प्रयागराज /वर्तमान में उनकी पहचान क्या है सरदार पतविन्दर सिंह नैनी के निवासी हैं और भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा काशी क्षेत्र के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष हैं। पिछले 36 वर्षों से मतदाता जागरूकता, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण जैसे अभियानों के लिए जाने जाते हैं।यदि ऐसे जमीनी कार्यकर्ता को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाता है तो 2027 विधानसभा चुनाव के लिए 4 बड़े संदेश जाएंगे:अल्पसंख्यकों में भाजपा की गहरी पैठ का संदेश: भाजपा पर अक्सर सिख और अल्पसंख्यक विरोधी होने का आरोप लगता है। एक पगड़ीधारी सरदार जी को प्रदेश की कमान देना सीधा संदेश होगा कि भाजपा सबका साथ, सबका विश्वास को सिर्फ नारा नहीं, संगठन में लागू कर रही है। UP में आनंद कारज विवाह अधिनियम लागू होने पर उन्होंने सरकार का आभार भी जताया था, इससे सिख समाज में पकड़ मजबूत होगी।कार्यकर्ता से अध्यक्ष – जमीनी नेता को इनाम-वे बड़े परिवार से आयातित नेता नहीं हैं। नंगे पांव घूमकर वोट के लिए जागरूक करना, संगम तट पर प्ले-कार्ड लेकर स्वच्छता की भीख मांगना-ये उनकी छवि है। इससे संदेश जाएगा कि 2027 में भाजपा हाईकमान दिखावे वाले नेताओं नहीं,365 दिन जमीन पर काम करने वाले कार्यकर्ता को तरजीह देगी।
2027 में पूर्वांचल निर्णायक होगा। काशी क्षेत्र भाजपा का सबसे मजबूत गढ़ है। वहाँ के अल्पसंख्यक मोर्चा के चेहरे को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर भाजपा पूर्वांचल के साथ-साथ प्रयागराज, वाराणसी, मिर्जापुर मंडल के बूथ स्तर तक संगठन को चार्ज कर सकती है।
सपा-कांग्रेस गठबंधन 2027 में संविधान और अल्पसंख्यक खतरे में है का नैरेटिव बनाएगा। एक सिख चेहरे को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर भाजपा उस नैरेटिव को बहुत पहले ही न्यूट्रल कर देगी, खासकर पश्चिमी UP के किसान और तराई के सिख वोटरों में।संक्षेप में-ये फैसला भाजपा को एक तरफ सिख समाज, अल्पसंख्यक मोर्चा और पूर्वांचल में विस्तार देगा, तो दूसरी तरफ ये दिखाएगा कि भाजपा 2027 का चुनाव हिंदुत्व एवं समावेशिता दोनों के संतुलन पर लड़ना चाहती है।
