हैं आधार हमारे पूर्वज

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हैं आधार हमारे पूर्वज

हैं आधार हमारे पूर्वज।
आँखों के हैं तारे पूर्वज।
जीवन को जो सही दिशा दे,
वो पतवार हमारे पूर्वज।।
खुश होते जो हमें बढ़ाकर।
दया क्षमा करुणा रत्नाकर।
सुत के कल की सुखद कामना,
आशीर्वाद-अमिय बरसाकर।।
आँचल ममता का फैलाये।
बनकर माँ-पितु पूर्वज आये।
निज का भी न्योछावर करके,
सम्बल बन जीवन में छाये।।
गुरु बनकर आचार बताये।
परम्परा संस्कार बताये।
जीवन सुखमय रहने के ये,
अपने मधुर विचार बताये।।
ये हैं पालनहार हमारे।
जीवन के शृंगार हमारे।
वंश वृक्ष की जड़ हैं पूर्वज,
ये ही हैं करतार हमारे।।
यही तीर्थ उत्कर्ष हमारे।
अर्थपूर्ण संघर्ष हमारे।
इनका आदर धर्म हमारा,
पूर्वज हैं आदर्श हमारे।।

-सुभाष चन्द्र तिवारी ‘कुन्दन’
आजमगढ़।

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