महामृत्युंजय जाप का विरोध करने वाला आरोपी ने पूजा करा रहे दो ब्राह्मणों सहित अपनी पत्नी व बच्चे को मारी गोली।
आजमगढ़। जिले के अहिरौला थानाक्षेत्र के शंभूपुर गहजी गाँव में मंगलवार की शाम करीब छह बजे उस समय हड़कंप मच गया, जब एक सिरफिरे व्यक्ति ने बाजार से आते ही कथित तौर पर अपनी पत्नी और घर में महामृत्युंजय का पूजा-पाठ करा रहे दो ब्राह्मणों को गोली मारकर हत्या करने के बाद बच्चों को लेकर स्वयं को कमरे में कैद कर लिया। पुलिस द्वारा की जा रही बचाव की कार्यवाही के दौरान देर रात एक बच्चे की भी हत्या कर दिये जाने के उपरान्त पुलिस की जवाबी कार्यवाही में हत्यारा भी मारा गया।
मिली जानकारी के अनुसार आरोपी अरविन्द सिंह, जो अपने घर में चल रही महामृत्युंजय पूजा अनुष्ठान का पहले ही दिन से लगातार विरोध कर रहा था, पाँच दिन के अनुष्ठान में पूजा के चौथे दिन मंगलवार की शाम लगभग 6 बजे वह अपनी माँ, पत्नी बबिता उम्र 32 वर्ष और तीन ब्राह्मणों को गाली देना शुरू करता है। जिसका विरोध उसकी पत्नी बबिता और मां द्वारा किया जाता है। इसी बीच झगड़े के दौरान आरोपी पूजा कर रहे ब्राह्मणों से आधार कार्ड मांगता है। जिसपर ब्राह्मणों द्वारा एक दिन बाद घर से लाकर देने की बात कही गई, इससे नाराज होकर आरोपी पहले लाठी-डंडा से अपनी भतीजी और घर के सदस्यों सहित ब्राह्मणों को मारने लगता है।

आरोपी अरविन्द कुमार सिंह व पत्नी बबीता सिंह
जिसपर आरोपी की पत्नी बबिता व उसकी मां द्वारा पण्डितों का अपमान नहीं करने को कहा गया, जिसके बाद आरोपी ने घर में रखी लाइसेंसी पिस्टल लाकर फायर झोक दिया, जिससे बचाव करने के दौरान उसकी पत्नी बबिता को गोली लगी और वह मौके पर ही दम तोड़ दी। इसके बाद उसने तीनों ब्राह्मणों को भी निशाना बनाया, जिसमें दो ब्राह्मणों महेन्द्र पाठक (60 वर्ष) पुत्र सुदामा निवासी पठखौली थाना अहिरौला व अखिलेश मिश्रा (50 वर्ष) पुत्र लाल बहादुर निवासी छितौना थाना अहिरौला को भी गोली लगी। गोली लगने से उसकी पत्नी सहित 2 ब्राह्मणों की जान चली गई और एक ब्राह्मण द्वारा घर की चहारदीवारी कूदकर खुद की जान बचाई गई।
वारदात के बाद आरोपी ने बच्चों सहित खुद को घर के अंदर बंद कर लिया। स्थानीय लोगों द्वारा पुलिस को सूचना देते ही कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंच गई और मकान को चारों तरफ से घेर लिया तथा पूरे गाँव को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया। देर रात तक पुलिस आरोपी से दरवाजा खुलवाने का प्रयास करती रही किन्तु आरोपी पुलिस की बातों को इनकार करता रहा, पुलिस अधीक्षक डॉ अनिल कुमार, डीआईजी सुनील कुमार सिंह व एडीजी जोन वाराणसी नवीन अरोड़ा भी मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाले।
घर में अन्य बच्चों को सुरक्षित निकालने का पूरा प्रयास पुलिस टीम द्वारा किया जा रहा था, कई घंटों से भूखे प्यासे बच्चों को कुछ खाने को नहीं मिल रहा था, जिसमें एक 6 वर्ष की मासूम बच्ची भी थी, जिससे पुलिस टीम को और भी परेशानी होती रही।

कमरे में बन्द आरोपी से कमरा खोलने को कहते एसएसपी आज़मगढ़
बताया जा रहा है कि गोली मारकर हत्या करने की सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों जब पुलिस को सूचना दी गई तो कुछ ही देर में कई थानों की पुलिस फोर्स मौके पर पहुंच गई और मकान की घेराबंदी कर दी।
पुलिस टीम द्वारा आरोपी अरविन्द सिंह को बाहर निकालने के लिए दरवाजा खुलवाने का प्रयास करती रही। मौके की स्थिति को देखते हुए पुलिस के बड़े अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंच चुके थे और पूरे मामले की जानकारी जुटाने लगे। घटना के बाद इलाके में तनाव और दहशत का माहौल बना रहा तथा बड़ी संख्या में आसपास के लोग जमा हो रहे थे।
इसप्रकार लगातार बचाव क्रम में लगभग 2 बजे जब आरोपी ने अपने बच्चे को गोली मारी, तो पुलिस द्वारा यह आशंका जताई गई कि अब आरोपी अन्य बच्चों को भी गोली मारकर हत्या कर देगा। तो पुलिस टीम द्वारा शुरू किए गए बचाव ऑपरेशन के दौरान आरोपी अरविन्द सिंह को जवाबी फायरिंग में गोली लगी। जिससे इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
कुल मिलाकर इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस की बहादुरी देखने को मिली और आसपास के लोगों द्वारा भी पुलिस ऑपरेशन की सराहना की गई। इस पूरे घटनाक्रम में आरोपी सहित कुल 5 लोगों की जान गई।

सामूहिक हत्याकाण्ड में मृत दोनों पंडित
महामृत्युंजय जाप करने वाले दोनों पंडित थे?
1. पंडित अखिलेश मिश्रा?
पहले पुजारी की पहचान अखिलेश मिश्रा के रूप में हुई है। वह छितौना भटौली के रहने वाले थे। पूजा को लेकर विवाद हुआ और देखते ही देखते मामला खूनी घटनाक्रम में बदल गया। इसी दौरान अखिलेश मिश्रा की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
2. पंडित महेंद्र पाठक?
इस घटना में जान गंवाने वाले दूसरे पंडित की पहचान महेन्द्र पाठक के रूप में हुई है। वह पटखौली के निवासी थे। पूजा के दौरान हुए विवाद के बाद आरोपी ने उनके ऊपर भी गोली चला दी, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
