गुवाहाटी। असम के एकत्रीकृत हाईस्कूल व उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत वे इंटरमीडिएट शिक्षक-शिक्षयित्री, जिनके पास एम.ए., बी.ए. और बी.एड. जैसी उन्नत शैक्षिक योग्यताएँ हैं, उनके पदों को हाईस्कूल या उच्चतर माध्यमिक स्तर पर पदोन्नत किए जाने की मांग सदौ असम शिक्षक कर्मचारी परिषद ने उठाई है। परिषद ने कहा है कि लंबे समय से ये शिक्षक उच्च कक्षाओं में पढ़ा रहे हैं, बावजूद इसके उनके पदोन्नयन के लिए आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई अब तक नहीं की गई है।परिषद ने बताया कि माध्यमिक शिक्षा विभाग ने 17 नवंबर, 2017 को पत्र संख्या DIS/Amalgamation/59/2016/Part/147 के माध्यम से उन विद्यालयों को एकत्रित करने के निर्देश जारी किए थे जो एक ही चौहद्द में स्थित थे। इस निर्देश के आधार पर 2017 में राज्य के कई जिलों में प्राथमिक (एल.पी.), मिडिल इंग्लिश (एम.ई.), हाईस्कूल और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों का एकत्रीकरण किया गया था। एकत्रीकरण के बाद एक ही परिसर में विभिन्न स्तरों की कक्षाएँ संचालित होने लगीं।परिषद का कहना है कि एकत्रीकरण के बावजूद कई विद्यालयों में छात्र‑छात्राओं की संख्या और कक्षाओं के अनुरूप आवश्यक शिक्षकों की कमी बनी हुई है। इसके साथ ही, एकत्रीकरण से पहले भी कई एल.पी. और एम.ई. विद्यालयों में कार्यरत कुछ शिक्षकों के पास एम.ए., बी.ए. और बी.एड. जैसी उच्च योग्यताएँ मौजूद थीं। एकत्रीकरण के बाद ये योग्य शिक्षक उच्चतर कक्षाओं में पढ़ा रहे हैं और शैक्षिक हित में अपनी जिम्मेदारियाँ निभा रहे हैं। इसके बावजूद उनकी पदोन्नति तथा पदों का समुचित दर्जा दिलाने के दिशा में सरकार द्वारा अब तक ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं, जिसे परिषद ने गंभीरता से उठाया है। सदौ असम शिक्षक कर्मचारी परिषद ने मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा और शिक्षा मंत्री डॉ. रणोज पेगू का ध्यान इस ओर आकर्षित कराते हुए आग्रह किया है कि सरकार इन शिक्षकों के पदों के विषय में संवेदनशीलता दिखाकर शीघ्र आवश्यक नीतिगत एवं प्रशासनिक प्रावधान करे। परिषद ने यह भी कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि संबंधित शिक्षक-शिक्षयित्री अपने न्यायसंगत अधिकारों और वेतन-वर्गीकरण से वंचित न रहें। परिषद का तर्क है कि योग्य शिक्षकों का पदोन्नयन न केवल उनकी प्रतिभा और योग्यताओं के अनुरूप न्याय होगा, बल्कि एकत्रीकृत विद्यालयों में पढ़ाई की गुणवत्ता और शिक्षण संसाधनों के बेहतर उपयोग में भी मदद करेगा। परिषद ने सरकार से शीघ्र समाधान की मांग करते हुए कहा है कि इस दीर्घकालिक और जायज़ मांग को प्राथमिकता दी जाए। अंत में परिषद ने आशा व्यक्त की है कि राज्य सरकार व शिक्षा विभाग इस विषय की गंभीरता को समझते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश और प्रशासनिक कदम उठाएंगे, ताकि वर्षों से चली आ रही इस समस्या का संतोषजनक समाधान मिल सके।
