
आज़मगढ़। सूत्रधार संस्थान आज़मगढ़ द्वारा आज शाम रैदोपुर ऑफिसर्स कॉलोनी आनंदमार्ग स्थित भरतमुनी सभागार मे क्रमशः दो नाट्य प्रस्तुतियों का मंचन किया गया। जिसमे पहली प्रस्तुति हरिशंकर परसाईं की व्यंग रचना भोला राम का जीव पर आधारित RIP भोलाराम रही। जिसका नाट्य आलेख अभिषेक पंडित द्वारा तैयार किया गया और निर्देशन राघवेंद्र मिश्र द्वारा किया गया।
नाटक की शुरुआत यमलोक से होती हैँ जहां यमराज (शिवा यादव) और चित्रगुप्त (सत्यम कुमार) परेशान हैँ। कारण मृत्युलोक से भोला राम का जीव लाने जो दूत (सूरज सहगल) गया था वो खाली हाथ ही वापस लौट आया हैँ क्यूंकि भोलाराम की आत्मा रास्ते मे ही कही फरार हो गई हैँ। जिस कारण यमलोक मे स्वर्ग नर्क दिये जाने का काम रुक गया हैँ। तब यमराज की मदद करते हुए नारद जी (गोपाल मिश्रा) धरती पर भोला राम की आत्मा को खोजने आते हैँ। यहाँ वो भोलाराम की विधवा (आरती) से मिलते है तो पता चलता हैँ कि भोलाराम का पेंशन पांच साल से नहीं मिला था, जिस कारण गरीबी झेलते हुए उसकी मृत्यु हो गई।
नारद भोलाराम की पेंशन बहाल करवाने पेंशन आफिस जाते हैँ। जहाँ उनका सामना क्रमशः चपरासी (राहुल यादव) बड़े बाबू (प्रभंश गौतम) बड़े साहब (अरविन्द कुमार पाण्डेय) से होती है, तब उन्हें पता चलता हैँ कि रिश्वत न मिलने के कारण इन लोगो ने भोलाराम की पेंशन बहाल नहीं की हैँ। अंत मे रिश्वत के रूप मे अपनी वीणा देते हैँ तब जाकर भोलाराम की आत्मा पेंशन की फ़ाइल से मुक्त होती हैँ। हास्य व्यंग शैली के इस नाटक की प्रस्तुति ने सभी दर्शकों को लाहालॉट कर दिया। सभी अभिनेताओं ने अपने अपने चरित्रओं का बखूबी निर्वाहन किया। नाटक का संगीत बहुत ही प्रभावशाली रहा जिसका निर्देशन राज शैलेष ने किया। रिदम पर डॉ. अनिल मौर्य का संगत रहा। प्रकाश परिकल्पना सूरज यादव ने किया। मल्टी मीडिया संचालन आदित्य अभिषेक का रहा। कोरस मे अनादि अभिषेक, अर्पिता पाठक, प्रियंका यादव, कौशल कुमार ने उम्दा गायन किया।

इस संध्या की दूसरी प्रस्तुति कोलकाता से आये युवा रंगकर्मी फुलेन्द्र पंडित का एकल अभिनय सूरज रही, जिसका निर्देशन लकी जी गुप्ता ने किया हैँ।। नाटक – ‘सूरज’ की कहानी एक बच्चे के जीवन के इर्द-गिर्द घूमती है। एक सड़क किनारे या रेलवे स्टेशन पे सोने वाला बच्चा, भूखे पेट भी सपना देखता है शिक्षा को पाने का,एक बेहतर कल का,पूरे आसमान को मुठ्ठी में समेटने का…लेकिन फिर वो कैसे समाज का शिकार बन जाता है? इस बच्चे के अंदर एक चमक है जैसे सभी बच्चों की होती है लेकिन, क्या ये वो अपनी चमक ढूंढ पाएगा? इस नाटक की कहानी शिक्षा,समाज,साहस, सपने, दृढ़ संकल्प, परवरिश और अपने चमक को ढूंढने की प्रयास पर प्रकाश डालती है। प्रस्तुति ने दर्शकों को अत्यंत भाव में विभोर का दिया। कोलकाता से आए कलाकार ‘फुलेन्द्र पंडित’ , अब तक इस नाटक का मंचन देश के अलग अलग राज्यों के विभिन्न शहरों के विभिन्न स्कूलों, थियेटरों में प्रस्तुत हुआ है और आज ‘ सूरज’ की 87वीं प्रस्तुति रही।
एकल प्रस्तुति के माध्यम से कलाकार ने मानवीय संवेदनाओं, जीवन के संघर्ष और समाज के विभिन्न पहलुओं को मंच पर प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त किया। सीमित मंच-संसाधनों के बीच कलाकार की अभिनय-ऊर्जा, शारीरिक अभिव्यक्ति और संवाद अदायगी ने प्रस्तुति को जीवंत बनाया।
‘सूरज’ की यह 87वीं प्रस्तुति आज़मगढ़ की नाट्य संध्या में दर्शकों के लिए एक विशेष रंगानुभव रही। आयोजन ने स्थानीय रंगकर्मियों और दर्शकों के बीच रंगमंच की सक्रियता को भी रेखांकित किया। इस अवसर पर जनपद के सुधि रंगप्रेमी दर्शक शामिल हुए।
