ब्रम्हलीन शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती जी का मनाया गया 102वां प्राकट्योत्सव

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वाराणसी। ज्योतिष एवं द्वारकाशारदा द्व्यपीठाधीश्वर जगदगुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज का 102वां प्राकट्योत्सव अत्यंत हर्षोल्लास के साथ काशी स्थित श्रीविद्यामठ में अत्यंत हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।काशी के वरिष्ठ वैदिक आचार्यों के सान्निध्य में एवं श्रीविद्यामठ के प्रभारी ब्रम्हचारी परमात्मानंद जी के अगुवाई में वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य सर्वप्रथम ब्रम्हलीन द्वायपीठाधीश्वर जगदगुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के चरण पादुका पूजन किया गया।जिसके अनंतर वैदिक आचार्यों क्रमशः मणि झा, ओमप्रकाश पाण्डेय, विनय भूषण तिवारी, शिवाकांत मिश्रा, अनिरुद्ध मिश्रा द्वारा रुद्राभिषेक सम्पन्न कराया गया।जिसके पश्चात ब्रम्हलीन शंकराचार्य जी का मोदक से अर्चन किया गया।और फिर 108 वैदिक विद्यार्थियों ने चतुर्थ वेद का परायण किया।आज श्रीविद्यामठ में दिन भर भजन कीर्तन एवं भंडारा चलेगा जिसमें भक्तगण प्रसाद ग्रहण करेंगे।
उक्त जानकारी देते हुए शंकराचार्य जी महाराज के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने बताया कि ब्रम्हलीन द्व्यपीठाधीश्वर जगदगुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे और देश के स्वतंत्रता आंदोलन में दो बार जेल गए थे।उन्होंने अपने अकेले के दम पर मध्यप्रदेश में पूरा गांव अंग्रेजों से खाली करा दिया था।और वो पूरे धरती पर पर सबसे अधिक चातुर्मास्य व्रत अनुष्ठान सम्पन्न करने वाले दंडी सन्यासी भी थे।साथ ही ब्रम्हलीन शंकराचार्य जी महाराज राममंदिर आंदोलन में भी जेल गए थे। ब्रम्हलीन शंकराचार्य जी के आदेश व ईक्षानुसार ही वर्तमान ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगदगुरू शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज ने रामालय ट्रस्ट के माध्यम से पक्षकार एवं मुख्य गवाह के रूप में 25वर्षों तक न्यायालय एवं अन्य माध्यमों से संघर्ष कर रामजन्मभूमि एवं राममंदिर का फैसला हिंदुओं के पक्ष में करवाया, राष्ट्रव्यापी आंदोलन छेड़ के गंगा जी को राष्ट्रीय नदी घोषित करवाया उस आंदोलन में तीन गंगा तपस्वियों ने अपने प्राणों की आहुति दे दी थी और रामसेतु को टूटने से भी बचाया। ब्रम्हलीन शंकराचार्य जी महाराज ने अथक प्रयास करके धर्मांतरण कर चुके लाखों वनवासी, आदिवासी एवं दलितों एवं महादलितों को वापस सनातनधर्म में लाए थे,ब्रम्हलीन शंकराचार्य जी की कृपा से आज भी वर्तमान ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य जी महाराज के सान्निध्य में हजारों नि:शुल्क चित्सालयों, वेद विद्यालयों, वृद्धाश्रमों एवं गैसवालयों का संचालन सुचारू रूप से हो रहा है।
ब्रम्हलीन शंकराचार्य जी महाराज का प्राकट्योत्सव छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिला में स्थित सपाद लक्षेश्वर धाम सलधा जहां इस समय वर्तमान ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगदगुरू शंकराचार्य जी महाराज का चातुर्मास्य व्रत अनुष्ठान चल रहा,ज्योर्तिमठ सहित देश,विदेश में करोड़ों भक्त अत्यंत हर्षोल्लास के साथ मना रहे हैं।ब्रम्हलीन शंकराचार्य जी महाराज ने सनातनधर्म व राष्ट्र हेतु अनेकों कार्य किए आज उनके प्राकट्योत्सव के पावन अवसर पर हम सभी उनके प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं एवं हमारी आने वाली पीढ़ियों भी उनके ऋण से मुक्त नही हो सकेंगी।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से सर्वश्री सर्वभूतात्मानंद ब्रम्हचारी, रमेश उपाध्याय, डा. लता पाण्डेय, सावित्री पाण्डेय, अभय शंकर तिवारी, विजया तिवारी, ममता मिश्र, उर्मिला शुक्ल, पूनम मिश्र, रिंकी, लीला तिवारी, शिवानी, दुर्गेश नंदिनी, सीता साव, शोभा पाण्डेय, दीपा पटेल, अंकिता पटेल सहित भारी संख्या में भक्तगण उपस्थित थे।

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