृषि एवं पशु अपशिष्ट को अनुपयोगी समझने के बजाय उसे उपयोगी उत्पाद में परिवर्तित कर समूह ने यह संदेश दिया है कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों का बेहतर प्रबंधन कर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार एवं आय के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं। साथ ही, किसानों को स्थानीय स्तर पर उपयोगी खाद उपलब्ध होने से कृषि गतिविधियों को भी मजबूती मिल रही है। जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार ने कहा कि महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा कृषि एवं पशु अपशिष्ट से हरित खाद का उत्पादन कृषि विविधीकरण और स्वावलंबन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में नेतृत्व की भूमिका निभा रही हैं।
उत्पादन को और व्यापक बनाने की तैयारी-
माँ परम ज्योति स्वयं सहायता समूह का उद्देश्य हरित खाद के उत्पादन को और अधिक व्यवस्थित एवं व्यापक बनाना है, ताकि अधिक से अधिक किसानों तक गुणवत्तापूर्ण उत्पाद पहुंचाया जा सके। समूह द्वारा भविष्य में गुणवत्तापूर्ण उत्पादन, बेहतर पैकेजिंग, ब्रांडिंग एवं बाजार व्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है। इससे समूह की महिलाओं की आय में और वृद्धि होने की संभावना है।
उपायुक्त स्वतः रोजगार डॉ. आराधना त्रिपाठी ने बताया कि माँ परम ज्योति स्वयं सहायता समूह की सफलता से गांव की अन्य महिलाएं भी प्रेरित हो रही हैं और स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं। यह पहल इस बात का उदाहरण है कि सही दिशा, सामूहिक प्रयास और मजबूत इच्छाशक्ति के साथ सीमित संसाधनों से भी बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। उन्होंने कहा कि माँ परम ज्योति स्वयं सहायता समूह आत्मनिर्भर भारत की सोच को जमीनी स्तर पर साकार करने की दिशा में प्रभावी कार्य कर रहा है। समूह की यह पहल बताती है कि छोटे-छोटे स्थानीय नवाचार भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़े बदलाव का आधार बन सकते हैं।
माँ परम ज्योति स्वयं सहायता समूह की यह कहानी केवल एक समूह की सफलता की कहानी नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के बदलते आत्मविश्वास, स्वावलंबन और नेतृत्व की कहानी है। स्वच्छता से आजीविका, अपशिष्ट से उपयोगी उत्पाद और महिला शक्ति से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाली ऐसी पहलें ही विकसित भारत और विकसित उत्तर प्रदेश-2047 के संकल्प को धरातल पर साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

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