गुवाहाटी। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को बताया कि गोलाघाट, होजाई और नगांव जिलों में हाल के बुलंद निदान अभियान (eviction drives) के दौरान राज्य सरकार ने कुल 638 हेक्टेयर से अधिक अवैध अतिक्रमण मुक्त कराया। इन अभियानों के तहत लगभग 1,000 परिवारों को संरक्षित क्षेत्रों और वन भूमियों से हटाया गया।मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि प्रशासन ने तीनों जिलों में बड़ी संख्या में जमीन पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ सक्षम कार्रवाई की। उन्होंने लिखा कि “रुद्र रूप” से कार्रवाई कराकर अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई और राज्यहित की रक्षा हेतु यह आवश्यक कदम उठाया गया। उन्होंने आगे कहा कि सरकार राज्य के हितों की रक्षा के लिए इसी तरह के कदम जारी रखेगी। अधिकारियों ने बताया कि ये अभियान पिछले सप्ताह संचालित किए गए और इनमें विशेष रूप से वन भूमि व संरक्षित क्षेत्रों में हुए अतिक्रमणों को हटाने पर ध्यान केंद्रित किया गया। अभियान के दौरान जिन क्षेत्रों में कब्जा हटाया गया, उन्हें पुनःसंज्ञेय किया गया और भूमि की स्थिति का अभिलेख तैयार किया गया। अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई कानून व नियमों के तहत और पर्यावरण-संरक्षण संबंधी प्रावधानों को ध्यान में रखकर की गई। सरकार ने कहा है कि सार्वजनिक भूमि की सुरक्षा और संरक्षण असम की प्राथमिकता है, और अवैध अतिक्रमणों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया जा रहा है। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि अतिक्रमण हटाने में शामिल परिवारों के पुनर्वास व वैकल्पिक व्यवस्थाओं के लिए आवश्यक प्रक्रियाएँ और सहायता उपलब्ध कराई जाएगी जहाँ लागू होगा। साथ ही भूमि के वास्तविक अधिकारों और संवेदनशील पर्यावरणीय क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आगे कदम उठाए जाएंगे। स्थानीय प्रशासन ने मीडिया को बताया कि अभियान के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा बल तैनात रहे और कार्रवाई शांतिपूर्ण तरीके से सम्पन्न कराई गई। न्यायिक आदेशों और सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर चिन्हित अवैध कब्जाधारियों पर ही कार्रवाई की गई। राज्य सरकार के इन हालिया कदमों पर मतभेद और समर्थन दोनों समाजिक प्रतिमानों में देखे जा रहे हैं; कुछ स्थानीय निवासी और अधिकारकर्मी पुनर्वास तथा पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं, जबकि सरकार का कहना है कि सार्वजनिक भूमि की रक्षा तथा वन-संरक्षण के लिए यह आवश्यक कदम था।
