सत्य अकेला कोने में मौन खड़ा है
पर झुठे के घर पे लगी आज मेला है
बेईमानों से सज गई है ये राजदरबार
सब करते हैं जालिमों की जय जयकार
सत्य अकेला कोने में मौन खड़ा है
पर हैवानों के संग संग हजारों चेला है
ये है कलियुग की नई नई कुविचार
गद्दारों के घर पे रोशनी से है उजियार
सत्य अकेला कोने। में मौन खड़ा है
पर शैतानों की गली में हुड़दंग का खेला है
फिर भी जग वाले ना करता इन पे विचार
जालिमों से भरी पड़ी है ये जग संसार
सत्य अकेला कोने में मौन खड़ा है
पर गुण्डे मवाली का हर मोड़ पे डेरा है
गरीबों पे हो रही है नित्य ही अत्याचार
फिर भी जालिमों के पीछे खड़े हैं हजार
सत्य अकेला कोने में मौन खड़ा है
फिर भी पापी अधम के साथ सब अड़ा है
घटिया राजनीति की बह रही है अब बयार
कौन करेगा इनके डर से इनका तिरस्कार
-उदय किशोर साह
मो० पो०-जयपुर जिला-बांका बिहार।
