स्माइल ट्रेन फाउंडेशन के सहयोग से कटे होंठ व तालु की हुई सफल सर्जरी।
पथरदेवा (देवरिया)। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पथरदेवा क्षेत्र में जन्मजात बीमारी से पीड़ित दो बच्चों को चिन्हित कर उनके निश्शुल्क उपचार की राह आसान की। आरबीएसके टीम के प्रयास और स्माइल ट्रेन फाउंडेशन के सहयोग से दोनों बच्चों के कटे होंठ व तालु की सफल सर्जरी कराई गई। उपचार के बाद बच्चों के चेहरे पर मुस्कान लौट आई है।
पथरदेवा ब्लाक में आरबीएसके के तहत चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों की दो टीमें तैनात हैं। दोनों टीमें गांवों में भ्रमण कर आंगनबाड़ी केंद्रों, प्राथमिक विद्यालयों व अन्य शिक्षण संस्थानों में बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण करती हैं। इसी क्रम में टीम बी ने एक जून को पचुरुखिया गांव के आंगनबाड़ी केंद्र पर स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान दो वर्षीय रिद्धि को चिन्हित किया। रिद्धि जन्म से ही क्लेफ्ट लिप एंड पैलेट (कटे होंठ व तालु) की समस्या से पीड़ित थी।
आरबीएसके टीम ने बच्ची के पिता धनंजय कुमार को स्माइल ट्रेन फाउंडेशन के सहयोग से गोरखपुर में निश्शुल्क उपचार की जानकारी दी। टीम के सहयोग से परिजन रिद्धि को गोरखपुर स्थित सावित्री अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने आवश्यक जांच की। इसके बाद एक जुलाई 2026 को विशेषज्ञ सर्जन ने रिद्धि के कटे होंठ व तालु की सफल सर्जरी की।
इसी तरह आरबीएसके टीम ए ने पथरदेवा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की ओपीडी के दौरान कोयरपट्टी निवासी दीपक कुमार के नौ माह के बेटे सौमिक को चिन्हित किया। सौमिक भी जन्म से कटे होंठ व तालु की समस्या से पीड़ित था। टीम के सहयोग से उसे 27 जुलाई को गोरखपुर के सावित्री अस्पताल भेजा गया। वहां चिकित्सकों ने आवश्यक जांच के बाद सितंबर में सर्जरी के लिए बुलाया। 17 सितंबर को सौमिक की भी कटे होंठ व तालु की सफल सर्जरी की गई।
सफल उपचार के बाद दोनों बच्चों के चेहरे पर मुस्कान लौटने से उनके स्वजन काफी खुश हैं। परिजनों ने आरबीएसके टीम, चिकित्सकों और सरकार की जनकल्याणकारी योजना के प्रति आभार जताया।
प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. प्रभात रंजन ने बताया कि दोनों बच्चों की सर्जरी कराने में आरबीएसके टीम के डॉ. धनंजय कुमार, फार्मासिस्ट मनोज गुप्ता, एएनएम संजू देवी और फार्मासिस्ट इंजल आलम का विशेष सहयोग रहा। उन्होंने कहा कि जन्मजात बीमारियों से पीड़ित बच्चों की पहचान कर उन्हें बेहतर उपचार दिलाना आरबीएसके का प्रमुख उद्देश्य है।
आरबीएसके के नोडल अधिकारी डॉ. कार्तिकेय पाण्डेय ने बताया कि जिले के 16 ब्लाकों में कुल 32 आरबीएसके टीमें कार्यरत हैं। प्रत्येक ब्लाक में दो टीमें तैनात हैं। ये टीमें आंगनबाड़ी केंद्रों, प्राथमिक विद्यालयों और माध्यमिक विद्यालयों में भ्रमण कर बच्चों के स्वास्थ्य की जांच करती हैं। जांच के दौरान गंभीर या जन्मजात बीमारी से पीड़ित बच्चों को चिन्हित कर उन्हें उपचार के लिए उच्च स्वास्थ्य केंद्रों पर भेजा जाता है।
