मिहींपुरवा/बहराइच। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सुजौली में पिछले चार दिनों से बकाया वेतन को लेकर चल रहा धरना प्रदर्शन आखिरकार शनिवार को समाप्त हो गया, पीएचसी में तैनात डॉक्टर रामपाल सिंह जो अपनी 11 महीने की सैलरी में से 7 महीने की सैलरी बकाया होने से नाराज होकर धरने पर बैठे थे, उनका धरना थाना प्रभारी सुजौली राम गोविन्द वर्मा और सहायक शोध अधिकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मिहींपुरवा अनुराग पाठक ने जूस पिलाकर समाप्त कराया, गौरतलब है कि डॉक्टर रामपाल सिंह एक महीने के भीतर दूसरी बार धरने पर बैठे थे, इससे पहले 5 सितंबर को भी उन्होंने अपनी बकाया सैलरी के भुगतान को लेकर धरना दिया था, उस दौरान मौके पर पहुंचे सीएचसी मोतीपुर के अधीक्षक महेश विश्वकर्मा ने उनसे बातचीत कर धरना समाप्त कराया था और आश्वासन दिया था कि उनकी चार महीने की सैलरी खाते में भेज दी गई है तथा शेष सात महीने की बकाया सैलरी का भुगतान एक सप्ताह के भीतर कर दिया जाएगा, लेकिन विभाग द्वारा दिए गए एक सप्ताह के आश्वासन को 12 दिन बीत जाने के बाद भी सात महीने की बकाया सैलरी उनके खाते में नहीं पहुंची, जिससे नाराज होकर उन्होंने विभाग को सूचित करने के बाद पीएचसी परिसर में दोबारा धरना शुरू कर दिया था, चार दिनों तक धरना चलने के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए शनिवार को सीएचसी अधीक्षक महेश विश्वकर्मा ने बताया कि डॉक्टर रामपाल सिंह की बकाया सैलरी 6 लाख 84 हजार 936 रुपये उनके खाते में डाल दी गई है और यह प्रोसेस में है जो मंगलवार तक पहुंच जाएगी, अधीक्षक के इस आश्वासन और थाना प्रभारी राम गोविन्द वर्मा के समझाने-बुझाने के बाद डॉक्टर धरना समाप्त करने के लिए राजी हुए, हालांकि धरना समाप्त करते समय डॉक्टर रामपाल सिंह ने शर्त रखी कि यदि इस सप्ताह के अंदर उनकी पूरी बकाया सैलरी खाते में नहीं आती है तो वह पुनः धरने का रास्ता अपनाएंगे और तब तक धरना जारी रखेंगे जब तक पूरा भुगतान नहीं हो जाता, डॉक्टर ने बताया कि जिला मुख्यालय से 120 किलोमीटर दूर वन्यजीव क्षेत्र में 24 घंटे ड्यूटी करने के बाद भी समय पर वेतन न मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है, धरना समाप्त होने के बाद पीएचसी में स्वास्थ्य सेवाएं फिर से सामान्य हो गई हैं।
