मिहींपुरवा/ बहराइच। पिछले तीन दिनों से उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में हो रही लगातार मूसलाधार बारिश ने आम जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। लखनऊ, बहराइच, श्रावस्ती, लखीमपुर खीरी, गोंडा, बाराबंकी, सीतापुर समेत तराई और पूर्वांचल के जिलों में लगातार बरसात हो रही है। नदियां उफान पर हैं और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई है। इसी आफत की बारिश ने जनपद बहराइच के मिहींपुरवा विकास खंड की ग्राम पंचायत बड़खड़िया के मजरा मौरहवा में गरीबों पर कहर बरसाया है, जहां छह कच्चे मकान भरभरा कर गिर गए। मिली जानकारी के अनुसार मौरहवा गांव में पुष्पा पत्नी रमायन, सुनीता पत्नी वीरेंद्र, सरिता पत्नी दिनेश, संगम पुत्र विदेशी, कलावती पत्नी राम निवास और गुड्डी पत्नी जंगली प्रसाद के कच्चे घर तीन दिन की लगातार बारिश नहीं झेल पाए। दीवारें पानी सोखने से कमजोर हो गईं और देखते ही देखते भरभरा कर गिर गईं। हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन घरों में रखा अनाज, कपड़े, बर्तन और अन्य गृहस्थी का सामान मलबे में दबकर पूरी तरह बर्बाद हो गया। अब ये छह परिवर खुले में रहने को मजबूर है पीड़ित परिवारों और ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले पांच साल के कार्यकाल में ग्राम प्रधान और जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पात्र गरीबों को आवास नहीं दिया गया वास्तविक गरीब आज भी कच्ची झोपड़ियों में रहने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इन परिवारों को पक्के आवास मिल गए होते तो आज उन्हें यह दिन नहीं देखना पड़ता।
सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि मौरहवा गांव घने जंगल और कतर्नियाघाट वन्य जीव प्रभाग से सटा हुआ है। यहां शाम ढलते ही जंगली जानवरों का खतरा बढ़ जाता है। ग्रामीणों के अनुसार क्षेत्र में तेंदुए की चहलकदमी देखी जाती है। ऐसे में छोटे-छोटे बच्चों के साथ खुले में रात गुजारना बेहद जोखिम भरा है। पीड़ितों ने बताया कि वे रात भर जागकर लाठी-डंडे के सहारे पहरा देने को मजबूर हैं।ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, उपजिलाधिकारी मिहींपुरवा और खंड विकास अधिकारी से मांग की है कि तत्काल मौके पर राजस्व और आपदा टीम भेजकर नुकसान का सर्वे कराया जाए, पीड़ितों को आपदा राहत राशि, और प्राथमिकता के आधार पर आवास आवंटित किया जाए। साथ ही वन विभाग की गश्त बढ़ाई जाए ताकि जंगली जानवरों से इन परिवारों की सुरक्षा हो सके।
