रचनात्मक अर्थव्यवस्था भारत के विकास के अगले मोर्चे के रूप में उभर रही : डॉ. एल. मुरुगन

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सोनीपत। सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री और संसदीय कार्य राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी में “कानून, नीति और रचनात्मक अर्थव्यवस्था” विषय पर आयोजित जिंदल नीति सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में भाग लिया और उद्घाटन भाषण दिया। युवा प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए डॉ. मुरुगन ने विचारों, कल्पना, संस्कृति, नवाचार और बौद्धिक संपदा से प्रेरित भारत की रचनात्मक अर्थव्यवस्था के तीव्र विकास पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि फिल्म, संगीत, गेमिंग, एनिमेशन, डिजाइन, प्रकाशन, विज्ञापन और डिजिटल सामग्री सहित विभिन्न क्षेत्र रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर पैदा कर रहे हैं। डॉ. मुरुगन ने बताया कि रचनात्मक अर्थव्यवस्था वैश्विक जीडीपी में 3.1 प्रतिशत और वैश्विक रोजगार में 6.2 प्रतिशत का योगदान देती है, जिसमें अनुमानित 57 मिलियन भारतीय पहले से ही सांस्कृतिक और रचनात्मक व्यवसायों में कार्यरत हैं। भारत की मीडिया और मनोरंजन अर्थव्यवस्था 2.5 ट्रिलियन रुपये की है। डॉ. मुरुगन ने इस बात पर भी जोर दिया कि रचनात्मक अर्थव्यवस्था के विकास को उचित कानूनी और नीतिगत ढांचों द्वारा समर्थित किया जाना चाहिए, जिसमें कॉपीराइट संरक्षण, रचनाकारों के लिए उचित मुआवजा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का जिम्मेदार उपयोग शामिल है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे मान्यताओं और संस्थाओं पर सम्मान, तर्क और प्रमाण के साथ सवाल उठाएं और 2047 तक एक विकसित भारत के निर्माण में अपने विचारों और कौशल का योगदान दें।

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