
गुवाहाटी। असम के ब्रह्मपुत्र नदी पर बनने वाला 6.812 कि.मी. का महत्त्वाकांक्षी माजुली –जोरहाट लिंक ब्रिज सुचारू रूप से निर्माणाधीन है और अब तक लगभग 36 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। यह परियोजना SPS Construction India Pvt Ltd (पूर्व में SP Singla) द्वारा निभायी जा रही है और इसे दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।परियोजना में नदी के मिजाज और भौगोलिक जटिलताओं को ध्यान में रखते हुए अत्याधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। कुल 71 फाउंडेशन बनाये जा रहे हैं, जिनमें से 40 विशेष वेल फाउंडेशन ब्रह्मपुत्र की बड़ी और बदलती धारा को ध्यान में रखकर बनाए जा रहे हैं। वर्तमान में सभी फाउंडेशन और पिलरों का कार्य चल रहा है, मगर मुख्य नदी चैनल में उच्च जलस्तर के कारण कुछ फाउंडेशन का कार्य रोका हुआ है। अधिकारियों के अनुसार जलस्तर घटने और विशेष बार्ज आने पर अक्टूबर माह के भीतर मुख्य नदी में भी काम शुरू हो जाएगा। दखिनपट कैंप, माजुली में PSC बॉक्स सेगमेंट्स के कास्टिंग का काम पहले से ही चल रहा है, जबकि जोरहाट पक्ष पर सेगमेंट कास्टिंग नवंबर में शुरू होने की योजना है। इंतज़ार है कि सेगमेंट लॉन्चिंग भी नवंबर से माजुली साइड पर शुरू हो सके। ब्रिज से जुड़ी सड़कों का निर्माण भी राष्ट्रीय राजमार्ग मानकों के अनुरूप जारी है। दखिनपट से कमलबाड़ी तक लगभग 11.7 कि.मी. की यह सडक और हाथिशिला से जोरहाट तक करीब 7.8 कि.मी. की सड़क निर्माण प्रगति पर है। परियोजना का क्रियान्वयन राज्य लोक मार्ग विभाग (PWD) के करीबी प्रशासनिक निरीक्षण में चल रहा है तथा राज्य सरकार और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के बीच उच्च स्तर समन्वय से इसे समयबद्ध रखने का प्रयास जारी है।मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा को परियोजना के पुनः जल्द शुरू होने और तेजी से संसाधन जुटाने में विशेष श्रेय दिया गया है। वहीं PWD (रोड्स एण्ड बिल्डिंग्स) विभाग और परियोजना प्रशासनिक नेतृत्व, जिसमें विशेष सचिव व आयुक्त राज चक्रवर्ती भी शामिल हैं, उन्हें बार-बार निरीक्षण और सक्रिय निगरानी के लिए सराहा गया है। इसके अतिरिक्त, NH-715K लिंक (कमलबाड़ी से उत्तर लखीमपुर तक) को लेकर केंद्र सरकार के समक्ष प्रस्ताव विचाराधीन है; इसकी timely मंजूरी से NH-15 व NH-715 के समानांतर ब्रिजों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी और उत्तर लखीमपुर से जोरहाट का यात्रा दूरी वर्तमान 250–300 किमी से घटकर लगभग 63 किमी रह सकती है। परियोजना के पूरी होने पर माजुली — जो विश्व के सबसे बड़े नदी द्वीपों में से एक है — और जोरहाट के बीच सीधा, विश्वसनीय मार्ग बन जाएगा। इससे दैनिक आवागमन, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएँ, आपातकालीन सेवाएँ, कृषि व हस्तशिल्प के बाजार पहुँच और पर्यटन में वृद्धि की उम्मीद है। राज्य सरकार स्थानीय समुदायों तक लाभ पहुँचाने के लिए परिवहन कड़ियाँ और बाज़ार आधारभूत संरचना भी विकसित करेगी। अधिकारियों का कहना है कि ब्रह्मपुत्र की बदलती धाराओं, जटिल मिट्टी स्थितियों और मौसमी बाढ़ जोखिमों का समाधान सुरक्षित इंजीनियरिंग उपायों और कड़े गुणवत्ता मानकों के साथ ब्रिज का निर्माण किया जा रहा है।
