बाजारों में रौनक और शुभ-लाभ के भाव!

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बाजारों में रौनक और शुभ-लाभ के भाव!

बाजारों में रौनक आई, दीपों का त्योहार है,
शुभ-लाभ और स्वागत के बढ़ गए भाव हैं।
कभी दस रुपये में मिलें थे, मंगल के संदेश,
कीमत सुन सोच रहा, आम आदमी विशेष।

स्वागत करना महँगा, शुभ-लाभ भी महँगा,
महँगाई ने कर दिया है, हर उत्सव को तंगा!
लक्ष्मीजी के चरणों का हैं, बढ़ गया बाजार,
पूजा से पहले जेब टटोले, हरेक दुकानदार।

शंख, स्वास्तिक व कलश, सभी के दाम बढ़े,
खुशियों के इस पर्व में, बजट के पहिए अड़े।
तीन दिनों का बाजार हुआ, 5 दिनों से कम,
खरीदार की जेब में पैसा, दुकानदार को गम।

तीस फीसदी दाम बढ़े हैं, ग्राहक हुआ उदास,
बिक्री की उम्मीदों पर भी, पड़ने लगी है घास।
शुभ-लाभ के खेल में, लाभ किसे मिल पाए?
शुभ की आशा लें ग्राहक, खाली हाथ न जाए।

लक्ष्मी पूजा तभी सफल, जब मन में हो प्यार,
अब मंगल के प्रतीकों को ना बनाओं व्यापार।
दीप जलें हर घर-आँगन, खुशियों की बरसात,
महँगे शुभ-लाभ से बेहतर, ‘सस्ती’ हो सौगात।

संजय एम तराणेकर
(कवि, लेखक व समीक्षक)
इन्दौर-452011 (मध्य प्रदेश)
मो. 98260 25986

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