
लालगंज(आजमगढ़)। विकास खंड लालगंज के कैथीशंकरपुर गांव स्थित अघोर आश्रम परिसर में शनिवार को बाबा बावन राम जी की प्रथम पुण्यतिथि श्रद्धा व भक्ति के साथ मनाई गई। दूर-दूर से आए संतजनों व शिष्यों ने उनके परम शिष्य रोशन जी के साथ समाधि स्थल पर पहुंचकर पुष्प अर्पित किए व पूजन अर्चन करते हुए श्रद्धांजलि दी।
ज्ञातव्य है कि,अघोराचार्य बाबा कीनाराम अघोरपीठ, क्रीं कुण्ड,शिवाला,वाराणसी दुनिया के समस्त अघोर आश्रमों की प्रधान पीठ है जिसके पीठाधीश्वर बाबा कीनाराम के अवतरण महाराजश्री अघोराचार्य बाबा सिद्धार्थ गौतम रामजी हैं, जिनके निर्देश पर देश विदेश स्थित अघोर आश्रम और अघोरपंथ के अनुयायी 19 सूत्री मानव कल्याण के कार्यक्रमों में संलग्न रहते हैं।

ऐसे ही इस शाखा आश्रम में,
बावन बाबा की पुण्यतिथि समारोह में, सुबह से ही भक्तों का आना शुरू हो गया था। समाधि स्थल को फूलों से सजाया गया था। संतों ने बाबा बावन राम जी के जीवन, त्याग, सेवा व साधना के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बाबा ने अपना पूरा जीवन समाज की सेवा और मानव कल्याण में समर्पित कर दिया था। वे गरीबों और जरूरतमंदों के लिए हमेशा मदद को तैयार रहते थे।
अघोरपीठ गोरखपुर से आये छबीले राम बाबा ने इस अवसर पर आयोजित विचार संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए अपने उद्बोधन में कहा कि,अघोरपंथ मानव कल्याण का सबसे प्रमुख और सरल मार्ग है जिसे बावन बाबा ने अपने जीवनकाल में साकार किया।

अघोरपीठ क्रीं कुण्ड वाराणसी के प्रधान व्यवस्थापक अरुण सिंह ने अपने श्रद्धा उद्बोधन में बावन बाबा को महान संत पुरुष बताया और उनके मार्ग पर चलने को कहा।
लालगंज आश्रम के व्यवस्थापक संत रोशन जी ने आये हुए संतो,अनुयाइयों और भक्तों के प्रति आभार ज्ञापित किया एवं अघोरपीठ के द्वारा चलाये गए नेत्र शिविर के लाभार्थियों और गणमान्य अतिथियों को अंगवस्त्रम भेंटकर सम्मानित किया।
अघोरपीठ की सदर शाखा आज़मगढ़ के व्यवस्थापक प्रमोद सिंह ने व्यवस्था संचालन में सहयोग प्रदान किया।
विचारगोष्ठी का संचालन भरथीपुर अघोर आश्रम के व्यवस्थापक लालबहादुर सिंह ने किया।समारोह में,अघोरपीठ की विभिन्न शाखाओं से जुड़े सूर्यनाथ सिंह,के एन सिंह,बृजभान सिंह,रणजीत सिंह,संगीत सिंह,अनीता देवी, संतोष सिंह,डॉ0 पंकज सिंह,दिनेश सैनी,संतोष तिवारी,रोशन प्रजापति, गजराज प्रसाद आदि ने अपना योगदान सुनिश्चित किया।
प्रधान कार्यक्रम में भजन कीर्तन और सत्संग का भी आयोजन हुआ। अंत में भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इस दौरान आश्रम के अनुयायी और ग्रामीण उपस्थित रहे।
