सच्ची आज़ादी के मायने क्या है?

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मिथिलेश सिंह

हमारा देश पंद्रह अगस्त सन 1947 को अंग्रजों की गुलामी से आज़ाद हुवा, इस आज़ादी को प्राप्त करने के लिए अनगिनत क्रांतिकारियों ने अपने जान की बाज़ी लगायी, बहुतेरों ने अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा जेल की काल कोठरी में गुजारी और अनेकों यातनाये झेली। ऐसे में सबसे महत्वपूर्व प्रश्न यह है कि आखिर सच्ची आज़ादी के मायने क्या है और इसे सच्चे अर्थों में इसे जानना जरूरी क्यों है। आज़ादी के जिन परवानो ने अपने जान की बाज़ी लगाकर हमें आज़ाद कराया और अपना बलिदान दिया सच्चे मायने में वो हमारे राष्ट्र के देश भक्त थे और जब तक देश भक्ति हमारे मन मष्तिस्क में नहीं बैठेगी तब तक हम बलिदान देने वालों क्रांतिकारियों के मनोभाव और योगदान को समझ ही नहीं पायंगे। देश भक्ति केवल तिरंगा फहराने भर या फिर कोई भी गीत गाने से नहीं आएगी, देशभक्ति का सच्चा अर्थ तभी है जब युवा शिक्षित होगा, संस्कारी होगा, समाज और राष्ट्र के प्रति उसे अपने दायित्व का उसे बोध होगा। सच्ची आज़ादी का अर्थ है राष्ट्र के सबसे निचले पायदान के व्यक्ति को भी आगे बढ़ने और प्रगति करने का सामान अवसर प्राप्त हो और लोकतंत्र की विसंगतियों को समय रहते दूर किया जाये जिससे एक आम आदमी को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, जनसुनवाई और न्याय का सामान अवसर उपलब्ध हो।

आईये सच्ची आज़ादी कैसे प्राप्त होगी उसके कुछ सूत्र जाने :

1. राष्ट्र निर्माण के कार्य में हर व्यक्ति का कोई न कोई योगदान जरूर होना चाहिए, जिससे देश की तरक्की निरंतर जारी रहे। और सच्चे मायने में हम विश्वगुरु बन सके।
2. शिक्षित, योग्य, ईमानदार और दूरदर्शी नेता को अपना वोट बिना किसी स्वार्थ और प्रलोभन के देना चाहिए वो भी धर्म, जाति और परिवारवाद के मकड़जाल से बाहर निकलते हुवे।
3. सरकारी अध्यापकों को सरकारी अन्य कार्यों से मुक्ति, अध्यापक का कार्य केवल और केवल शिक्षा देना ही होना चाहिए। जब अध्यापक शिक्षा पर ध्यान देगा तभी राष्ट्र का निर्माण होगा।
4. देश के राष्ट्रपति को चयन करने के लिए उचित योग्यता और मापदंड होना चाहिए और कम से कम वो व्यक्ति भारत रत्न के समक्ष स्तर का जरूर होना चाहिए।
5. सैनिको के भर्ती की पुरानी व्यवस्था बहाल होनी चाहिए नयी व्यवस्था जो कि अग्निवीर के तहद हैं देश को योग्य और सक्षम सैनिक देने के लिए सही नहीं हैं।
6. न्याय पालिका को और चुस्त दुरुस्त बनाने के लिए जुडिशरी रिफार्म किये जाने कि जरूरत हैं जिससे न्याय व्यवस्था से परिवारवादी कब्ज़ा दूर किया जा सके।
7. शिक्षा केवल किताबी ज्ञान तक सिमित नहीं होनी चाहिए इसे और व्यावहारिक और रोजगारपरक बनाये जाने कि जरूरत हैं यह तभी संभव हैं जब योग्य लोग व्यवस्था निर्माण के हिस्सा बनेगे।
8. कोई भी व्यक्ति प्रधानमंत्री बनने से पहले कम से कम दस साल तक किसी भी राज्य का मुख्यमंत्री रहा हो या फिर दस साल तक केंद्रीय कैबिनेट में कैबिनेट मिनिस्टर रहा हो। ऐसी व्यवस्था स्थापित किये जाने कि जरूरत है।
9. आम आदमी को राइट तो रिकॉल और राइट तो रिजेक्ट का अधिकार दिए जाने की जरूरत हैं जिससे उसका अधिकार केवल पांच साल में वोट देने तक ही सिमित न रहे।
10. चुनाव आयोग की नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त पैनल द्वारा किया जाना चाहिए, जिससे देश के चुनाव निष्पक्ष और भेदभाव मुक्त होने चाहिए, सभी पार्टी और उम्मीदवार को चुनाव के समय सामान अवसर उपलब्ध होने चाहिये।

जिस प्रकार से आज़ादी के इतने वर्षों के बाद लोकतान्त्रिक संस्थाएं कमजोर हुयी हैं और देश के आम आदमी के अधिकार सिमित हुवे हैं वो कही से भी देश को आज़ाद करने वाली महान आत्माओं को सुकून नहीं देता हैं इसलिए लोकतंत्र को मजबूत किये जाने की जरूरत हैं जिससे देश का लोकतंत्र मजबूत हो तभी सच्ची आज़ादी का सच्चा अर्थ है। देश का हर एक जरूरक नागरिक मेरी बातों से सहमत होगा और अगर आप सहमत नहीं हैं तो कहीं से भी देश द्रोही या फिर दिमागी नक्सली नहीं हैं। जय हिन्द, जय भारत!

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