
सलेमपुर (देवरिया) राष्ट्रीय समानता दल का 26वां स्थापना दिवस बरठा चौराहा पर लोकतंत्र, संविधान और सामाजिक न्याय बचाने की एकजुटता का संकल्प के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में पार्टी के पदाधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। इस अवसर पर सामाजिक समानता, संवैधानिक अधिकारों, लोकतांत्रिक व्यवस्था और वंचित वर्गों की राजनीतिक भागीदारी को लेकर विचार-विमर्श किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय समानता दल के उत्तर प्रदेश प्रदेश अध्यक्ष संजयदीप कुशवाहा ने कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक मजबूती तभी संभव है, जब समाज के सभी वर्गों को समान अधिकार, सम्मान और सत्ता एवं शासन में भागीदारी मिले। संविधान में निहित सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय के सिद्धांतों को जमीन पर उतारना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय समानता दल अपने स्थापना काल से ही सामाजिक समानता और वंचित समाज के अधिकारों की आवाज उठाता रहा है।
पार्टी के राष्ट्रीय मुख्य महासचिव अगम स्वरूप कुशवाहा ने कहा कि सामाजिक परिवर्तन के लिए लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक विचारधारा के प्रति प्रतिबद्धता जरूरी है। उन्होंने संगठन को मजबूत करने तथा सामाजिक न्याय की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने पर जोर दिया।
कार्यक्रम में कांग्रेस नेता सुनील कुशवाहा ने सामाजिक एकता और लोकतांत्रिक भागीदारी के महत्व पर अपने विचार रखे। समाजवादी पार्टी के अनुसूचित प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष हरेराम आर्य ने कहा कि सामाजिक न्याय की स्थापना के लिए वंचित एवं शोषित वर्गों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक और संगठित होना होगा।
राष्ट्रीय समानता दल के जिला प्रवक्ता श्रवण कुमार पटेल ने संगठन की विचारधारा एवं सामाजिक सरोकारों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जिला अध्यक्ष विजय कुमार ने सभी अतिथियों और कार्यकर्ताओं का स्वागत करते हुए संगठन की एकजुटता और विस्तार का आह्वान किया।
स्थापना दिवस के अवसर पर उपस्थित लोगों ने लोकतंत्र की रक्षा, संविधान की मूल भावना, सामाजिक समानता और वंचित समाज की राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम का समापन सामाजिक न्याय, लोकतांत्रिक अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता दोहराते हुए किया गया।कार्यक्रम का संचालन अभय कुमार ने किया सैकड़ो लोग उपस्थित रहें।
