है अनमोल धरोहर हिन्दी

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है अनमोल धरोहर हिन्दी।
गर्व राष्ट्र को तुझपर हिन्दी।
बनी राजभाषा भारत की,
मधुमय सरल मनोहर हिन्दी।
तुझमें जन मन रमता हिन्दी,
लगती मां की ममता हिन्दी।
जोड़ रही भारतवासी को,
हृदय संजोये समता हिन्दी।
संस्कृत की है बेटी प्यारी,
देवनागरी लिपि है न्यारी।
शान यही हम भारतीय की,
निज संस्कृति को सदा संवारी।
जन जन की है आशा हिन्दी,
क्रांतिवीर की भाषा हिन्दी।
विश्वपटल पर कब छायेगी,
हम सबकी अभिलाषा हिन्दी।
पूछ रही है हिन्दी हमसे,
आंग्ल दासता हटेगी कब से।
निज भाषा का मान बढ़ाओ,
‘कुन्दन’ विनती करता सबसे।।

-सुभाष चन्द्र तिवारी ‘कुन्दन’
आजमगढ़।

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