सालाना 8 से 10 लाख रुपये की आय अर्जित कर रहीं वंदना मिश्रा, 67 महिलाओं ने शुरू किया अपना रोजगार।
देवरिया। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) से जुड़कर ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं। देसही देवरिया ब्लॉक के शामपुर टीला टाली गांव की वंदना मिश्रा ने स्वयं सहायता समूह से मिले 50 हजार रुपये के ऋण से सिलाई व्यवसाय शुरू किया। आज वह न केवल सालाना आठ से दस लाख रुपये की आय अर्जित कर रही हैं, बल्कि करीब 350 महिलाओं को सिलाई और व्यवसाय का प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार की राह भी दिखा चुकी हैं।
अम्बे महिला आजीविका स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष वंदना मिश्रा ने ऋण की धनराशि से सिलाई मशीन, कच्चा माल और अन्य जरूरी सामान खरीदा। इसके बाद उन्होंने ‘संगीता पूर्वांचल सिलाई घर’ के नाम से अपना व्यवसाय शुरू किया और धीरे-धीरे इसे आजीविका का मजबूत साधन बना लिया।
वंदना अपने व्यवसाय के तहत बैग, स्कूल बैग, पाउच, फोल्डर, डायरी कवर, लैनयार्ड और स्क्रंची सहित कपड़े से बने कई उपयोगी उत्पाद तैयार करती हैं। खास बात यह है कि कपड़ों की बची हुई कतरन का भी पुनः उपयोग कर उपयोगी और पर्यावरण के अनुकूल उत्पाद बनाए जाते हैं।
वंदना मिश्रा के अनुसार, अब तक करीब 350 महिलाओं को सिलाई और व्यवसाय से संबंधित प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इनमें से 67 महिलाएं अपना रोजगार शुरू कर चुकी हैं। वहीं, उनके व्यवसाय से 21 महिलाओं की आजीविका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हुई है। इस पहल से महिलाओं को हुनर सीखने, स्वरोजगार अपनाने और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का अवसर मिल रहा है।
वंदना ने बताया कि वह अपने व्यवसाय से सालाना लगभग आठ से दस लाख रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। उन्होंने स्वयं सहायता समूह और उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के प्रति आभार जताते हुए कहा कि समूह से मिले आर्थिक सहयोग और प्रोत्साहन ने उन्हें उद्यमी बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अब वह दूसरी महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाने के साथ कपड़ों की कतरन के पुनः उपयोग के जरिए पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे रही हैं।
