तमसा माता की आरती -सुभाष चन्द्र तिवारी ‘कुन्दन ‘

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तमसा माता की आरती

जय तमसा जय तमसा, जय तमसा माता।
आदिकाल से महिमा , धर्म ग्रंथ गाता।।
मांडव ऋषि आश्रम जहँ, उद्गम तट प्यारा।
अवध राज्य से निकली, अति पावन धारा।।
ध्यान दरस तेरा माँ , जन- मन हरषाता l
जय तमसा जय तमसा, जय तमसा माता।।
किये गमन वन को जब,राम लखन सीता।
आये तेरे तट पर , प्रथम दिवस बीता।।
योगी ऋषि- मुनियों को, तेरा जल भाता ।
जय तमसा जय तमसा , जय तमसा माता।।
दत्तात्रेय चन्द्रमा , दुर्वासा आये।
तट पर किये साधना , परम सिद्धि पाये।।
तपोक्षेत्र आर्यमगढ़, तुझसे कहलाता।
जय तमसा जय तमसा, जय तमसा माता।।
कर्मभूमि देवल की , संत रहैं सुख से।।
प्रथम काव्य निकला जहँ , वालमीकि मुख से।
लखनेश्वर डीह रम्य , तीर पर सुहाता।
जय तमसा जय तमसा, जय तमसा माता।।
‘कुन्दन ‘ माँ गंगा में , तेरा जल जाता।
हम सबका तुझसे है, सुत माँ का नाता।।
यह जो करे आरती , वांछित फल पाता।
जय तमसा जय तमसा, जय तमसा माता।।

-सुभाष चन्द्र तिवारी ‘कुन्दन ‘
आजमगढ़।

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