आज़मगढ़। अटल आवासीय विद्यालय गम्भीरवन, आज़मगढ़ में टीजीटी साइंस के शिक्षकों की नियुक्ति हेतु साक्षात्कार की प्रक्रिया व्यापक अनियमितताओं के बीच चलने की खबर आ रही है।
विश्वस्त सूत्रों की माने तो आज टीजीटी साइंस के शिक्षकों के मात्र 2 पदों पर नियुक्ति साक्षात्कार हेतु लगभग 60 से अधिक अभ्यर्थियों को बुलाया गया था। साक्षात्कार में सम्मिलित अभ्यर्थियों में कुछ का आरोप है कि पहले से ही उक्त पदों पर अप्रत्यक्ष चयन हो चुका है। पहला शक इस बात को लेकर गहराता है कि कुछ अभ्यर्थियों ने अपने आवेदन पत्र के साथ अपना अनुभव प्रमाणपत्र भी संलग्न किया था। जिसे जाँच कर्ता ने मौखिक रूप से बताया कि आपके आवेदन पत्र में अनुभव प्रमाणपत्र तो संलग्न नहीं था। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आवेदन पत्र के साथ संलग्न अनुभव प्रमाणपत्र को कौन मिस किया?
दूसरा शक यह है कि उक्त परिसर के कतिपय कर्मचारी कुछ अभ्यर्थियों के साथ विशेष बर्ताव कर रहे थे… जैसे- 1. रजनी c/o राजेश कुमार 2. नेहा भारद्वाज (उक्त नामों के टाइपिंग में त्रुटि सम्भव है) जिससे वहाँ उपस्थित अभ्यर्थियों में शंका उत्पन्न हो गई है कि सम्भवतः दाल में कुछ काला हो।
तीसरा शक यह है कि कुछ अभ्यर्थियों का डाक्यूमेंट चेक नहीं हुआ। जो पूर्व प्रायोजित व्यवस्था का संकेत देता है।
चौथा शक जुगाड़ वाले अभ्यर्थी फोन कराकर तेज अभ्यर्थियों का खेल बिगाड़ रहे हैं।
उपरोक्त के अतिरिक्त इस विद्यालय में शिक्षकों के चयन हेतु चल रही साक्षात्कार प्रक्रिया आज़मगढ़ के तेजतर्रार व ईमानदार आयुक्त श्री विवेक जी की अध्यक्षता/उपस्थित में संचालित हो रही है। इसलिए पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर शक करने की कोई विशेष गुंजाईश ही नहीं रह जाती है, क्योंकि साहब ने आज़मगढ़ में ज्वाइन करते ही इस विद्यालय का औचक निरीक्षण करके तहलका मचा दिया था। बावजूद इसके उपरोक्त शक संबंधी आरोपों पर सवाल उठना भी गौरतलब एवं लाजिमी है। क्योंकि जिस देश के कुएं में ही भांग पड़ी हो, वहां कुछ भी सम्भव है।
उल्लेखनीय है कि भ्रष्टाचार का रूप परिवर्तित हो सकता है लेकिन उसका स्वभाव सदैव अपरिवर्तित रहता है। इसलिए भविष्य में इस तरह की पुनरावृत्ति अन्य साक्षात्कारों में नहीं होनी चाहिए और यदि उक्त आरोप आज के साक्षात्कार में सत्य साबित हो, तो इसकी निष्पक्ष जांच तो बनती ही है?
