अतरौलिया में अरुण राजभर की बढ़ती सक्रियता से बदल रहे राजनीतिक समीकरण

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आजमगढ़। देउरपुर बाजार स्थित एक मैरेज हॉल में सोमवार को अतरौलिया विधानसभा क्षेत्र के गौण समाज की संगोष्ठी आयोजित हुई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पंचायत राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में अरुण राजभर ने शिरकत की। कार्यक्रम में शामिल होकर नेताओं के विचार सुनने और क्षेत्र के विभिन्न वर्गों के लोगों से बातचीत करने का अवसर मिला। इसके बाद पिछले करीब दो वर्षों से अतरौलिया विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय अरुण राजभर की राजनीतिक स्वीकार्यता को लेकर क्षेत्र में उभर रहे माहौल को समझने का प्रयास किया गया।
करीब दो वर्षों से अतरौलिया विधानसभा क्षेत्र में लगातार जनसंपर्क कर रहे अरुण राजभर को लेकर विभिन्न जाति और आयु वर्ग के मतदाताओं से बातचीत में एक बात प्रमुखता से सामने आई कि अब उन्हें पूरी तरह ‘बाहरी’ नेता के रूप में नहीं देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि लगातार गांव-गांव संपर्क, स्थानीय समस्याओं को उठाने और आम लोगों के बीच मौजूदगी ने अरुण राजभर को क्षेत्र की राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बना दिया है।
क्षेत्रीय लोगों के अनुसार, अरुण राजभर ने अतरौलिया विधानसभा की विभिन्न समस्याओं को लेकर आवाज उठाने के साथ ही आम जनता से सीधा संवाद स्थापित किया है। यही वजह है कि धीरे-धीरे विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच उनकी पहचान मजबूत होती दिखाई दे रही है।
अतरौलिया की राजनीति में लंबे समय से समाजवादी पार्टी के पूर्व मंत्री बलराम यादव और वर्तमान विधायक डॉ. संग्राम यादव का प्रभाव रहा है। लेकिन क्षेत्र में होने वाली चर्चाओं और लोगों की बदलती राजनीतिक सोच से यह सवाल उठने लगा है कि क्या लंबे समय से कायम यह राजनीतिक प्रभाव अब चुनौती के दौर में प्रवेश कर रहा है?
दूसरी ओर, ओमप्रकाश राजभर और उनके पुत्र अरुण राजभर की सक्रियता अतरौलिया के राजनीतिक समीकरणों में नया आयाम जोड़ती दिखाई दे रही है। हालांकि चुनावी राजनीति में अंतिम फैसला मतदाता ही करते हैं, लेकिन वर्तमान गतिविधियों से इतना जरूर संकेत मिलता है कि अरुण राजभर ने अतरौलिया विधानसभा में अपनी राजनीतिक जमीन तैयार करने की दिशा में काफी काम किया है।
अरुण राजभर की कार्यशैली का एक महत्वपूर्ण पहलू उनकी स्थानीय भाषा और बोली में लोगों से संवाद स्थापित करना भी माना जा रहा है। गांव-देहात की चौपाल से लेकर सार्वजनिक कार्यक्रमों तक लोगों की समस्याओं को सुनना और तत्काल समाधान का भरोसा दिलाना उनके जनसंपर्क अभियान का प्रमुख हिस्सा दिखाई देता है। राजनीतिक तौर पर यह संवाद शैली उनकी स्वीकार्यता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
अतरौलिया विधानसभा क्षेत्र में आने वाले समय में अरुण राजभर की सक्रियता और गांव-गांव जनसंपर्क कितना राजनीतिक प्रभाव पैदा करता है, यह देखने वाली बात होगी। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि करीब दो वर्षों की सक्रियता ने उन्हें क्षेत्र की राजनीतिक चर्चाओं में एक उदीयमान चेहरे के रूप में स्थापित कर दिया है।
क्षेत्र में अरुण राजभर की पहचान अब ‘पीला गमछा’ के रूप में भी उभरती दिखाई दे रही है। यह पहचान आने वाले समय में उनके राजनीतिक अभियान का प्रतीक बनती है या नहीं, इसका फैसला भविष्य और अंततः मतदाता करेंगे। लेकिन अतरौलिया की राजनीति में पिता-पुत्र की दो जोड़ियों—बलराम यादव-डॉ. संग्राम यादव तथा ओमप्रकाश राजभर-अरुण राजभर—के बीच बनने वाली राजनीतिक प्रतिस्पर्धा निश्चित रूप से क्षेत्र की राजनीति को दिलचस्प मोड़ दे सकती है।

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