सोनीपत। पद्मश्री से सम्मानित हरियाणा के प्रख्यात साहित्यकार एवं लेखक डा. संतराम देशवाल ने कहा कि मौजूदा समय में साक्षरता केवल पढ़ने और लिखने की क्षमता तक सीमित नहीं है। यह व्यक्ति को अपने अधिकारों को समझने, सही निर्णय लेने, रोजगार के अवसर हासिल करने और समाज में सक्रिय भूमिका निभाने में सक्षम बनाती है। आज के डिजिटल दौर में साक्षरता का अर्थ भी लगातार व्यापक हो रहा है। बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन सेवाओं, स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल के दौर में डिजिटल एवं सूचना साक्षरता का महत्व तेजी से बढ़ा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के विस्तार ने इसमें एक नया आयाम जोड़ दिया है, जहां तकनीक के साथ-साथ उसकी विश्वसनीयता और सीमाओं को समझना भी जरूरी हो गया है।वे पूर्ण मूर्ति विद्यापीठ, कामी रोड में एनएसएस इकाई की ओर से अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित गोष्ठी को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। डा. संतराम देशवाल ने गोष्ठी का शुभारंभ संस्था के चेयरमैन डा. विजयपाल नैन, सचिव गौतम नैन, कोषाध्यक्ष भोपाल सिंह, प्रबंध निदेशक कपिल भाटिया, एमडी इंजी. संघदीप शाक्य, डायरेक्टर एकेडेमिक्स डा. स्वीटी, कैंपस डायरेक्टर कुलदीप, रजिस्ट्रार कंवलजीत सिंह संधू, पूर्ण मूर्ति कॉलेज ऑफ लॉ के डायरेक्टर प्रो. टीसी राणा, डीन अकादमिक डा. सोनिया, फार्मेसी की प्राचार्या डा. सुनीता एवं डा. सुमिता की उपस्थिति में मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। डा. संतराम देशवाल ने कहा कि यूनेस्को ने वर्ष 1966 में 8 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के रूप में घोषित किया था।
साक्षरता किसी भी समाज के विकास की बुनियाद : डा. विजयपाल नैन
संस्था के चेयरमैन डा. विजयपाल नैन ने विद्यार्थियों से कहा कि साक्षरता किसी भी समाज के विकास की बुनियाद मानी जाती है। जब लोग पढ़ने और लिखने में सक्षम होते हैं, तो वे सरकारी योजनाओं, स्वास्थ्य संबंधी जानकारी, रोजगार के अवसरों और अपने अधिकारों को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं। साक्षरता की सार्थकता इसी में है कि वह व्यक्ति को केवल ज्ञान प्राप्त करने तक सीमित न रखे, बल्कि उसे सोचने, समझने, निर्णय लेने और बदलती परिस्थितियों के अनुसार अपने जीवन को बेहतर बनाने की क्षमता प्रदान करे।इस दौरान बीटेक, वैमानिकी, पॉलिटेक्निक, मैनेजमेंट, फार्मेसी, लॉ,आईटीआई व अन्य प्रोफेशनल कोर्स के विद्यार्थी बड़ी संख्या में मौजूद थे।
उन्होंने अब साक्षरता को केवल व्यक्ति के पढ़ने-लिखने के कौशल तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे सामाजिक, पर्यावरण और आर्थिक विकास से जोड़कर देखा जा रहा है।
